गौशालाओं को स्वावलंबी और ग्राम उन्नयन का केंद्र बनाना मुख्य लक्ष्य- कल : कामधेनु गौशाला मोहद में जिला स्तरीय गौशाला संचालक सम्मेलन संपन्न
Aditi News Team
Fri, Jun 19, 2026
गौशालाओं को स्वावलंबी और ग्राम उन्नयन का केंद्र बनाना मुख्य लक्ष्य- कलेक्टर रजनी सिंह
कामधेनु गौशाला मोहद में जिला स्तरीय गौशाला संचालक सम्मेलन संपन्न
कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह ने कहा कि राज्य सरकार गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और गौशालाओं का बेहतर संचालन करने के लिए लगातार मदद कर रही है। उन्होंने कहा कि गौशाला संचालकों को पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य, चारा व्यवस्था, साफ-सफाई इत्यादि पर विशेष ध्यान देना चाहिए, जिससे गौशालाओं में दुग्ध का बेहतर उत्पादन हो सके और गौशाला एक आर्थिक रूप से सशक्त बन सके। कलेक्टर श्रीमती सिंह ने कहा कि गौशाला के पशुओं का गोबर और गौमूत्र को व्यावसायिक उपयोग में लिया जाए। गौशालाओं में गौ-काष्ठ, वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) और गोबर के दीये जैसे विभिन्न उत्पाद तैयार कर बाजार में विक्रय किया जाए। कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह बुधवार को ग्राम मोहद विकासखंड करेली में आयोजित जिला स्तरीय गौशाला संचालक सम्मेलन को संबोधित कर रही थी। कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ गौ पूजन और महाराणा प्रताप एवं महाराजा छत्रसाल के चित्रों पर माल्यार्पण कर किया। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री गजेन्द्र सिंह नागेश, जनपद पंचायत करेली की अध्यक्ष सुश्री प्रतिज्ञा परिहार, कृषि स्थाई समिति के सभापति श्री सीताराम नामदेव, ग्राम मोहद की सरपंच श्रीमती सुनीता चौहान तथा जनपद सदस्य सुश्री रीना खेमरिया, उप संचालक कृषि विभाग श्री मोरिस नाथ, उप संचालक पशुपालन विभाग डॉ. सुनील बृजपुरिया, अतिरिक्त उपसंचालक डॉ. प्रवीण पटेल, एबीपीओ डॉ. एम.पी. तिवारी, डॉ. बी.के. मुड़िया, विभिन्न क्षेत्रों से आए पशु चिकित्सक, सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी, कामधेनु गौशाला के संचालक राजू झारिया, विभिन्न गौशालाओं के संचालक, गौ सेवक और गौ मैत्री कार्यकर्ता मौजूद थे। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती सिंह और सीईओ जिला पंचायत श्री गजेन्द्र सिंह नागेश ने गौशाला प्रांगण में पौधरोपण किया। कार्यशाला में कृषि, आजीविका मिशन, आत्मा परियोजना और ग्रामीण विकास विभाग के बीच आपसी तालमेल से पशुपालन को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। यह कार्यक्रम सावित्री बाई जन समिति एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया।
कलेक्टर श्रीमती सिंह ने कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य जिले की गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना, आधुनिक तकनीकों का प्रचार-प्रसार करना और गौवंश के संवर्धन हेतु विस्तृत रणनीतियां तैयार करना है। जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में जिले की पांच गौशालाओं का चयन कर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी नागरिक अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और पुण्यतिथि जैसे अवसरों पर गौशालाओं में आकर गौ-ग्रास, भूसा व अन्य आवश्यक उपकरण दान करें। सभी पशुपालक वर्षा ऋतु से पहले अपने-अपने पशुओं का टीकाकरण कर एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) से बचाव सुनिश्चित करें। गौशालाओं में जन्म लेने वाले बछड़ों को कृमिनाशक (डीवर्मिंग) और संतुलित आहार देकर स्वस्थ रखा जाए। अतिक्रमण से मुक्त कराई गई गौशालाओं की भूमि पर चारागाह का उत्पादन करें। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री गजेन्द्र सिंह नागेश ने आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि गौशाला केवल निराश्रित गौवंश के आश्रय तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे ग्राम उन्नयन केंद्र के रूप में विकसित किया जाना आवश्यक है। गौशालाओं के पास उपलब्ध भूमि का अधिकतम उपयोग कर वहां उद्यानिकी (बागवानी) की जानी चाहिए। गौशालाओं में विविध गौ-उत्पादों का निर्माण और अन्य गतिविधियों का संचालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गौशालाओं को पूरे ग्रामीण क्षेत्र के लिए 'ऊर्जा के केंद्र' के रूप में विकसित करें, जिससे वे पूरे गांव के लिए विकास का आधार बनें।
उपसंचालक डॉ. सुनील बृजपुरिया ने इस अवसर पर सभी पशुपालकों को 'गौ-गोरस' ऐप डाउनलोड करने की सलाह दी। इस ऐप के माध्यम से पशुपालक यह जान सकेंगे कि किस पशु को कितना संतुलित आहार देना है, ताकि दुग्ध उत्पादन में बढ़ोत्तरी हो सके। भविष्य में इस ऐप के जरिए पशु और चारे की खरीद-बिक्री भी की जा सकेगी। गौशालाओं को सिर्फ आश्रय स्थल नहीं, बल्कि दूध उत्पादन और उच्च नस्ल के पशुओं का केंद्र बनाया जाएगा। कार्यशाला में डॉ. बी.के. मुड़िया ने कहा कि जिले में साइलेज (हरे चारे को सुरक्षित रखने की तकनीक) का उत्पादन तो अच्छा हो रहा है। उन्होंने इसके लिए पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से साइलेज बनाने और इसके फायदों की जानकारी दी। डॉ. पूनम दोहरे और डॉ. श्रेया दुबे द्वारा आयोजित कार्यशाला में गौ सेवकों और 'गौ मैत्री' कार्यकर्ताओं को तकनीकी उन्नयन, कृत्रिम गर्भाधान- एआई का रिफ्रेशर का प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने फील्ड में आने वाली समस्याओं का निराकरण और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। डॉ. बी.के. मुड़िया ने पशुओं के लिए उत्तम पोषण प्रबंधन के अंतर्गत 'साइलेज मेकिंग' (हरे चारे को सुरक्षित रखने की विधि) विषय पर व्याख्यान दिया। आयोजित सम्मेलन में गौरस ऐप की उपयोगिता एवं महत्व का प्रचार-प्रसार किया गया।
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
नरसिंहपुर,कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह
नरसिंहपुर सीईओ जिला पंचायत गजेन्द्र सिंह नागेश