: Kalki 2898 AD फ़िल्म समीक्षा
Sun, Jun 30, 2024
हर्षित शर्मा
Kalki 2898 AD फ़िल्म समीक्षा
डायरेक्टर नाग अश्विन द्वारा निर्देशित 600 करोड़ की यह फ़िल्म किसी भी मायने में हॉलीवुड की फ़िल्म से कम नहीं है । पुराणों के तथ्यों को गहन अध्ययन के बाद भविष्य के काल खंड से जोड़कर जिस तरह से दिखाया जा रहा है यह अपने आप मे अनोख है ।900 साल बाद प्रथ्वी पर जब गंगा में एक बूंद पानी नहीं बचेगा तब के हालातों को दर्शाया गया है ।।बिना जल के भविष्य की काशी ,और अदृश्य चमत्कारों से भरे शहर संभाला जहाँ होगा कल्कि अवतार का जन्म उसे भी काफी हद तक बेहतरीन बारीकी से दिखाया गया ।अश्वत्थामा के किरदार को शायद जी अमिताभ बच्चन से बेहतर इस दुनिया मे निभा सकता था ।उनके पर्दे पर आते ही पूरा हॉल जोरदार तालियों और सीटियों से गूंज उठता है। जिस तरह रामानंद सागर की रामायण में हनुमान के किरदार में दारा सिंह अमर हो गए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह पीढ़ी अश्वत्थामा का नाम जब भी सुनेगी अमिताभ बच्चन का 8 फुट का किरदार उनकी आंखों के सामने होगा ।।फ़िल्म के मुख्य पात्र भैरव जिसमें सुपरस्टार प्रभास ने शानदार अभिनय किया है शुरुआत में उनका किरदार मार्वल की गार्डियन ऑफ था गैलेक्सी के स्टार लार्ड की तरह मस्त मौला समझ आता है पर इंटरवल के बाद असली जान आती है उनके किरदार में।। सुप्रीम यसकिन के चंद मिनट के अपने पात्र में ही कमल हसन ने बता दिया क्यों वह मेगा स्टार है ।। बंगाली अभिनेता शाश्वत चटर्जी "मानस" के किरदार के साथ बखूभी इंसाफ करते नज़र आए । वही दीपिका पादुकोण ने सुमती का किरदार में उम्दा काम किया।डायरेक्टर नाग अश्विन की रिसर्च को पर्दे पर देखा जा सकता है । Kalki सिनेमेटिव यूनिवर्स की शुरूआत इस फ़िल्म के साथ हो चुकी है आने वाले समय मे इस कहानी को और आगे बढ़ाया जाएगा ।। मल्टी स्टार से भरी इस फ़िल्म में कई और कलाकरों की छोटी छोटी झलक बीच बीच मे आपको दिखेगी । माइथोलॉजी , फिक्शन, एक्शन, ड्रामा, इमोशन सब कुछ का निचोड़ है यह 600 करोड़ की फ़िल्म ।अंत मे यही कहूंगा आदिपुरुष वाले ओम राउत को इस फ़िल्म से सीखने के लिए बहुत कुछ है ।।अगर आपने नही देखी तो जरूर जाइये क्योंकि यह फ़िल्म भारतीय सिनेमा को अगले स्तर पर पहुँचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।।
: कर्मों का आश्रव निरंतर होता रहता है,आचार्य श्री समयसागर जी महाराज
Sat, Jun 29, 2024
कर्मों का आश्रव निरंतर होता रहता है,आचार्य श्री समयसागर जी महाराज
कुंडलपुर दमोह ।सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा शरीर में कर्म के उदय से व्याधि आ जाती है और उस रोग व्याधि का निष्कासन भी औषधि उपचार के माध्यम से हो जाता है। निष्कासन महत्वपूर्ण नहीं है बहुत जल्दी रोग से मुक्त हो सकता है किंतु रोग जो आया है वह किस द्वार से आया है उसका परीक्षण हमें करना है ।नहीं तो बार-बार व्याधि होती है और औषधि लेते हैं। क्योंकि औषधी दान का प्रावधान तो है ही आगम में हम दवाई लेते चले जाएंगे किंतु रोग का निष्कासन इसलिए नहीं होगा। जिस द्वार से रोग का प्रवेश हो रहा है उस द्वार को बंद नहीं कर पा रहे हैं ।दवाई बिल्कुल अच्छी क्वालिटी की है डॉक्टर भी अच्छा है दवाई भी राम बाण है किंतु पथ्य का पालन होना भी उसके साथ होना आवश्यक है। परहेज नहीं रखेंगे तो रोग बढ़ेगा ।औषधि के द्वारा रोग बढ़ रहा है ऐसा नहीं है वह आहार के द्वारा ही रोग आया है आहार के अलावा और बहुत सारे निमित्त हो सकते हैं। निमित्तों की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है ।उसी प्रकार मोक्ष मार्ग में भी कर्मों का आश्रव निरंतर होता रहता है।किंतु वह आश्रव अपने आप नहीं होता अपने आप आश्रव नहीं होता अपने आप बंध नहीं होता है ।यदि अपने आप आश्रव हो जाता तो अपने आप ही आश्रव का रोकना भी हो जाएगा ।आश्रव निर्जरा संवरा ऐसा सूत्र बनाने की क्या आवश्यकता ।आश्रव होता बुद्धि पूर्वक भी होता है अबुद्धि पूर्वक भी आश्रव होता है। अबुद्धि पूर्वक जो आश्रव है उसको रोकने का प्रावधान अलग है उसको पुरुषार्थ के माध्यम से नहीं रोका जाता वह ऑटोमेटिक रुकता है कब रुकता है कहां रुकता है इसकी चर्चा हम बाद में करेंगे ।अभी बुद्धि पूर्वक जो आश्रव हो रहा है या बंध हो रहा है उस बंध की परंपरा को रोकना है ।तो बंध जो हो रहा है वह बिना हेतु के संभव नहीं है। बिना हेतु के बंध हो जाए तो आचार्य उमा स्वामी महाराज अष्टम अध्याय में प्रथम सूत्र दे रहे हैं उसकी कोई आवश्यकता नहीं। बिना कारण के बंध होता नहीं तो पहले कारण की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। तो शुभ और अशुभ आश्रव होता है अथवा पुण्य और पाप का आश्रव होता है तो उसके लिए मन वचन काय की कुछ ऐसी चेष्टाएं हैं जिनसे पाप का आश्रव होता है ।और ठीक इसके विपरीत आत्मगत कुछ उज्ज्वल कुछ आत्मगत परिणाम होते हैं पवित्र परिणाम होते हैं जिनके फलस्वरूप पुण्य का भी आश्रव होता है तो क्रम है। गुरुदेव का यह कहना है कि कर्म का जो आश्रव होता है उसकी निर्जरा हमें करनी है। किंतु क्रम से निर्जरा होगी पाप कर्म की निर्जरा ओर पुण्य कर्म की निर्जरा इसमें क्रम है। पाप पहले मिटता है ।पाप प्रथम मिटता प्रथम तजो पुण्य फल भोग। पुनः पुण्य मिटता धरो आत्म निर्मल योग ।यह दोहा गुरुदेव ने सामने रखा है पाप प्रथम मिटता पाप का बंध हुआ है तो पाप पहले क्षय होगा पुण्य बाद में क्षय होगा ।मोक्ष मार्ग में पुण्य बाधक नहीं है ।कुछ लोगों की धारणा हो सकती है। स्वाध्याय शील होते हुए भी इस विषय में वह अनभिज्ञ रहे हैं उन्हें ज्ञात कर लेना चाहिए कि पाप का क्षय और पुण्य का क्षय करना है पाप और पुण्य यह दोनों इक्वल हैं दोनों समान है ।कहा भी है आगम में कुंदकुंद देव ने कहा चाहे लोहे की बेड़ी हो चाहे स्वर्ण की बेड़ी हो बेड़ी तो बेड़ी है ।बंधन तो बंधन है बंधन किसको ईस्ट है संसार से मुक्त होना चाहता है प्रत्येक संसारी प्राणी हम बंधन से मुक्त होना चाहते महाराज इसलिए चाहे पाप हो चाहे पुण्य हो दोनों को एक तराजू में तोल लेते हैं वह ठीक नहीं माना जाता ।पुण्य और पाप दोनों बेड़ी तो हैं जो संसार में प्रवेश करता है वह सुशील कैसे हो सकता है ।यह कहा कुंद कुंद स्वामी ने उस गाथा को आप लेकर बैठ गए।
: करेली,अखिल भारतीय माता त्रिशला परिषद का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न
Sat, Jun 29, 2024
भागीरथ तिवारी,करेली
अखिल भारतीय माता त्रिशला परिषद का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न
करेली
।अखिल भारतीय दिगम्बर जैन माता त्रिशला परिषद के गठन उपरांत गत दिवस नवीन कार्यकारिणी का शपथ विधि समारोह अध्यक्ष निवास पर श्रीमती सपना जैन (केंद्रीय पर्सन एवं प्रांतीय सह सचिव) श्रीमती संगीता जैन (संभाग अध्यक्ष) श्रीमती मिली जैन (संभागीय सचिव)श्रीमती अभिलाषा जैन गाडरवारा शाखा अध्यक्ष के आतिथ्य मे आयोजित हुआ। भगवान महावीर के चित्र के समक्ष पूजन अर्चन उपरांत नवीन चेयरपर्सन श्रीमती मधु जैन, नवनियुक्त अध्यक्ष श्रीमती समता जैन, उपाध्यक्ष श्रीमती आरती जैन, सचिव श्रीमती प्रीति जैन, सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभारी श्रीमती सिंपल जैन, सहसचिव ज्योति जैन सगौरिया, कोषाध्यक्ष श्रीमती स्वाति जैन सहित कार्यकारिणी सदस्यों ने संगठन के विधिवत संचालन की शपथ ली। इस मौके पर संगठन की सभी सदस्यों की उपस्थिति रही। आभार नवनियुक्त सचिव श्रीमती प्रीति जैन ने किया।