भगवान शिव और पार्वती ,सनातन धर्म की आदर्श दंपत्ति है,ब्रह्मविद्यानंद,महाशिवरात्रि में ही प्रकट हुए प्रकाशित ज्योतिर्लिंग:- निर्विकल्प स्वरूप जी
गुरुधाम सिवनी,26 फरवरी 2025, रत्नेश्वर महादेव मंदिर समिति के तत्वावधान में प्रति वर्ष अनुसार महाशिवरात्रि उत्सव का भव्य और दिव्य आयोजन सआनंद संपन्न हुआ ।*अनंत श्री विभूषित द्वीठाधीश्वर ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाराज श्री* द्वारा प्राण-प्रतिष्ठित, रत्नेश्वर महादेव मंदिर दिघौरी में बड़ी संख्या में शिव भक्ति, गुरु भक्त, श्रद्धालु जनों ने दर्शन, पूजन एवं जलाभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित किया।इस अवसर पर महाराज श्री के कृपा पात्र शिष्य गण, गीता मनीषी ब्रह्मचारी निर्विकल्प स्वरूप ,ब्रह्मचारी श्री ब्रह्मविद्यानंद ,ब्रह्मचारी धारानंद, रत्नेश्वर महादेव मंदिर के प्रधान अर्चक ब्रह्मचारी रमेशानंद के पावन सानिध्य में, आयोजित इस धार्मिक आयोजन में प्रातः स्मरणीय गुरुवर का पादुका पूजन ,रत्नेश्वर महादेव का चारों पहर में दिव्य अभिषेक ,शास्त्रोंक्त विधि विधान से संपन्न हुआ।मंदिर प्रांगण में आयोजित धर्म-सभा को पूज्य ब्रह्मचारी श्री ब्रह्म विद्यानंद ,गीता मनीषी ब्रह्मचारी निर्विकल स्वरूप, धर्मवीर अजित तिवारी, गुरु परिवार के वरिष्ठ सदस्य- पंडित ओमप्रकाश तिवारी, पं.संजय तिवारी, एवं श्रीमती आशा सनोडिया नेसंबोधित किया ।पूज्य ब्रह्मचारी ब्रह्म विद्यानंद ने अपने प्रेरक प्रवचन में महाशिवरात्रि का महात्म बताते हुए कहा कि सनातन धर्म के ,- धर्म,अर्थ, काम और मोक्ष, में हमेशा से धर्म की प्रधानता रही है। सनातन धर्म की वर्ण आश्रम सामाजिक व्यवस्था के कारण ही हजारों वर्षों गुलामी में विधर्मी शासन के बाद भी, सनातन धर्म का मौलिक स्वरूप अक्षुण रहा है। वर्तमान महाकुंभ की ऐतिहासिक सफलता इसका जीवंत प्रमाण है। भगवान वेदव्यास जी द्वारा निर्मित धर्म रक्षा व्यवस्था को आदि शंकराचार्य ने पुनः प्रतिष्ठित किया था। तत्कालीन समय में 72 मतों में विभक्त सनातन धर्म को आदि शंकराचार्य ने अपनी विद्वता,और अकाट्य प्रमाणों के आधार पर सभी नास्तिक दर्शनों का खंडन करके, पंचदेव आराधना की स्थापना किया। सनातन धर्म को एकता के सूत्र में बांधने ,आदि शंकराचार्य ने भारतवर्ष में चार वैदिक मठों की स्थापना किया था । तब से अब तक वैदिक मठ परंपरा चली आ रही है । इसी परंपरा में हमारे पूज्य गुरुवर महाराज श्री एक साथ दो वैदिक मठों के पीठाधीश्वर- ज्योतिष पीठ तथा द्वारका पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य प्रसिद्ध हुए।आप श्री ने कहा कि सनातन धर्म की मान्यता को संबल प्रदान करने में घरों घर पढ़ी जाने वाली महात्मा तुलसीकृत रामचरितमानस का महत्व भी सर्व विदित है। जिसमें भगवान शंकर और श्री राम को सबसे बड़े लोकतांत्रिक देवता निरूपित किया गया है। मानस में भगवान शंकर द्वारा पार्वती जी को सुनाई गई अमरकथा प्रसंग, का आध्यात्मिक निरूपण करते हुए ब्रह्मचारी जी ने कहा कि, भारतीय नारी अपने पति की अमरता को महत्व देती है। सनातन धर्म में विवाह संस्कार कॉन्ट्रैक्ट बंधन नहीं ,बल्कि जन्म-जन्मांतर का साथ माना जाता है । भगवान शिव और पार्वती दंपत्ति सनातन धर्म की आदर्श दंपति है। शिव-आत्मा और अर्धांगिनी पार्वती- बुद्धि स्वरूप हैं, जो पंचतत्व के शरीर में निवास करते हैं। स्वाद लेने वाला आत्मा रूपी शिव ही है ।निर्धारित कार्यक्रम अनुसार प्रथम पहर की अभिषेक पूजन में प्रमुख रूप से शामिल होने पहुंचे महाराज श्री के कृपा-पात्र शिष्य गीता मनीषी ब्रह्मचारी निर्विकल स्वरूप जी ने, मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं के आग्रह पर, शिव महिमा सत्संग पर मंत्रमुग्ध प्रवचन किया ।आपश्री ने ज्योतिर्लिंग के प्राकट्य का वृतांत सुनाते हुए कहा कि ,एक समय ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु में कौन श्रेष्ठ है? इसका निर्धारण करने दोनों के बीच विराट ज्योतिर्लिंग स्तंभ प्रकट हुआ। शर्त रखी गई की दोनों में से जो भी ज्योतिर्लिंग का प्रारंभ और अंत छोर पा लेगा ,वही श्रेष्ठ माना जाएगा । ब्रह्मा जी और विष्णु अपने-अपने वाहन हंस एवं गरुड़ में बैठकर विपरीत दिशा, ऊपर और नीचे की ओर उड़े । दोनों ही उस स्तंभ के ओर-छोर का पता लगाने में असफल रहे। कथा का सार यह कि, शिव जी -ब्रह्मा और विष्णु से श्रेष्ठ हैं। वह ज्योति स्तंभ महाशिवरात्रि में प्रकट हुआ था ,जो 12 भागों में विभक्त होकर 12 ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रतिष्ठित हुए । आपने बताया कि सतयुग के ब्रह्मा जी ,त्रेता युग के वशिष्ठ जी ,तथा कलयुग के जगतगुरु, शंकर जी, को माना गया है।गीता मनीषी ब्रह्मचारी जी ने कहा कि शंकरावतार हमारे गुरुदेव ने 20 वर्ष पहले दिघोरी की पुण्य धरा में दिव्य स्फटिक मणि शिवलिंग, रत्नेश्वर महादेव की प्राण प्रतिष्ठा किया है। भगवान शंकर को गंगा प्रिय है इसलिए यहां ्बैनगंगा तट दिघौरी सिवनी के भोले भाले ,धर्म परायण लोगों के बीच ,गुरुरत्न का प्राकट्य हुआ है।महाशिवरात्रि के इस भव्य और दिव्य आयोजन में, सैकड़ो की संख्या में एकत्र हुए श्रद्धालु जनों के साथ ही गुरुधाम सेवा समिति के -ठा.रजनीश सिंह केवलारी विधायक, सर्वश्री- अनुराग त्रिपाठी, चंद्रभान बघेल ,पंडित आलोक दुबे, आचार्य सनत कुमार उपाध्याय,पं. ओमप्रकाश तिवारी, श्रीराम बघेल ,बसंत बघेल, गया प्रसाद ददुआ पटेल , धर्मवीर अजित तिवारी मातृधाम ,पं.सागर उपाध्याय, अरुण उपाध्याय, संजय तिवारी, मंगल बघेल ,पंडित मोनू तिवारी केवलारी ,श्रीमती आशा सनोडिया ,गणेश सनोडिया, शिवनाथ बघेल ,अवशेष मिश्रा मुगवानी खुर्द, पंडित दिलीप तिवारी शास्त्री, नितिन डहेरिया ,रमेश पटेल गुडही ,रूपा मोहनानी, श्रीमती हेमलता तिवारी आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही ।