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स्वामी इंद्रदेव महाराज जी ने भी गौ सम्मान आव्हान अभियान का किया समर्थन

गाडरवारा गायत्री मंदिर में गौ माता की पूजा व धेनु चालीसा का पाठ कर गो माता के सानिध्य मे गो भक्तों ने सौंपा आवेदन

आज 27 अप्रैल 2026 को दोपहर में 3 बजे दादा जी धूनी वालों के दरबार में सभी गौ भक्त एकत्र होकर

सिहोरा मे पदस्थ न्यायाधीश सुधांशु सिन्हा एवं न्यायाधीश श्रीमति उर्वशी यादव का सिहोरा न्यायालय स्थानांतरण होने पर

: गाडरवारा,वनस्पति विज्ञान एवं प्राणी संरक्षण की प्रयोगशाला बना रायपुर का हायर सेकण्ड़री स्कूल

Aditi News Team

Thu, Jun 13, 2024
वनस्पति विज्ञान एवं प्राणी संरक्षण की प्रयोगशाला बना रायपुर का हायर सेकण्ड़री स्कूल गाडरवारा। क्षेत्र के चीचली ब्लॉक अंतर्गत ग्राम रायपुर का शासकीय उमा विद्यालय इन दिनों वनस्पति विज्ञान एवं प्राणी संरक्षण की प्रयोगशाला के रूप में विकसित हो रहा है। विदित हो कि प्राचार्य गजेन्द्र कौरव ने विगत 17 वर्षों में विद्यालय का कायाकल्प कर संस्था के प्रति समर्पण भाव अर्पित कर जो कार्य किए वे अब फलीभूत हो रहे है। उनके द्वारा अनेकानेक विकास कार्य कराकर संस्था को अत्यंत आकर्षक और नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण बना दिया है। संस्था में विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधे जिनमे , सिन्दूर, सुपारी, कचनार , बरगद, पीपल, नीम, जामुन, आम, बादाम, शीशम, सप्तपर्णी , बेल,पारिजात, अशोक, बाँस, अमरूद, आँवला, पपीता, नीबू, कटहल ,अनार , बॉटल पाम, गुलमोहर, चंदन ,कदम्ब, तुलसी , मधुकामिनी, शमी, धतूरा, विल्ब, दूर्वा,पारिजात,जासौन,कनेर, मीठी नीम , पर्केरिया, डुरान्टा , थूजा, सूरज मुखी, पिटूनिया,मेरिगोल्ड, हिबिस्कस वेरायटी , अमेरिकन ग्रास, इत्यादि विभिन्न प्रकार के छायादार, औषधीय, फलदार, शोभायमान एवं पौराणिक महत्व के विविध सुगंधित एवं औषधीय महत्व के पौधों को रोपित कर एक सुन्दर उपवन तैयार किया गया जो आज अत्यंत सुन्दर उपवन के रूप में अलौकिक छटा बिखेर रहा है। यहाँ विद्यालय के सुन्दर उद्यान में विविध प्रकार के पक्षियों की प्रजातियाँ निवास करती है इसके साथ ही कभी मोर एवं हिरण तो कभी बन्दर भी विचरण करने आ जाते है जो उद्यान की शोभा बढ़ाते रहते है। प्रकृति प्रेमी प्राचार्य श्री कौरव द्वारा पक्षियों हेतू उक्त पेड़ों पर अधिकाधिक मात्रा में प्रतिवर्ष जल पात्र टाँगें जाते है तथा मोर ,हिरण, एवं अन्य पक्षियों तथा प्राणियों के लिये परिसर में जल पात्र रखे जाते है । साथ ही पक्षियों के भोजन हेतू धान्य, अनाज की व्यवस्था नियमित की जाती है । उल्लेखनीय है कि विद्यालय परिसर में पुष्प वाटिका, कबीर , सूर ,तुलसी, इत्यादी विभिन्न प्रकार की वाटिकायें है जिनमे बैठकर विद्यार्थी गुरुकुल की भांति संस्कारित शिक्षा प्राप्त करते है । सम्पूर्ण उद्यान में भूमिगत स्प्रिंकलर की स्थायी व्यवस्था है तथा प्रत्येक पौधे एवं प्राणियों की जल एवं भोजन व्यवस्था को अत्यंत निष्ठा एवं जबाबदारी से पूर्ण किया जाता है। विद्यालय में वानस्पतिक एवं जलीय अनुकूलन का प्रभावी एवं प्रायोगिक अध्ययन कराने हेतू एक बड़ा लगभग 5000 लीटर की क्षमता का वाटर फ़ाउंटेन है जिसमे संस्था हेतू जल धारण, जलीय अनुकूलन का अध्यापन ,प्राणी एवं पौधों की जल व्यवस्था एवं वर्किंग रूप में फब्बारे के रूप में सौदर्य का वातावरण बनाये रखने का प्रबंध किया गया है। प्राचार्य श्री कौरव के अनुसार विगत 14 वर्षों की संस्था संचालन की तन, मन, धन से समर्पित जबाबदेही तथा प्रतिनित्य किये जाने वाले श्रम दान से संस्था में अनेकानेक विकास कार्य किये जा चुके है जिनमे क्षेत्रीय लगभग 25-30 ग्रामों के पालक गण,समाज सेवी, मोटीवेटर, परामर्श दाता, अन्यान्य सुधीजन, वयोबृद्ध प्रेरणा देने वाले नागरिक गण, धर्म प्रेमी ग्रामीण , कुछ अन्य निजी प्रतिष्ठानों के कुछ संचालक, यु पी एल कंपनी के पदाधिकारी गण , नेशनल थर्मल पावर कंपनी के पदाधिकारी गण , कुछ शासकीय लोक सेवक एवं पूर्व विद्यार्थियों को संस्था के विकास कार्य हेतू जोड़ने का अभियान चलाकर प्रेरित कर समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित की गयी तथा जनभागीदारी के आधार पर प्रत्येक वर्ष एक वृहद कार्य योजना बनाकर निरन्तर कार्य किये गये । जिसके सार्थक परिणाम स्वरूप विद्यालय में वर्तमान में, 3 बड़े बड़े टीन शेड, भव्य प्रार्थना सभागार, 2 बड़े बड़े मंच ,दिव्य उद्यान, विविध प्रकार के पेड़ पौधे, खेल मैदान , विभिन्न देवालय परिसर ( जिनमे विद्यार्थी बैठकर अध्ययन करते है) , वॉटर कूलर, कंप्यूटर, प्रिंटर, इत्यादी की प्रतिपूर्ति सुनिश्चित करायी जा चुकी है। आगे भी निरन्तर लक्ष्य बनाकर अनेकानेक कार्यों हेतू रूपरेखा तैयार की जा चुकी है। विदित हो कि विद्यालय में उत्कृष्ट शिक्षण कार्य विधिवत संचालित होता है जिससे प्रतिवर्ष समस्त परीक्षा परिणाम बहुत अच्छे प्राप्त होते है संस्था का इस सत्र का भी परीक्षा परिणाम 98 प्रतिशत रहा तथा जिला में संस्था की छात्रा अपूर्वा कौरव ने 96. 6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर जिलें की मेरिट सूची में तृतीय स्थान प्राप्त किया है। संस्था की मुख्य अकादमिक गतिविधिययों में कला वाणिज्य,जीव विज्ञान ,गणित संकाय एवं संस्कृत की विभिन्न माध्यमों में शिक्षा के अलावा अत्यंत अनुशासित संगीतमय प्रार्थना सभा, योगा , खेल, बाल सभा, उमंग, जीवन कौशल , कैरियर मार्गदर्शन,स्काउट गाइड, रेड क्रॉस, विज्ञान , प्रकृति सरंक्षण, स्वैच्छिक स्व प्रेरित श्रम दान,गायन वादन, शैक्षिक भ्रमण , वार्षिकोत्सव, संस्कारित विदाई समारोह इत्यादी सह शैक्षिक गतिविधियाँ निरन्तर संचालित रहती है। विद्यालय में सभी विद्यार्थी स्व अनुशासित रहते हुये निर्धारित गणवेश तथा टाई बेल्ट व जूते मौजे ब्लेजर से युक्त होकर प्रतिनित्य 18 ग्रामों से अध्ययन करने आते है । विद्यालय में प्रत्येक व्यक्ति के लिये जूते 100 मीटर दूर उतारने की परम्परा है। विद्यालय की सम्पूर्ण अकादमिक , प्रशासनिक, आध्यात्मिक, नैसर्गिक, अनुशासित व्यवस्था के कारण क्षेत्रीय समस्त निजी विद्यालयों के विद्यार्थी प्रवेश लेने हेतू आतुर रहते है । विद्यालय की सम्पूर्ण शैक्षिणिक गतिविधियां निजी विद्यालयों की तुलना में बहुत ही उत्तम और लाभदायक है। विद्यालय स्तर पर गुरुकुल परम्परा की भांति उपरोक्त समस्त व्यवस्थाओं के साथ साथ प्रतिवर्ष लगभग 501 पौधों का रोपण किया जाता है।

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