: सांईखेड़ा में शिव स्वरूप धुनी वाले दादा जी की धूनी के दर्शन करने दूर दूर से आते हैं भक्त
Sun, Jul 21, 2024
सांईखेड़ा में शिव स्वरूप धुनी वाले दादा जी की धूनी के दर्शन करने दूर दूर से आते हैं भक्त
19वी सदी के प्रारंभ में काबुल में एक पश्तो संत हुआ करते थे, श्री गौरी शंकरजी महाराज, जो शिवजी के बहुत बड़े भक्त थे। शिवजी के दर्शन को व्याकुल थे। एक साधु ने कहा कि ‘ नर्मदा का कंकर कंकर , शंकर ‘! (शिवजी नर्मदा के किनारे मिलेंगे) और तभी वे अफ़ग़ानिस्तान से नर्मदा जी की ओर शिवजी की खोज मे निकल पड़े | वहाँ पहुँच कर वे नर्मदा जी की परिक्रमा पर चल दिये। साधुओं की एक जमात में नर्मदा के सिद्ध संत कमल भारती जी की जमात से जुड़ गए । जमात अपना सारा सामान 40 – 50 घोड़ों पर लाद कर नर्मदाजी की एक परिक्रमा 12 साल में पूरी किया करती थी। ऐसी 3 परिक्रमाये पूर्ण होने के पश्चात भी गौरी शंकर जी महाराज को भोलेनाथ के दर्शन ना होने पर वे मायूस हो गये और उन्होने नर्मदाजी में डूब कर अपने प्राण त्याग ने की बात मन में ठान ली। उस समय उनकी जमात साईखेड़ा के पास श्री श्री संघु में थी । जैसे ही उन्होंने अपने चरण नर्मदाजी में रखे पीछे से एक 3 – 4 साल की बालिका ने उनकी छोटी उंगली पकड़ ली और कहा ‘ क्यों? डूबने जा रहा है?, मरने जा रहा है? ‘ । श्री गौरी शंकरजी अच्चम्भे में पड़ गये कि उनकी जल समाधि के विषय में किसी को ज्ञात नहीं था तो फिर इस कन्या को कैसे पता चला। नर्मदाजी ने उन्हे अपने दिव्य रूप में साक्षात दर्शन दिए और कहा ‘देख यह जो तू करने जा रहा है यह कायरों का काम है। तू भूल कर रहा है। केशव नाम (श्री बड़े दादाजी) का जो युवा तेरी जमात में है वह ही साक्षात शिवजी हैं ‘। सुनकर गौरी शंकर जी तुरंत ही अपनी जमात की ओर लौट गए।रास्ते में उन्हें स्मरण हुआ कि कैसे उनका जमात का शिष्य “केशव” प्रातःकाल जमात के प्रस्थान करने से पूर्व अकेले सबके लिए हलवा मालपुआ और खीर बनाता है। कभी घी की कमी पड़ने पर वह नर्मदाजी के जल से उतना ही स्वादिष्ट मालपुआ और हलवा बनता जैसे घी में बना हुआ हो, और बाद मे जब जमात के पास पर्याप्त घी जमा हो जाता तो वह घी नर्मदा जी में वापस डाल देता | श्री गौरी शंकरजी को ज्ञात था कि केशव में कुछ सिद्धियां हैं किन्तु वह साक्षात महादेव हो सकते हैं, यह उनकी कल्पना से परे था ।इसी सोच विचार में वे अपने डेरे पहुंचे जहां केशव उनकी तरफ पीठ किए बर्तन धो रहा था । तब पहली बार श्री गौरी शंकरजी को उनमें शिवजी का रूप दिखाई दिया | साक्षात शिव के स्वरूप में दर्शन प्राप्त कर केशव के निर्देशानुसारश्री गौरी शंकरजी अपनी जमात को ले कर कुछ दूर खोकसर चले गये जहाँ उन्होने केशवजी (दादाजी) का रहस्य सबको बताया । चूँकि उनको अपनी जीवन भर की तपस्या का फल प्राप्त हो गया था, उन्होंने वहीं समाधि ले ली |कुछ समय पश्चात श्री केशव दादाजी महाराज होशंगाबाद में दिगंबर रूप मे रामलाल दादा के नाम से पाए गये,जहां आपने कई लीलाएँ की। करीब 1901 मे वे लोगों के दुख हरने और लोगों को पापों से मुक्त करने के लिए साइंखेड़ा आए जहाँ वे कई वर्ष रुके और उन्होने अनगिनत चमत्कार दिखाए |साईंखेड़ा में श्री दादाजी महाराज के आगे पीछे बच्चे लोग घुमते और उन्हें पगला बाबा कह कर बहुत सताया करते थे। बच्चों को दूर भगाने के लिए दादाजी ने एक डंडा हाथ में रखना शुरू कर दिया, तब से उनको लोग डंडे वाले दादा पुकारने लगे। उनका डंडा जिस किसी पे पड़े, उसका उद्धार हो जाता । वह दिन भर जंगल एवं खेतों में घूमते और गायों को चराते रहते और शाम को एक सूखे आम के पेड़ के खोकले में बैठ जाते थे । एक दिन दादाजी ने उस पेड़ की सूखी लकड़ियों से धूनी रमा ली और तबसे लोग उन्हे “धूनीवाले दादाजी “भी कह कर पुकारने लगे।लगभग 30 साल तक दादाजी साईंखेड़ा और उसके आस पास के इलाकों मे भ्रमण करते रहे ! 1929 में, दादाजी ने साईखेड़ा से छीपानेर, बागली, उज्जैन, इंदौर, नवघाट खेड़ी की यात्रा करते हुए खंडवा में आगमन किया।जहां अनेक चमत्कारों और लीलाओं के पश्चात धुनी वाले दादा जी ने मार्गशीर्ष सुदी ,13 को 1930 में समाधि ली । खंडवा में आज भी उनका समाधि मंदिर , अखंड धुना , नर्मदा मंदिर , हनुमान और भैरव स्थान आदि हैं । दादा जी धुनी वाले वहीं हैं वे आज भी अपनी सिद्धियों से सब भक्तों की माँगें और बिना माँगे ही झोलियाँ भर रहे हैं । उनकी पीड़ा हर रहे हैं । सिर्फ़ आपको जाना भर है । स्मरण मात्र करना है जय श्री धुनी वाले दादा जी,शिव स्वरूप !।इस धुनी का निर्माण कार्य दादा जी के एक परम शिष्य श्री हरिहरानंद जी ने करायी जो जो छोटे दादा जी के रूप में जाने गए थे । वे राजस्थान से दौसा ज़िले के डीडवाना गाँव से आये सेठ भँवर लाल थे ! बड़े दादा जी धुनी वालों के दर्शन करने आये भँवर जी कभी गाँव नहीं लौटे और हरिहरानंद बनकर शिष्य भाव से वहीं रुक गए । दादा जी ने उन्हें अनेक सिद्धियाँ प्रदान की । आज भी खंडवा के इस क्षेत्र में बड़े दादाजी के बराबर वाले हाल के बराबर छोटे दादा जी की भी समाधि है । 1942 में आप समाधिस्थ हुए।चमत्कार और लीलाएँ वहाँ भी बराबर से देखी और अनुभव की जाती हैं !
: उत्तर कन्नड़ में भूस्खलन से सात लोगों की मौत, तीन लापता
Sun, Jul 21, 2024
उत्तर कन्नड़ में भूस्खलन से सात लोगों की मौत, तीन लापता
कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ में भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है, जिसके चलते कई लोगों के लापता होने की भी खबर है। जिले की उपायुक्त लक्ष्मी प्रिया ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि कर्नाटक में भूस्खलन प्रभावित जिले में बचाव अभियान जारी है और सात शव बरामद किए गए हैं।उपायुक्त ने बताया कि 10 लोगों के लापता होने की शिकायत मिली थी, जिनमें से तीन अभी भी लापता हैं। उन्होंने एजेंसी से बात करते हुए कहा, 'एनडीआरएफ टीम, एनएच टीम, नौसेना, तटरक्षक बल, अग्निशमन सेवा, स्थानीय पुलिस, हर कोई वहां काम पर है। जैसा कि हमने पहले बताया है, हमें लापता लोगों के संबंध में 10 शिकायतें मिली हैं, जिनमें से सात शव बरामद किए गए हैं, तीन लोग अभी भी लापता हैं।'
लगातार हो रहा है भूस्खलन
वहीं उत्तर कन्नड़ के एसपी नारायण एम ने कहा कि भूस्खलन लगातार हो रहा है। प्रशासन की ओर से बचाव कार्य भी जारी है। उन्होंने कहा, 'तीन लोग अभी भी लापता हैं। समस्या यह है कि वहां से नदी बहती है और भूस्खलन लगातार हो रहा है। हम लगातार कीचड़ साफ कर रहे हैं। बचाव कार्यों में हम जो भी प्रगति करेंगे, ब्रीफिंग प्रदान की जाएगी। यह एक बहुत ही संकीर्ण सड़क है। हम अपने स्तर पर सर्वश्रेष्ठ कर रहे हैं।'
एचडी कुमारस्वामी ने किया प्रभावित क्षेत्र का दौरा
इधर, केंद्रीय मंत्री और जद (एस) नेता एचडी कुमारस्वामी ने उत्तर कन्नड़ के अंकोला में शिरूर गांव का दौरा किया, जो 17 जुलाई को लगातार बारिश के बाद बड़े पैमाने पर भूस्खलन से प्रभावित हुआ था। अंकोला क्षेत्र के कई निवासियों ने शुक्रवार को शिरूर गांव में देखभाल केंद्रों में शरण ली, क्योंकि क्षेत्र में भूस्खलन का कहर जारी है।क्षेत्र के लोगों के लिए आगे भी राहत मिलने की उम्मीद कम है। बेंगलुरु के क्षेत्रीय मौसम केंद्र ने 20 जुलाई को उत्तर कन्नड़ जिले में बारिश के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जबकि 21 जुलाई के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसने 20 जुलाई के लिए शिमोगा, उडुपी और चिकमंगलूर के लिए भी रेड अलर्ट जारी किया है।
: गाडरवारा शिशु भारती के तहत गुरु पूजन कार्यक्रम संपन्न
Sat, Jul 20, 2024
शिशु भारती के तहत गुरु पूजन कार्यक्रम संपन्न
गाडरवारा नगर में स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर नर्मदा कालोनी मेअखिल भारतीय योजना विध्या भारती के मार्गदर्शन में शिशु भारती साप्ताहिक कार्यक्रम के तहत आज गुरु पूर्णिमा पूजन कार्यक्रम मूलचंद पटेल, प्रचारक गायत्री युग निर्माण योजना के मुख्य आतिथ्य में व प्रभारी प्राचार्य विपिन श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आचार्यों की उपस्थिति में मनाया गया ।इस अवसर पर पटेल ने गुरू पूजन पूर्णिमा कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में गुरु का अपना महत्व है और कहा कि जैसे जल बिन सून वैसे ही व्यक्ति गुरु बिन सून है /इस अवसर पर कार्तिक वर्मा, देव पांडे, सिध्दार्थ पांडे, आदित्य नामदेव, समर, बहिन प्रियांशी विश्वकर्मा, झलक व आचार्यों ने भी गुरू प्रसंग पर अपने विचार व्यक्त किए ।अंत में शिशु भारती प्रमुख ने आभार प्रकट किया ।उल्लेखनीय है कि प्रति शनिवार को शिशु मंदिर में शिशु भारती का आयोजन किया जाता है जिससे बच्चों के बौध्दिक विकास और अभिव्यक्ति कला के विकास के लिए कार्यक्रम होते है।