: 16 फरवरी को बालिका आत्मरक्षा कार्यक्रम का होगा आयोजन
Fri, Feb 14, 2025
रिपोर्टर अनिल जैन
16 फरवरी को बालिका आत्मरक्षा कार्यक्रम का होगा आयोजन
बालिकाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे बालिका आत्मरक्षा कार्यक्रम का समापन 16 फरवरी को होने जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत सैकड़ों बालिकाओं को आत्मरक्षा के विभिन्न तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे वे किसी भी आपात स्थिति में खुद की सुरक्षा कर सकें।26 दिसंबर से प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम का समापन 16 फरवरी को प्रणाम को स्टेडियम में दोपहर 12:00 बजे होगा। प्रशिक्षिका सुधा उपाध्याय है जिन्होंने इस आयोजन को किया।इस अवसर पर विशेष समापन समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रमुख अतिथियों द्वारा प्रशिक्षार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल शारीरिक सुरक्षा बल्कि मानसिक रूप से भी बालिकाओं को सशक्त बनाने का प्रयास किया गया है।कार्यक्रम के आयोजक और प्रशिक्षक समापन समारोह में बालिकाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने पर जोर देंगे। इस पहल से समाज में लड़कियों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाने की भी उम्मीद है।नरेंद्र मोदी विचार मंच महिला शाखा एकता अश्वनी तिवारी प्रदेश महामंत्री की अगुवाई में हुए इस आयोजन ने बालिकाओं में एक नया उत्साह और आत्मविश्वास जगाया है।
: नरसिंहपुर,नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने के आरोपी को 20-20 वर्ष का दोहरा सश्रम कारावास
Fri, Feb 14, 2025
नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने के आरोपी को 20-20 वर्ष का दोहरा सश्रम कारावास
नरसिंहपुर। न्यायालय द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश डॉ श्रीमती अंजली पारे के न्यायालय द्वारा नाबालिग के साथ दुष्कर्म के प्रकरण में आरोपी पप्पू उर्फ विजय आ. पहलाद सिंह अहिरवार आयु 33 वर्ष, हाल निवासी ग्राम भौरगढ़, थाना सांईखेड़ा, जिला नरसिंहपुर , अन्य पता ग्राम दिघावन, थाना देवरी, जिला रायसेन (म.प्र.) को दोषसिद्ध पाते हुए आरोपी को धारा- 5(एल)/6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 में 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5000/- जुर्माना तथा धारा- 3/4 की उपधारा(2) लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 में 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5000/- जुर्माना सें तथा भादवि की धारा 506 (भाग-दो) में 03 वर्ष सश्रम कारावास एवं 1000/- जुर्माना से दंडित किया गया।अभियोक्त्री की रिपोर्ट पर आरक्षी केन्द्र गाडरवारा में अपराध क्रमांक 00/2024 धारा 376, 376(3), 376(2)(एन), 506 एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 5(एल)/6 के अंतर्गत देहाती नालसी लेखबद्ध की गई, जिसके आधार पर आरक्षी केन्द्र सांईखेडा में अपराध क्रमांक 75/2024 पर प्रथम सूचना रिपोर्ट लेख की जाकर मामला पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया था। प्रभारी उपसंचालक अभियोजन/जिला लोक अभियोजन अधिकारी नरसिंहपुर के मार्गदर्शन में, विशेष लोक अभियोजक श्रीमती संगीता दुबे द्वारा उक्त प्रकरण में पैरवी की गई।
: वेलेंटाइन डे और भारतीय संदर्भ
Fri, Feb 14, 2025
वेलेंटाइन डे और भारतीय संदर्भ
(आलेख )सुशील शर्माप्यार या प्रेम एक इंसान के लिए सबसे संतोषजनक भावनाओं में से एक है जिसे हर कोई अनुभव करना चाहता है। हर कोई प्यार पाने के लिए प्यार करता है। आप कुछ शब्दों में प्यार को परिभाषित नहीं कर सकते, हम में से हर एक के पास प्यार के बारे में अपना दृष्टिकोण है। यह किसी को शारीरिक रूप से और साथ ही भावनात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। वेलेंटाइन डे की अवधारणा भारतीय संस्कृति से पूरी तरह से अलग है। भारत में लोग अपने पारिवारिक मूल्यों को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं और जहां हर दिन हर परिवार में आपसी स्नेह और एक दूसरे का समर्पण आचरण में होता है मैं वास्तव में यह नहीं समझता कि हमे साल के एक दिन में अपने प्यार के प्रदर्शन की जरूरत है। भारत हमेशा से विश्व संस्कृतियों, धर्मों और परंपराओं को खुले हृदय से अपनाता रहा है , लेकिन अब हम पश्चिमी त्योहारों और संस्कृति के इस विपणन अभियान के कारण स्वदेशी संस्कृति में एक स्पष्ट गिरावट देख रहे हैं, जो लोगों को लगता है कि यह दिवस मनाना फैशनेबल है। लेकिन उन्हें नहीं मालूम की इस आयोजन को इस तरह से बाजार में उतारा गया है कि यह खास लग रहा है। भारत में प्रेम का बहुत गहरा अर्थ है और अधिकांश भारतीय एक स्थायी संबंध के लिए प्रयास करते हैं जिससे शादी के बाद एक स्थिर जीवन मिल सके लेकिन अब रिश्ते स्पष्ट रूप से खोखले हैं और मुझे नहीं लगता कि उनमें प्यार का एक पल भी शामिल है, रिश्तों में प्यार की जगह अब केवल आकर्षण है। मेरा मानना है कि प्यार कभी जोर जबरदस्ती या फैशन से नहीं होता बल्कि एक दूसरे के प्रति केयर से उत्पन्न होता है। भारतीय संस्कृति वैलेंटाइन्स दिवस को अपने में समाहित कर सकती है जैसे कि इसने कई अन्य संस्कृतियों और त्योहारों को अवशोषित किया है। आखिरकार प्यार का जश्न अपने आप में हानिकारक नहीं है, लेकिन यह भूल जाना कि प्यार क्या है और स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को सिरे से ख़ारिज करना क्योंकि वह वैश्वीकरण की परिभाषा के अनुरूप नहीं है, निश्चित रूप से हानिकारक है। पश्चिमी संस्कृति में, हर चीज का व्यवसायीकरण होता है, इसलिए उनके पास वेलेंटाइन डे, फादर्स डे, मदर्स डे आदि जैसी अवधारणाएं हैं। ज्यादातर लोग अपने माता-पिता के साथ नहीं रहते हैं क्योंकि 16 वर्ष या अधिकतम 18 की उम्र पार करने के बाद बच्चों को एक बोझ माना जाता है। इसलिए प्यार के लिए उन्हें एक खास दिन की जरूरत होती है।वैलेंटाइन डे का समाज पर ऐसा प्रभाव पड़ता है जो वास्तव में दिखाई नहीं देता। यह प्रभाव हिंदू समाज पर अधिक है, जो परंपराओं और संस्कृति से काफी हद तक जुड़ा हुआ है और इसमें से कई लोग आत्म शिथिल हैं। व्यावसायीकरण से सब कुछ उत्पन्न हुआ, जहां यह कार्ड और गुलाब के साथ शुरू हुआ और अब महंगे रात्रिभोज, कपड़े, हीरे और यहां तक कि छोटे अवकाश भी इसमें शामिल हैं । जोड़े भी अपने प्यार का प्रदर्शन करते हुए इन दिनों शालीनता की सभी सीमाओं को पार करते हैं, जो प्यार बेडरूम की चार दीवारों के भीतर आरक्षित किया जाता था आज उसे खुलें में आप कहीं भी देख सकते हैं । इसकारण से भारत के इस पश्चिमीकरण का विरोध करने वालों की संख्या बढ़ रही है।वास्तव में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि त्योहारों को उनके नाम और मूल के बजाय किस तरह से मनाया जाय। जैसे अधिकार और कर्तव्य होते हैं, वैसे ही किसी भी त्योहार का जश्न और उसकी सीमा में होना चाहिए । वेलेंटाइन डे मनाने वाले युवाओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि जिस समाज में हम रह रहे हैं वह परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और समाज में कई बुरे तत्व हैं जो ऐसे दिनों का पूरा फायदा उठाते हैं। उनके लिए प्यार का मतलब शारीरिक होता है और इससे ज्यादा कुछ नहीं। यदि यह इरादा है तो यह सच है कि केवल वेलेंटाइन ही नहीं बल्कि ऐसा कोई भी त्योहार भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। इसके अलावा हमारा समाज एक खुला समाज नहीं हैं और जब हम इस तरह की बातों को खुले तौर पर कबूल करते हैं तो ये गलत माना जाता है। लेकिन अगर वेलेंटाइन डे त्योहार को शुद्ध पवित्र और अच्छी भावना के साथ मनाया जाता है और हम अपने प्रियजनों के साथ समय बिताते हैं तो इसमें कुछ गलत नहीं है।