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शिक्षा केवल बंद कमरों और पाठ्यपुस्तकों तक सीमित ज्ञान की सीमाओं से परे : गाडरवारा की कन्या उ मा शाला की छात्राओं ने भेड़ाघाट में देखे प्रकृति के अद्भुत रंग

Aditi News Team

Sun, Dec 21, 2025

ज्ञान की सीमाओं से परे,

कन्या उ.मा.शाला गाडरवारा की छात्राओं ने भेड़ाघाट में देखे प्रकृति के अद्भुत रंग

शिक्षा केवल बंद कमरों और पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है, अपितु वास्तविक ज्ञान प्रकृति की गोद एवं ऐतिहासिक स्थलों के प्रत्यक्ष दर्शन से प्राप्त होता है। इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गाडरवारा की छात्राओं के लिए एक दिवसीय शैक्षिक भ्रमण का आयोजन किया गया। इस यात्रा के दौरान छात्राओं ने नर्मदा की लहरों पर बसे संगमरमरी वादियों के लिए विश्व प्रसिद्ध भेड़ाघाट का अवलोकन किया।

भ्रमण के दौरान छात्राओं ने जल प्रबंधन एवं पनबिजली परियोजनाओं की कार्यप्रणाली को समझा। विशाल जलराशि को देख छात्राएं रोमांचित हो उठीं। भ्रमण के दौरान उन्होंने पारिस्थितिक तंत्र एवं सिंचाई में इसकी भूमिका के विषय में जानकारी प्राप्त की।

भ्रमण में भेड़ाघाट एवं धुआंधार जलप्रपात मुख्य आकर्षण रहा। संगमरमर की ऊँची चट्टानों के बीच नर्मदा का कल-कल निनाद सुन छात्राएं मंत्रमुग्ध हो गईं। यहाँ छात्राओं ने भूगोल के उन अध्यायों को जीवंत होते देखा, जिन्हें वे अब तक केवल किताबों में पढ़ती आई थीं। धुआंधार जलप्रपात की गर्जना एवं जलकणों की फुहारों ने छात्राओं में अपार उत्साह भर दिया।

भ्रमण दल में शामिल छात्राओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस यात्रा ने उनकी जिज्ञासाओं को नई दिशा दी है। छात्राओं ने कहा कि "भेड़ाघाट में चट्टानों के कटाव और जल के संचय को प्रत्यक्ष देखना हमारे लिए एक जादुई अनुभव था। इससे हमें पर्यावरण संरक्षण की महत्ता समझ आई।"

भ्रमण में साथ रहे वरिष्ठ शिक्षकों मालती मेहरा,अल्पना नाहर,देवेंद्र ठाकुर,योगेन्द्र झरिया ने कहा कि भ्रमण से छात्राओं में सामूहिक सहभागिता, अनुशासन एवं नेतृत्व के गुणों का विकास होता है। यात्रा के दौरान शिक्षकों ने छात्राओं को ऐतिहासिक स्थलों के पौराणिक महत्व और उनकी भौगोलिक संरचना के विषय में विस्तार से समझाया।

संस्था के प्राचार्य श्री सुशील शर्मा ने शैक्षिक भ्रमण की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा— "विद्यार्थी जीवन में भ्रमण का स्थान अनिवार्य है। यह छात्राओं की अवलोकन शक्ति को बढ़ाता है एवं उन्हें अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ता है। बरगी और भेड़ाघाट की यह यात्रा छात्राओं के मानसिक क्षितिज को विस्तार देने में सहायक सिद्ध होगी। 'धरोहर' को समझने के लिए उसे देखना एवं महसूस करना आवश्यक है।"

यह संपूर्ण भ्रमण अनुशासन और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। विद्यालय लौटने पर छात्राओं के चेहरों पर एक नई चमक एवं ज्ञान की संतुष्टि स्पष्ट दिखाई दे रही थी।

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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

भेड़ाघाट

गाडरवारा की कन्या उ मा शाला

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