: कुंडलपुर में दशलक्षण पर्व पर विविध धार्मिक आयोजन
Wed, Sep 27, 2023
कुंडलपुर में दशलक्षण पर्व पर विविध धार्मिक आयोजन
कुंडलपुर ।सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में जैन धर्म के महान पर्व दशलक्षण महापर्व पर भक्तगणों द्वारा श्रद्धा भक्ति के साथ पूजा अर्चना की जा रही है ।इस अवसर पर प्रातः भक्तांमर महामंडल विधान ,पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, विधान किया जा रहा है। दोपहर में विद्या भवन में शांतिनाथ महामंडल विधान का आयोजन हो रहा है ।आज के विधान पुण्यार्जक सिंघई रतनचंद जैन, संतोष कुमार जैन अकाउंटेंट, राजू जैन ,रवि जैन, नितेश जैन कुंडलपुर को विधान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। प्रथम अभिषेक ,शांतिधारा, रिद्धि कलश करने का सौभाग्य दक्ष राहुल स्वयं सक्षम पर्व विदेह जैन बांसवाड़ा राजस्थान, सुधांशु शाश्वत सुब्रत गढ़वाल परिवार जबलपुर ,प्रशांत संगीत सुरेंद्र सीमा साक्षी प्रथमेश शौर्य जैन परभणी ,देवेंद्र साधना आकाश रिया अदिति आस्था जैन परिवार शिवपुरी को प्राप्त हुआ । पारसनाथ शांतिधारा करने का सौभाग्य अखिलेश कामना विद्या कृतज्ञ जैन दमोह ,जयकुमार आनंद राजेंद्र कुमार गिरनार ट्रेडर्स दमोह को प्राप्त हुआ। छत्र चढ़ाने का सौभाग्य सुनील यश दानपति परिवार जबलपुर को प्राप्त हुआ। सायंकाल भक्तांमर दीप अर्चना, पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय आरती ,प्रवचन ,आरती नृत्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई।
: गाडरवारा, पयुर्षण पर्व का आठवां दिन अनेक मनोरथ सम्पन्न
Tue, Sep 26, 2023
पयुर्षण पर्व का आठवां दिन अनेक मनोरथ सम्पन्न
गाडरवारा । सच्चे मन से कषाय और मिथ्यात्व का त्याग करना उत्तम त्याग धर्म है। आत्म शुद्धि के उद्देश्य से क्रोध, मान, माया और लोभ आदि विकारी भावों को छोडऩा तथा स्व और पर के उपकार की दृष्टि से अर्थात परोपकार अपने उपभोग के धन-धान्य आदि पदार्थों का सुपात्र को दान करना भी त्याग धर्म है।
दसलक्षण धर्म के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की महत्ता इस बात कि है कि व्यवहार में आज हम सभी त्याग को दान समझने की भूल कर रहे हैं। त्याग धर्म का लक्षण है और दान पुण्य की प्रकृति है। आचार्यों द्वारा आहार, औषध, अभय औऱ ज्ञान को दान के प्रकार बताया है। आहार दान मुनि, आर्यिका, क्षुल्लक, क्षुल्लिका जी सहित उन सभी पात्रों के लिये उचित बताया है जो स्वयं भोजन नहीं बना सकते। मुनि आदि व्रती त्यागियों के रोगग्रस्त हो जाने पर निर्दोष औषधि देना, चिकित्सा की व्यवस्था एवं सेवा सुश्रुषा करना औषध दान होता है। इसी तरह अभय दान प्राणी को जीवन दान देने और ज्ञान दान शिक्षा या पठन पाठन में योगदान को कहा है। जो जीव अपनी प्रिय वस्तु से राग या ममत्व भाव छोड़कर उसे किसी अन्य की जरूरत या सेवा के लिए समर्पित कर देता है, उसे श्रेष्ठ दान कहा गया है।
आज के दिन प्रथम अभिषेक का सौभाग्य अनूप कुमार कमलेश, अलोक परिवार को द्वितीय अभिषेक कलश का सौभाग्य श्री सुरेश जैन अमित जैन परिवार को ,प्रथम शांतिधारा का सौभाग्य श्री सतेन्द्र जैन,हीरा ट्रान्सपोर्ट परिवार को एवं.द्वितीय शांतिधारा का सौभाग्य श्री राजेन्द्र कुमार, रिशि कुमार थालावाले को प्राप्त हुआ। मंगल आरती और श्रीजी पूजन के उपरांत श्री मनोज कुमार, नम्रता वसा के सौजन्य से आयोजित भगवान नेमीनाथ विधान का सभी श्रावको ने पुण्य लाभ लिया । दस दिवसीय धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में प्रति दिन महिला पुरूष और बच्चों की उपस्थिति उत्साह पूर्वक बनी हुई है ।
: सनातन संस्कृति के कुछ नियम-धर्म जिसकी जानकारी हर हिन्दू को जरूर होना चाहिए
Mon, Sep 25, 2023
सनातन संस्कृति के कुछ नियम-धर्म जो हर हिन्दू को पता होना चाहिए
🔸भैरव की पूजा में तुलसी स्वीकार्य नहीं है।🔹 भोजन प्रसाद को लाघंना नहीं चाहिए।🔸 देव प्रतिमा देखकर अवश्य प्रणाम करें।🔹 किसी को भी कोई वस्तु या दान-दक्षिणा दाहिने हाथ से देना चाहिए।🔸 एकादशी,अमावस्या,कृृष्ण चतुर्दशी,पूर्णिमा व्रत तथा श्राद्ध के दिन क्षौर-कर्म (दाढ़ी) नहीं बनाना चाहिए।🔹 बिना यज्ञोपवित या शिखा बंधन के जो भी कार्य, कर्म किया जाता है, वह निष्फल हो जाता हैं।🔸 शंकर जी को बिल्वपत्र, विष्णु जी को तुलसी, गणेश जी को दूर्वा, लक्ष्मी जी को कमल प्रिय हैं।🔹 शंकर जी को शिवरात्रि के सिवाय कुमकुम नहीं चढ़ते।🔸 शिवजी को कुंद, विष्णु जी को धतूरा,देवी जी को आक तथा मदार और सूर्य भगवानको तगर के फूल नहीं चढ़ावे।🔹 अक्षत देवताओं को तीन बार तथा पितरों को एक बार धोकर चढ़ावे।🔸 एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए।🔹 सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए।🔸 बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छू कर प्रणाम करें।🔹 जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं।इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं।🔸 जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए।🔹 जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए।🔸 संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषिद्ध हैं।🔹 दीपक से दीपक को नही जलाना चाहिए।🔸 यज्ञ,श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए, सफेद तिल का नहीं।🔹 शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाना चाहिए। पीपल की सात परिक्रमा करनी चाहिए।परिक्रमा करना श्रेष्ठ है।🔸 नये बिल्व पत्र नहीं मिले तो चढ़ाये हुए बिल्व पत्र धोकर फिर चढ़ाए जा सकते हैं।🔹 विष्णु भगवान को चावल गणेश जी को तुलसी, दुर्गा जी और सूर्य नारायण को बिल्व पत्र नहीं चढ़ावें।🔸 पत्र-पुष्प-फल का मुख नीचे करके नहीं चढ़ावें, जैसे उत्पन्न होते हों वैसे ही चढ़ावें।🔹 बिल्वपत्र उलटा करके डंडी तोड़कर शंकर पर चढ़ावें।🔸 पान की डंडी का अग्रभाग तोड़कर चढ़ावें।🔹 सड़ा हुआ पान या पुष्प नहीं चढ़ावे।🔸 गणेश को तुलसी भाद्र शुक्ल चतुर्थी को चढ़ती हैं।🔹 पांच रात्रि तक कमल का फूल बासी नहीं होता है।🔸 दस रात्रि तक तुलसी पत्र बासी नहीं होते हैं।🔹 सभी धार्मिक कार्यो में पत्नी को दाहिने भाग में बिठाकर धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न करनी चाहिए।🔸 पूजन करने वाला ललाट पर तिलक लगाकर ही पूजा करें।🔹 पूर्वाभिमुख बैठकर अपने बांयी ओर घंटा,धूप तथा दाहिनी ओर शंख, जलपात्र एवं पूजन सामग्री रखें।🔸 घी का दीपक अपने बांयी ओर तथा देवता को दाहिने ओर रखें एवं चांवल पर दीपक रखकर प्रज्वलित करें।🔹 गणेशजी को तुलसी का पत्र छोड़कर सब पत्र प्रिय हैं।🔸 कुंद का पुष्प शिव को माघ महीने को छोड़कर निषेध है।🔹 बिना स्नान किये जो तुलसी पत्र जो तोड़ता है उसे देवता स्वीकार नहीं करते।🔸 रविवार को दूर्वा नहीं तोड़नी चाहिए।🔹 केतकी पुष्प शिव को नहीं चढ़ाना चाहिए।🔸 केतकी पुष्प से कार्तिक माह में विष्णु की पूजा अवश्य करें।🔹 देवताओं के सामने प्रज्जवलित दीप को बुझाना नहीं चाहिए।🔸 शालिग्राम का आवाह्न तथा विसर्जन नहीं होता।🔹 जो मूर्ति स्थापित हो उसमें आवाहन और विसर्जन नहीं होता।🔸 तुलसीपत्र को मध्यान्ह के बाद ग्रहण न करें।पूजा करते समय यदि गुरुदेव,ज्येष्ठ व्यक्ति या पूज्य व्यक्ति आ जाए तो उनको उठ कर प्रणाम कर उनकी आज्ञा से शेष कर्म को समाप्त करें।
🔸 मिट्टी की मूर्ति का आवाहन और विसर्जन होता है और अंत में शास्त्रीयविधि से गंगा प्रवाह भी किया जाता है।
🔹 कमल को पांच रात,बिल्वपत्र को दस रात और तुलसी को ग्यारह रात बाद शुद्ध करके पूजन के कार्य में लिया जा सकता है।
🔸 पंचामृत में यदि सब वस्तु प्राप्त न हो सके तो केवल गाय के दुग्ध से स्नान कराने मात्र से पंचामृतजन्य फल जाता है।
🔹 शालिग्राम पर अक्षत नहीं चढ़ता। लाल रंग मिश्रित चावल चढ़ाया जा सकता है।
🔸 हाथ में धारण किये पुष्प, तांबे के पात्र में चन्दन और चर्म पात्र में गंगाजल अपवित्र हो जाते हैं।
🔹 पिघला हुआ घी और पतला चन्दन नहीं चढ़ाना चाहिए।
🔸 प्रतिदिन की पूजा में सफलता के लिए दक्षिणा अवश्य चढ़ाएं।
🔹 आसन, शयन, दान, भोजन, वस्त्र, संग्रह, विवाद और विवाह के समयों पर छींक शुभ मानी गई है।
🔸 जो मलिन वस्त्र पहनकर,मूषक आदि के काटे वस्त्र, केशादि बाल कर्तन युक्त और मुख दुर्गन्ध युक्त हो,जप आदि करता है उसे देवता नाश कर देते हैं।