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: गो आधारित कृषि भारत की अर्थव्यवस्था का मूल आधार रहा है, गोपाल भाई सुतारिया

Aditi News Team

Sat, Apr 12, 2025
गो आधारित कृषि भारत की अर्थव्यवस्था का मूल आधार रहा है, गोपाल भाई सुतारिया सनेर/सुसनेर जनपद क्षेत्र में स्थापित विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में चल रहें एक वर्षीय वैद लक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के उपसंहार उत्सव में श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा,श्री कामधेनु गो अभयारण्य, सजीवनी लाईफ एवं धरतीदेवी फाउंडेशन के तत्वाधान में चल रहें ऋषि कृषि (गो आधारित जैविक खेती) प्रशिक्षण वर्ग के समापन समारोह पर गोबर दास जी महाराज ने कहा कि जानकारियां सभी को है लेकिन करने वालों का आज भी अभाव है। सीधी सहज विधि है कृषि की अपने पूर्वजों से पूछ ले वो आपको सभी बता देंगे। जब हमारे पूर्वज हमें कृषि के विषय में बताएंगे तो हमे जल्दी समझ में आता है । उन्होंने कहा जो अच्छे से खेती से करके जनता है उसके पास सभी समस्याओं का हल होता हे। जो विधि हमें सहजता से याद हो जाए और जो सहजता से हमें अपने घरों में उपलब्ध हो जाएं उसी से आप कृषि करें। जब तक दो चीजों में हम सुधार न कर ले तब हमें कृषि मे दिक्कत होगी। हरियाणा से आए हरीश भाई ने पंचगव्य पर कहा कि बिना पंचगव्य के बिना कृषि करना असंभव है। पंचगव्य के बारे में बताते हुए कहा कि हमें देशी गाय हमें पांच तरह के गव्य देती है। दूध गोबर मूत्र हमें सीधा मिलता है। दो तत्व हमारे ऋषि मुनियों ने इन तत्वों से अद्भुत खोजे हैं। उन्होंने बताया कि गोबर में लछमी का वास होने की बात कही और बताया कि गाय के गोबर में 32 तत्व पाए जाने की बात कही। देशी गाय के गोबर को बार बार मिट्टी मे डालने से हमारी जमीन उपजाऊ बन जाती हैं। हमारे पूर्वज गाय के गोबर से कृषि करते थे इसलिए उन सभी लोगो का शरीर भी स्वस्थ और मजबूत रहता था। आयुर्वेद में गाय के बारे मे बड़ी महत्ता बताई है। घुटने की बीमारियां आज के केमिकल युक्त अनाज खाने से हो रही हैं। गोबर और गौ मूत्र के तत्व हमे इनके द्वारा कृषि द्वारा पैदा किए गए अनाजों को हम पहले खाते थे। हमारे शरीर में जल तत्व की पूर्ति करता था। आज पूरे देश में गाय को न रखने के कारण नकली दूध पीने मिल रहा है जिसके चलते बच्चों में बुद्धिमता कमी आ रही है।   बंशी गिर गोशाला के संस्थापक गोपाल भाई सुथारिया ने अपने उद्बोधन में गो आधारित कृषि पर बोलते हुए कहा कि हमें आचरण में गौ आधारित कृषि करना होगी। उन्होंने पांच चरण बताए कृषि को सही करने के उपाय। गौ शाला में गौ माता सुख पूर्वक रखना चाहिए। उन्होंने पहले चरण में गौ कृपा अमृतम घर पर कैसे बढ़ेगा यह बताया। दूसरे चरण में देशी गाय के गोबर से कम्पोस्ट खाद निमार्ण करने की विधि बताई। उन्होंने सलरी तैयार करने की विधि बताई। तीसरा चरण में बताया कि गो कृपा अंमृतम कितना डालना चाहिए। चौथे चरण में कीट पर कैसे नियंत्रण करना बताया है। पूर्णिमा और अमावस्या पर गौ कृपा का जरूर छिड़कना चाहिए। पांचवे चरण में आपात कालीन समय में कीट नियंत्रण करने की विधि भी बताई। गो कृपा अमृतम जो बनेगा उसमें 24 तत्व जीवाणु यूरिया का काम कर देंगे। फासफेरस पोटास सल्फर, एवं स्वास्थ वर्धक तथा कंपोस्ट करने वाले बैक्टीरिया, तथा खनिज क्षार जैसे महत्वपूर्ण इस गो कृपा अमृतम के माध्यम से मिलते हैं। जिससे हमारी फसल अधिक और स्वास्थ वर्धक होगी। उन्होंने कहा कि गो कृपा अमृतम से खेत मे थोड़े समय मे ही देशी केंचुआ की वृद्धि हो जाएगी। बेल से खेती करने से फसल के बीच की घास पलटी करने से वह घास पूस भी देशी खाद के रूप मे तब्दील हो जाती है जिससे फसल का उत्पादन भी बढ़ जाएगा। मेढ़ पर खेती करने के फायदे भी बताए। हमारे केंद्र में गौ माता और धरती माता होना चाहिए। भारत की सभी देशी गाय की प्रजाति सर्वोत्तम है कमी सिर्फ काले सिर वाले में कमी है। कार्यक्रम का संचालन अजीत जी ने किया वहीं गौ अभ्यारण्य के प्रबंधक शिवराज जी ने कार्यक्रम मे पधारे अतिथियों का दुपट्टा पहना कर स्वागत किया।

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