: भोपाल,अब घर बैठे बनाएं जा सकेंगे ऑनलाइन लर्निंग लाइसेंस - परिवहन मंत्री राजपूत
Tue, Aug 3, 2021
प्रदेश के 10 लाख युवा होंगे प्रतिवर्ष लाभान्वित
भोपाल। परिवहन एवं राजस्व मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि लर्निंग लायसेंस बनवाने की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है। लोग अब घर बैठे ऑनलाइन लर्निंग लायसेंस बना सकेंगे। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन लायसेंस बनने से जहाँ एक ओर आम जनता को परिवहन कार्यालय में लगने वाली लम्बी कतारों से मुक्ति मिलेगी वही एजेन्टों से छुटकारा भी मिलेगा। परिवहन मंत्री श्री राजपूत ग्वालियर स्थित भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थाओं में आयोजित शुभारंभ कार्यक्रम में वर्चुअली सम्मिलित हुए।
परिवहन मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश सरकार आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के लिये बहुत शिद्दत के साथ कार्य कर रही है। इसी अनुक्रम में परिवहन विभाग द्वारा ऑनलाइन लर्निंग लाइसेंस सुविधा प्रारंभ की गई। उन्होंने कहा कि इस सुविधा से हर साल लगभग 10 लाख युवा घर बैठे लर्निंग लायसेंस बनवा सकेंगे।
परिवहन आयुक्त श्री मुकेश जैन ने ऑनलाइन लर्निंग लायसेंस सुविधा को सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा िक अब लायसेंस प्रक्रिया को और अधिक सुगम, सरल एवं पारदर्शिता बनाया गया है
आधार कार्ड से बनवायें जा सकेंगे लायसेंस
अपर परिवहन आयुक्त श्री अरविंद सक्सेना ने ऑनलाइन लर्निंग लायसेंस सुविधा के बारे में विस्तारपूवर्क जानकारी दी एवं लायसेंस बनवाने की प्रकिया को व्यवहारिक रूप से समझाया। उन्होंने बताया कि घर बैठे कोई भी व्यक्ति आधार कार्ड के जरिए 'सारथी' वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर डिजिटल रूप से निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद लर्निंग लायसेंस बनवा सकेंगे। आधार कार्ड की जानकारी दर्ज करने पर आवेदन स्वत: ही आवेदक, अभिभावक का नाम, जन्मतिथि, पता आदि स्वत: ही दर्ज हो जाता है। आवेदक को फिजिकल फिटनेस संबंधी जानकारी भी ऑनलाइन दर्ज करना होती है। यदि आवेदक कोई शर्त पूरी नहीं करता है तो उसका आवेदन ही सबमिट नहीं होगा। आवेदन सबमिट होते ही आवेदन नम्बर आवेदक को मिल जाता है।
महिलाओं के लिये पूर्णत
: नि:शुल्क बनेगा लायसेंस
संयुक्त परिवहन आयुक्त श्री अनूप सिंह की महिला आवेदकों के लिये यह सुविधा पूर्णत: नि:शुल्क की गयी है। उन्होंने कहा कि लर्निंग लायसेंस प्राप्त करने के पूर्व आवेदक को एक टेस्ट देना होगा, जिसमें सड़क सुरक्षा संबंधित से 20 प्रश्न पूछे जाएंगे। आवेदक को उत्तीर्ण होने के लिये 60 प्रतिशत जबाव सही देने होंगे। तदोपरांत ही आवेदक को लाईसेंस प्रदान किया जा सकेगा।
नवीनीकरण एवं डुप्लीकेट लायसेंस भी ऑनलाइन
अपर परिवहन आयुक्त श्री सक्सेना ने बताया िक लायसेंस नवीनीकरण, डुप्लीकेट प्रति तथा पता परिवर्तन की सुविधा भी आधार कार्ड के आधार पर अगले माह से ऑनलाइन शुरू की जायेगी। आवेदन सबमिट होने तथा डिजिटल फीस एवं पोस्टल चार्ज जमा कराने के बाद लायसेंस डाक के माध्यम से भेजा जाएगा।
: गाडरवारा,अन्न उत्सव हेतु शिक्षको का प्रशिक्षण आयोजित
Tue, Aug 3, 2021
गाडरवारा। 7 अगस्त को जिले की समस्त राशन दुकानों में होने वाले अन्न उत्सव कार्यक्रम हेतु नोडल अधिकारी बनाये गए साईंखेड़ा , चीचली एवं चांवरपाठा विकासखंडों के शिक्षको का एक दिनी प्रशिक्षण बीते मंगलवार को अलग अलग समय मे जिला शिक्षा अधिकारी अरुण इंग्ले के आदेश पर स्थानीय बीटीआई स्कूल में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में साईखेड़ा बीईओ श्रीमती सुनीता पटैल, बीआरसी साईंखेड़ा चंदन शर्मा, बीआरसी चीचली डी के पटैल, प्रभारी प्राचार्य जयमोहन शर्मा , बीएसी योगेंद्र झारिया एवं राम नारायण दीक्षित खाद्य आपूर्ति अधिकारी ने नोडल अधिकारियों को अन्न उत्सव के दिन राशन दुकानों में सफाई कराते हुए फ्लेक्स लगाए जाने, राशन का आवंटन तय सीमा में पहुंचाने, दुकान पर उपस्थित होने वाले जनप्रतिनिधियों एवं उपभोक्ताओं की सूचियाँ तैयार करने, प्रत्येक दुकान पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन सबंधी समुचित व्यवस्था करने, कार्यक्रम हेतु आवश्यक टेंट, कुर्सी एवं माइक आदि की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। प्रशिक्षण में शिक्षको को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दिए जाने पर प्राथमिक शिक्षक सुरेन्द्र पटैल ने बताया की हम लोगो के लिये ये जिम्मेदारी पहली बार मिली है । हम लोग बेहतर से बेहतर कार्य करने की पूरी कोशिश करेंगे। प्रशिक्षण में नोडल अधिकारी बनाये गए साईखेड़ा, चीचली एवं चांवरपाठा विकासखण्ड के शिक्षको की उपस्थिति रही।
: Bhopal राज्य मंत्री परमार ने मंत्रालय में "प्राकृतिका" टेरेस गार्डन का किया लोकार्पण
Sun, Aug 1, 2021
भोपाल। स्कूल शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) और सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि वर्तमान में मानव समाज अपने विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहा है, जिससे कांक्रीट जंगलों में बढ़ोतरी होती जा रही है। इसके प्रतिकूल प्रभाव ग्लोबल वार्मिंग, ग्रीन हाउस गैसेस में वृद्धि, प्रदूषण इत्यादि रूप में दृष्टिगोचर होने लगे हैं। इसलिए आवश्यक है कि विकास के साथ प्रकृति का भी संतुलन बनाया जाएं। इससे न सिर्फ पर्यावरण सुधारने में सहायता प्राप्त होगी बल्कि प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण एक स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण निर्मित होगा।
सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री श्री परमार आज वल्लभ भवन के एनेक्सी क्रमांक-2 के चौथे तल पर टेरेस गार्डन "प्राकृतिका" का लोकार्पण कर संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर श्री परमार ने "प्राकृतिका" को विकसित करने में अहम योगदान देने वाले वाल्मी संस्थान के अधिकारी और कर्मचारियों को रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया।
प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती रश्मि अरुण शमी, आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती जयश्री कियावत, आयुक्त राज्य शिक्षा केंद्र श्री धनराजू एस, संचालक वाल्मी संस्थान श्रीमती उर्मिला शुक्ला, उप सचिव श्रीमती अनुभा श्रीवास्तव, उप सचिव सामान्य प्रशासन श्री डी.के. नागेन्द्र सहित स्कूल शिक्षा, सामान्य प्रशासन और पंचायत एवं ग्रामीण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।
ईको फ्रेंडली
"प्राकृतिका" टेरेस गार्डन
"प्राकृतिका" टेरेस गार्डन को मध्यप्रदेश जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान, भोपाल द्वारा ईको फ्रेंडली पद्धति से विकसित किया है। टेरेस गार्डन में आम, कचनार, मोगरा, अर्जुन, पीपल, बेलिया चमेली, सीता अशोक, हैंगिंग ग्रास, रुद्राक्ष, हर्रा, गूलर, शीशम, आँवला, गरुड़ आदि के पौधे रोपित किये गए है। "प्राकृतिका" में इको फ्रेंडली सौंदर्यीकरण के लिए विभिन्न औषधीय, सुगंधित और वन प्रजातियों का चयन कर रोपण किया गया है। सांस्कृतिक परिवेश की पृष्ठभूमि निर्मित करने के लिए मांडना और लाइन आर्ट द्वारा चित्रण किया गया है। टेरेस गार्डन के वातावरण को और अधिक सुंदर बनाने के लिए विभिन्न जगह पर हैंगिंग प्लांट्स भी लगाए गए हैं।
वाल्मी संस्थान ने 'वाल्मी शीघ्र वन विकास पद्धति का उपयोग किया है। इस पद्यति में एक वर्ष में घने जंगल की गारंटी की अवधारणा एवं तकनीक का उपयोग कर कांक्रीट सतह पर प्राकृतिक हरियाली एवं सौदर्यीकरण विकसित करने का कार्य किया है। यह तकनीक पूर्ण रुप से जैविक है, जिसमें एक मीटर गहराई के बेड को विभिन्न किस्म के कार्बनिक पदार्थों जैसे धान का भूसा, पेरा, गोबर की खाद, जीवामृत, घन जीवामृत, वर्मीकंपोस्ट इत्यादि को मिट्टी के साथ मिलाकर तैयार किया गया है। इन बेड्स में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण रैंडम आधार पर किया जाता है। रोपित पौधों में केनोपी, वृक्ष, उप वृक्ष एवं झाड़ीदार श्रेणी के पौधों को एक निश्चित अनुपात में लगाया जाता है। ताकि जल्द सूर्य का प्रकाश और पोषक तत्वों के लिए आपसी प्रतिस्पर्धा न होकर मित्रवत व्यवहार रहे। पौधा-रोपण के बाद वाष्पीकरण द्वारा पानी का नुकसान न हो इसलिए जैविक पलवार का उपयोग किया जाता है। इस विधि में पौधों का विकास अत्यंत तीव्र गति से होता है। इसलिए पौधों को सहारा देने के लिए बाँस की डंडियों का उपयोग प्रारंभिक अवस्था में ही किया जाता है।