: गाडरवारा के वरिष्ठ विद्वत विप्रजनो ने बताए दीपावली पर लक्ष्मी पूजन एवं गोवर्धन पूजन के शुभ मुहूर्त
Thu, Oct 24, 2024
गाडरवारा के वरिष्ठ विद्वत विप्रजनो ने बताए दीपावली पर लक्ष्मी पूजन एवं एवं गोवर्धन पूजन के शुभ मुहूर्त
गाडरवारा । स्थानीय खकरिया वाले दादा जी के मंदिर प्रांगण में मुहूर्त निर्णय गोष्ठी संपन्न हुई जिसमें नगर व क्षेत्र के वरिष्ठ विद्वत विप्रजन उपस्थित हुए एवं मां दुर्गा, भगवान परशुराम व पंचांग पूजन कर सनातन धर्म के विशेष पर्व दीपावली के तिथि भ्रम पर चिंतन कर निर्णय लिया गया कि लोक विजय पंचांग के अनुसार कार्तिक,कृष्ण रात्रि कालीन अमावस्या 31 अक्टूबर दिन गुरुवार को है ।
दीपावली का पावन पर्व माता लक्ष्मी व कुबेर पूजन
सायं 5 बजकर 38 मिनिट से रात्रि 8 बजकर 38 मिनिट तक अमृत और चर की चौघड़िया तथा वृष (स्थिर) लग्न में शुभ मुहूर्त में की जानी ही शास्त्रोचित है।
गोवर्धन पूजन (अन्नकूट)
- कार्तिक, शुक्ल,प्रतिपदा दिनांक 2 नवंबर दिन शनिवार को प्रातः7 बजकर 30 मिनट से 9:00 बजे तक शुभ मुहूर्त में तथा दोपहर 12:00 बजे से 4:30 बजे तक क्रमशःचर लाभ अमृत की चौघड़िया में पूजन करना उत्तम रहेगा।
भ्रातृ द्वितीया एवं प्रतिष्ठान प्रारंभ
- कार्तिक शुक्ल द्वितीया दिनांक 3 नवंबर दिन रविवार को प्रातः 7 बजकर 27 से 9 बजकर 44 तक वृश्चिक स्थिर लग्न में तथा प्रातः8 बजकर 17 मिनट से 12बजकर 47 मिनिट तक क्रमशः चर ,लाभ, अमृत की चौघड़िया में पूजन करना व व्यापार प्रारंभ करना उत्तम व लाभप्रद रहेगा।काशी से प्रसारित पंचांग तथा जबलपुर लोक विजय पंचांग श्री जगन्नाथ झा जी के द्वारा प्रसारित प्राचीन परंपरा प्राप्त पंचांग से निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। जिसमें पूजन करना लाभप्रद सुखप्रद रहेगा सभा में नगर के विद्वत वरिष्ठ पं. अखिलेश द्विवेदी जी, पं. सत्येंद्र द्विवेदी जी ,पं. बालराम जी शास्त्री, पं.विश्वनाथ जी दुबे ,पं.उमेश जी द्विवेदी,पं.सत्यनारायण जी शर्मा,पं.मनमोहन जी दुबे,पं. प्रदीप जी दूरबार,पं.चंद्रकांत जी शुक्ला ,पं.केशव जी पचौरी, पं.प्रवीण जी व्यास पं.प्रियांशु जी दुबे ,जगदीश जी आचार्य ,भगवत दत्त जी शर्मा ,राजीव जी कटारे एवं आयुष जी शर्मा की उपस्थिति रही और विद्वत सभा संपन्न होने पर पं. आदित्य पाराशर ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए पुनः भ्रम की स्थिति बनने पर सभी को पुनः एकत्रित होने हेतु निवेदन किया।
: करवा चौथ बनाम सुखी गृहस्थी(सुशील शर्मा)
Sun, Oct 20, 2024
करवा चौथ बनाम सुखी गृहस्थी(सुशील शर्मा)
दाम्पत्य के रिश्ते चन्द्रमा के चाहने से चलते हैं या उन्हें चाहिए विश्वास और स्नेह की कसौटी। खट्टी मीठी यादों ,बहसों एवं लड़ाइयों से सजे रिश्ते महज करवा चौथ के व्रत से सँवर जायें ये मुमकिन नहीं है। शादी के बाद जिंदगी की असली कहानी शुरू होती है ,पहले कुछ वर्ष सपनों से बीत जाने के बाद गृहस्थी का मजा शुरू होता है ,जिसमे बहस ,लड़ाई ,रूठना मनाना ,अपने अपने अहंकारों के खोलो से बाहर आते हुए व्यक्तित्व,बच्चों का लालन पालन ,गृहस्थी का सफल संचालन इन्ही सूत्रों को पिरो कर माला का रूप धारण करता है। पति पत्नी का रिश्ता वन वे ट्रैफिक रोड है। यहाँ से दूसरे रास्ते पर जाने की कोई गुंजाइश नहीं बचती है। उसी रास्ते पर या तो समन्वय से सरपट गाड़ी दौड़ाओ या अहंकारों के स्पीड ब्रेकर लगाकर अटक अटक कर चलो।घर मात्र ईंट-पत्थरों से बना हुआ मकान नहीं होता, बल्कि घर वह होता है जिसे पति पत्नी मिलकर बनाते हैं। यदि लोग प्रेम, समर्पण, ईमानदारी और निष्ठा से रहें, तो उन्हें स्वर्ग का आनंद और सुख अपने घर में ही मिलेगा। रिश्तों में असहमति या मत भिन्नता जरूरी है। दो व्यक्तित्व कभी एक जैसी सोच नहीं रख सकते लेकिन "सिर्फ मेरी ही सुनी जाये" से या तो टकराव की स्थिति बनेगी या फिर दास गुलामी प्रथा का अनुसरण होगा। कही गई बातों को गलत सन्दर्भों में पकड़ने से ग़लतफ़हमी उत्पन्न होती हैं जो परस्थितियों को गंभीर बनातीं हैं एवं इसका एकमात्र उपाय ठन्डे दिमाग से बातचीत कर गलतफहमियों को दूर करना है।गृहस्थी में आपसी विश्वास से ही तालमेल बनता है। पति से गलती हो तो पत्नी संभाल ले और पत्नी से कोई त्रुटि हो जाए तो पति उसे नज़रअंदाज़ कर दे। यही सुखी गृहस्थी का मूल मंत्र है।जब परिवार में एकता होगी तो मतभेद नहीं होंगे, मतभेद नहीं होंगे तो प्रेम होगा, प्रेम होगा तो सुख होगा, सुख होगा तो शांति होगी यही सुखी जीवन का आधार बनेगा। संयम,संतुष्टि,संकल्प,सामर्थ्य,संवेदनशीलता और संतान सुखी दाम्पत्य जीवन के सूत्र हैं। जिआवन पथ पर दो सहचरों का संकल्पबद्ध होकर धर्म और नीति को साथ ले चलना ही दाम्पत्य जीवन का शुद्ध लक्ष्य होता है। गृहस्थी की धुरी परिवार का बजट होता है। अगर धुरी गड़बड़ाई तो गाड़ी का डोलना स्वाभाविक है। जिंदगी में शौक उतने ही पालो जितना आपका बजट हो दूसरों के शौक को अगर आपने अपने शौक बनाये तो "आमदनी अट्ठनी खर्च पाँच रुपैया" की नौबत आने पर गृहस्थी की नाव प्यार के वावजूद डूबना स्वाभाविक है। बजट के आलावा पड़ोसियों से सम्बन्ध ,रिश्तेदारों से रिश्ते ,सामाजिक सरोकारों का निर्वहन, नैसर्गिक एवं नागरिक कर्तव्यों का पालन इन सब का अपनी गृहस्थी में संतुलित समावेश सुखी जीवन की कुंजी बन जाती है। समन्वित हितों को प्राथमिकता ,दूसरे की रुचियों को अपने जीवन में जगह देना ,व्यक्तिगत स्वार्थ को परिवार के हितों में बदलना कठिन क्षणों में एक दूसरे को जोड़े रखता है।मतभेद होना वैवाहिक जीवन में सामान्य बात है किन्तु बुद्धिमत्ता इसी में है कि अपनी बात को इस ढंग से प्रस्तुत किया जाये कि दूसरे को ठेस भी न पहुंचे और आपकी बात भी रह जाये। दिन का झगड़ा रात को शयन कक्ष में सुलझ जाये तो तनाव और कटुता वहीं समाप्त हो जाते हैं।समाज में इतनी उच्छृंखलता, मनमुखता एवं पशुता का खुला प्रचार होते हुए भी दुनिया के 250 देशों का सर्वेक्षण करने वालों ने पाया कि हिन्दुस्तान का दाम्पत्य जीवन सर्वश्रेष्ठ एवं संतुष्ट जीवन है । यह भारतीय संस्कृति के दिव्य ज्ञान एवं ऋषि-मुनियों के पवित्र मनोविज्ञान का प्रभाव है । बच्चों की शिक्षा एवं संस्कार सर्वोपरि हैं। बच्चों की शिक्षा संस्कारित तरीके से हो इसके लिए त्याग और समर्पण जरूरी है वर्ना दहन और सम्मान दोनों का कोई मतलब नहीं बचता है।जिस घर में हंसी-खुशी और उल्लास होता है, वहां पर बच्चों के जीवन का पूर्ण विकास होता है। इस करवा चौथ को अपनी गृहस्थी सँभालने के संकल्प लें। अंत में एक दूसरे का विश्वास ,प्रोत्साहन ओर छोटे छोटे त्याग और समर्पण मन में साहस एवं उत्साह भर देतें हैं।
: श्रीराम भगवान को स्मरण कर संपन्न हुआ रामार्चा महायज्ञ
Sat, Oct 19, 2024
जितेंद्र दुबे शाहनगर
श्रीराम भगवान को स्मरण कर संपन्न हुआ रामार्चा महायज्ञ
शाहनगर नि प्र। हिंदू धर्म के सबसे पवित्र अनुष्ठानों मे रामार्चा महायज्ञ करने का विधान बताया गया है ।जिससे व्यक्ती की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. नगर के बस स्टेन्ङ स्थित प्रथम श्रोता श्री सुरेश जार धर्मपत्नी श्री मति राजकुमारी जार के यहां आयोजित रामार्चा महायज्ञ में भगवान श्री राम और उनके चारों अवतारों की पूजा विधि -विधान के साथ कथा वाचक 108 श्रो हरिराम तिवारी जी के पावन सानिध्य में संपन्न कराई गयी इस दौरान यज्ञ स्थल का वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पवित्रिकरण कर केले के हरे पेङों का मंन्ङप जिसमे गुलाब एवं बेला एवं गेन्दा की सुन्दर लङियों से सुशोभित मंन्ङप एवं वेदी का निर्माण कराया गया संकल्पपूर्वक गौरी-गणेश, वरुण देवता का पूजन हुआ। तत्पश्चात वेदी पर चार आवरण में भगवान श्रीराम जी सहित उनके पूरे परिवार, वीर बजरंग बली, नवग्रह, दस दिगपाल, भगवान शिव, सप्तऋषि, अष्ट वसु, वास्तु, शक्तियों की पूजा और पवित्र नदियों की पूजा इत्यादि की गई। यज्ञ अनुष्ठान को चार आवरण में कराया गया जिसमें प्रथम आवरण में माता गौरी और भगवान शिव की पूजा की गई। इनके अतिरिक्त तेरह देवताओं का आवाहन, स्थापन और पूजन किया गया। दूसरे आवरण में श्री अयोध्या जी से लेकर अष्ठमंत्रियों तक कुल 21 देवताओं का आवाहन, स्थापन और पूजन किया गया। तृतीय आवरण में महाराज श्री दशरथ जी से लेकर भाईयों में लक्ष्मण कुमार पत्नी उर्मिला जी , भरत पत्नी मांङवी , शत्रुघ्न पत्नी श्रुतकीर्ति और हनुमान जी महराज का आवाहन, स्थापन और पूजन किया गया। चतुर्थ आवरण में सीता माता संग भगवान श्रीराम का आवाहन, स्थापन और पूजन किया गया। पुजा के दौरान भगवान श्री राम को तांबे के बर्तन में शुद्ध जल और दुग्ध से स्नान कराया गये एवं सुन्दर वस्त्र औरआभूषण अर्पित किए गये वैदिक मंत्रोच्चारण से सारा वातावरण गूंज रहा था और सतत प्रभु चर्चा व वेद मंत्रों की ध्वनि से आसपास का पूरा क्षेत्र भक्ति से ओतप्रोत नजर आया इस दौरान कथा वाचक हरिराम तिवारी जी ने बताया की रामार्चा महायज्ञ कराने से इंसान पुण्य का भागी बनता है। और बैकुंठ प्राप्त करता है ।तत्पश्चात हवन, पूर्णाहुति, आरती, पुष्पांजलि, के साथ कथा मे आये उपस्थित आगंतुकों को प्रसाद वितरण कर कन्या भोज के साथ ब्राम्हण भोज कराया गया ।इस दौरान शिवम जार पत्नी शिवी जार विनय धमेले धर्मपत्नी रश्मी धमेले गौरव बहारे, रचना जार सहित जार परिवार शामिल रहा ।