: श्री गुरु जंयती पर्व आज 27 को बसुरिया,आमढाना में मनाया जायेगा कल 26 से ही शुरु है अनुष्ठान
Mon, Nov 27, 2023
श्री गुरु जंयती पर्व आज 27 को बसुरिया,आमढाना में मनाया जायेगा कल 26 से ही शुरु है अनुष्ठानपिछले वर्ष पूर्व कलेक्टर वेदप्रकाश शर्मा व अभिनेता मनोज जोशी ने की थी शिरकतसालीचौका हर साल की भांति इस वर्ष भी 27 नवंबर को श्री गुरु स्वामी सच्चदानंद जी की जयंती पर्व उनके परम शिष्य ब्रम्हलीन ब्रम्हचारी श्री मूलानंद जी के सूक्ष्म सानिध्य में उनके अनुयायियों के द्वारा मनाया जायेगा, यह जंयती पर्व प्रति वर्ष की भांति एक दिन पूर्व 26 नवंबर से जय जय अलखनिरंजन के उदघोष के साथ दोपहर आरंभ होगा और दूसरे दिन गुरु पूर्णिमा 27नवंबर को समापन होगा। यह जयंती पर्व नेतराम पड़हार कृषिफार्म बसुरिया मंडल व आमढांना आश्रम सालीचौका में मनाया जायेगा। उल्लेखनीय हैं कि गत वर्ष श्री गुरु जयंती पर्व पर नरसिंहपुर जिले के पूर्व कलेक्टर वेदप्रकाश शर्मा, व फिल्मजगत के अभिनेता मनोज जोशी ने शिरकत की थी।जबकि अवधेश चौकसे ने दोनों जयंती पर्व स्थान पर पज्य गुरुओं की पूजक चित्र भेंट किये थे आयोजकों ने सभी साधक भाईयों से एक दिन पूर्व यानि 26 नवंबर को सपरिवार पधारने का निवेदन किया है।
: गाडरवारा, तुलसी विवाह देव उठनी एकादशी उत्सव घर घर सम्पन्न
Sun, Nov 26, 2023
तुलसी विवाह देव उठनी एकादशी उत्सव घर घर सम्पन्नगाडरवारा ।भारतीय संस्कृति और सनातन पर्व परम्परा के अनुसार ऐसी मान्यता है कि कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव जागरण के साथ साथ इस दिन भगवान शालिग्राम जी और तुलसी विवाह पूजन वर्षों बरस से आदि काल से चले आ रहे ।इसी मान्यता और मतानुसार नगर के देवालयों, व घर घर तुलसी विवाह व एकादशी पूजन कार्यक्रम वैदिक रीति रिवाज के साथ उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया /उल्लेखनीय है कि इस दिन मातायें बहिनों के व्दारा मांगलिक सूचक रंग बिरंगे परिधान पहनती है और पूजा-अर्चना के साथ अपने परिवार समाज और राष्ट्र के लिए समृध्दि अमन चैन भाई चारे की प्रार्थना किया करती है तो वहीं दूसरी ओर दीप ज्योति से अपने घरों व आसपास जगमग रोशनी भी किया करती है और आपस में मिलने जुलने का भी क्रम चलता है ।
: एक दीप जले, पं. सुशील शर्मा की कलम से
Sun, Nov 12, 2023
शुभ दीपावली
एक दीप जले
सुशील शर्मादीप जलें उनके मन में,
जो व्यथित व्यतीत बेचारे हैं।दीप जलें उनके मन में,
जो लाचारी में जीते हैं।
दीप जलें उनके मन में,
जहाँ होंठों को सब सीतें हैं।
दीप जलें उनके मन में,
जहाँ भूखी सिसकी रातें हैं।
दीप जलें उनके मन में,
जहाँ दर्द भरी सौगातें हैं।दीप जलें उनके मन में,
जहाँ मज़बूरी के मारे हैं।दीप जलें उस कोने में,
जहाँ अबला सिसकी लेती है।
दीप जलें उस कोने में,
जहाँ संघर्षो की खेती है।
दीप जलें उस कोने में,
जहाँ बालक भूखा रोता है।
दीप जलें उस कोने में,
जहाँ बचपन प्लेटें धोता है।दीप जलाना उस मन में ,
जहाँ मन ही मन से हारें हैं।दीप जलें उस आँगन में,
जहाँ मन पर तम का डेरा है।
दीप जलें उस आँगन में,
जहाँ गहन अशांति अँधेरा है।
दीप जलें उस आँगन में,
जहाँ क्रोधी कपट कुचालें हों।
दीप जलें उस आँगन में,
जहाँ कूटनीति भूचालें हों।दीप जलाना उस घर में,
जहाँ दर्द भरे भुन्सारे हैं।दीप जलें उनके मन में,
जहाँ श्रम की खेती होती है।
दीप जलें उनके मन में,
बीज जहाँ मेहनत बोती है।
दीप जलें उनके मन में,
जहाँ भूख संग बेकारी है।
दीप जलें उनके मन में
जहाँ दर्द संग बीमारी है।ज्योत जलाना आँगन में ,
जहाँ कलह क्लेश के धारे हैं।दीप जलें उस आँगन में,
जहाँ अहंकार सिर चढ़ बोले।
दीप जलें उस आँगन में,
जहाँ गहन अशिक्षा मन डोले।
दीप जले उस मिट्टी पर,
जहाँ बलिदानों की हवा चले।
दीप जले उस मिट्टी पर,
जहाँ पर शहीद की चिता जले।तमस मिटाना उस मन से ,
जहाँ गहन गूढ़ अँधियारे हैं।
आप को सहपरिवार दीपोत्सव पर्व की आत्मीय शुभकामनाएँ
।सुशील शर्मा
प्राचार्य