: मोक्ष मार्ग में भी कर्मों का आश्रव निरंतर होता रहता है,आचार्य श्री समयसागर जी महाराज
Wed, Jun 19, 2024
मोक्ष मार्ग में भी कर्मों का आश्रव निरंतर होता रहता है,आचार्य श्री समयसागर जी महाराज
कुंडलपुर दमोह ।सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा शरीर में कर्म के उदय से व्याधि आ जाती है और इसका निष्कासन औषधि उपचार आदि माध्यम से हो जाता है ।महत्वपूर्ण यह है बहुत जल्दी वह रोग से मुक्त हो सकता है रोग आया है किस द्वार से आया है इसका परीक्षण करना है यह तो बार-बार व्याधि होती है और औषधि दवाई लेते चले जाते हैं किंतु रोग का निष्कासन इसलिए नहीं होता जिस द्वार से रोग का प्रवेश हो रहा है वह द्वार बंद नहीं कर पा रहे ।दवाई बिल्कुल अच्छी क्वालिटी की दवाई है डॉक्टर भी अच्छा है दवाई रामवाण है । पथ्य का पालन भी होना भी उसके साथ आवश्यक है। परहेज नहीं रखेंगे तो रोग बढ़ेगा औषधि के द्वारा रोग बढ़ रहा है ऐसा नहीं है। आहार के द्वारा रोग आया है आहार के अलावा और बहुत सारे निमित्त हो सकते हैं। निमित्तों की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। उसी प्रकार मोक्ष मार्ग में भी कर्मों का आश्रव निरंतर होता रहता है।किंतु वह आश्रव अपने आप आश्रव नहीं होता अपने आप वंध नहीं होता फिर आश्रव निरोधा संवर सूत्र बनाने की क्या आवश्यकता है। किंतु ऐसा नहीं है आश्रव होता है वह बुद्धि पूर्वक भी होता है और अबुद्धि पूर्वक भी आश्रव होता है ।अबुद्धि पूर्वक जो आश्रव है उसको रोकने का प्रावधान अलग है उसको पुरुषार्थ के माध्यम से नहीं रोका जाता वह ऑटोमेटिक रुक जाता है कब रुकता है कहां रुकता है इसकी चर्चा बाद में करेंगे ।अभी बुद्धि पूर्वक जो आश्रव अथवा वंध हो रहा है उसको रोकना है बिना हेतु संभव नहीं है। बिना हेतु के वंध हो जाय आचार्य उमा स्वामी सूत्र दे रहे हैं मिथ्या तृष्णा --कषाय योगा वंध हेतवा -स्पष्ट हुआ बिना कारण के वंध होता नहीं ।पहले कारण की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। तो शुभ और अशुभ का आश्रव होता है अथवा पुण्य और पाप का आश्रव होता है तो उसके लिए मन वचन काय की कुछ ऐसी चेष्टाएं हैं जिन चेष्टाओं के माध्यम से पाप का आश्रव होता है और ठीक इसके विपरीत कुछ आत्मगत परिणाम होते जिनके फल स्वरुप पुण्य का भी आश्रव होता है तो क्रम है गुरुदेव का कहना है कर्म का जो आश्रव होता है उसकी निर्जरा करनी है पाप कर्म की निर्जरा और पुण्य कर्म की निर्जरा इसमें क्रम है पाप पहले मिटता है पाप प्रथम मिटता पाप का वंध हुआ है तो पहले पाप का क्षय होगा फिर बाद में पुण्य का क्षय होगा। मोक्ष मार्ग में पुण्य बाधक नहीं है कुछ लोगों की धारणा हो सकती है। स्वाध्यायशील होते हुए अनभिज्ञ रहे हैं उन्हें ज्ञात कर लेना चाहिए पाप का क्षय और पुण्य का क्षय करना है यह दोनों समान है आगम ग्रन्थो में कुंदकुंद देव ने कहा है चाहे लोहे की बेड़ी हो चाहे स्वर्ण की बेड़ी हो बेड़ी तो बेड़ी है बंधन तो बंधन है बंधन किसको ईष्ट है ।संसार से मुक्त होना चाहता है संसारी प्राणी हम बंधन से मुक्त होना चाहते हैं महाराज।चाहे पाप हो चाहे पुण्य हो दोनों को एक तराजू में तोल लेते हैं और ठीक नहीं माना जाता पुण्य और पाप दोनों बेड़ी तो हैं जो संसार में प्रवेश कराता वह सुशील कैसे हो सकता यह कहा कुंदकुंद स्वामी ने।
: नगर देवरी में धूमधाम से बनाई गई बकरा ईद
Tue, Jun 18, 2024
नगर देवरी में धूमधाम से मनाई गई बकरा ईद, मांगी देश में अमन चैन की दुआKamarRana
देवरी/रायसेन__ईद उल-अजहा या बकरा ईद मुसलमानों के सबसे महत्वपूर्ण त्योहार में से एक है। इस दिन को दुनिया भरके सभी मुसलमान मानते हैं। इस ईद उल अजहा के दिन, दुनिया भर के मुसलमान मालिक की इबादत, लोगों की दवत, और गरीब असहाय लोगों को दान देते हैं।
यह बकरा ईद का त्यौहार मुस्लिम समाजमें खुशी को दर्शाता है।
नगर देवरी में मुस्लिम समाज ने कुर्बानी का त्यौहार ईद उल अजहा बकरा ईद धूमधामके साथ मनाया। सुबह 7:00 बजे से ही लोग नहा कर नए-नए कपड़े पहनकर रंग-बिरंगी टोपिया लगाकर ईदगाह की ओर रवाना हुए । पहाड़ी पर स्थित ईदगाह मैं मनोहर दृश्य देखने को मिल रहा था।
ईदगाह पर मौलाना रईस ने नमाज अदा करवाई और देश में अमन चैन की दुआ मांगी।ईद की नमाज के बाद मुस्लिम भाइयों ने एक दूसरे से गलेमिलकर ईद की बधाइयां दी।
थानाप्रभारी हरि ओम अस्ताया सुबह से ही अपने दल के साथ ईदगाह स्थल पर निरीक्षण करनेपहुंचे। उन्होंने पहाड़ी केचारों ओर मुआयना किया। एवं पुलिस के जवान चारों ओर मुस्तैद रहे।
: कुंडलपुर में भगवान श्री सुपार्श्वनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव 18 जून को मनाया जाएगा
Mon, Jun 17, 2024
कुंडलपुर में भगवान श्री सुपार्श्वनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव 18 जून को मनाया जाएगा
कुंडलपुर दमोह । सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में जैन धर्म के सातवें तीर्थंकर भगवान श्री सुपार्श्वनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव 18 जून को परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के चतुर्विध संघ के सानिध्य में धूमधाम से मनाया जाएगा ।इस अवसर पर प्रातः भक्तांमर महामंडल विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांति धारा ,पूजन, विधान होगा। श्री जी का पालना झुलाया जाएगा। आचार्य श्री की पूजन एवं आचार्य संघ एवं आर्यिका संघ की
आहारचर्या
होगी। सांयकाल भक्तांमर दीप अर्चना, पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महा आरती होगी।