*हे शिक्षक*
( शिक्षक की पीड़ा को उकेरती कविता - सुशील शर्मा)
वह खड़ा हैब्लैकबोर्ड और समाजदोनों के बीच,एक अदृश्य पुल की तरहजिस पर हर कोई गुजरता हैपर कोई नहीं देखता उसकी दरारें। सरकार उसे जिन्न समझती हैकभी जनगणना का भार,कभी चुनाव ड्यूटी का पहाड़,कभी योजनाओं का हिसाब,कभी फाइलों का अनंत जंगल।पाठशालाउसकी पहली पहचान है,पर गैर-शिक्षकीय आदेशों मेंउसकी पहचान घुल जाती है। शिक्षक दिवस आता हैएक दिन,जब फूलों की वर्षा होती है,सम्मान पत्र दिए जाते हैं,तालियाँ बजती हैं,लेकिन बाकी तीन सौ चौंसठ दिनवह सिर्फ सरकारी कर्मचारी कहलाता है।समाज और तंत्रउसे संदेह की दृष्टि से देखते हैंजैसे उसके श्रम परभरोसा करना भूल चुके हों। वह जानता हैउसकी पहली बीस साल की सेवाकागजों पर मिटा दी गई है,उसकी पेंशनआधी अधूरी है,वह अपने भविष्य को लेकरसुरक्षित नहीं है,फिर भीआज की पीढ़ी के भविष्य कोगढ़ने में व्यस्त है। और सच हैकुछ शिक्षक हैं भी ऐसे,जो समय पर विद्यालय नहीं पहुँचते,जो बच्चों की आँखों मेंभविष्य नहीं, धुँधलका भरते हैं,जो किताबों से ज्यादाशराब की बोतलों को महत्व देते हैं।वे गिने-चुने हैं,पर उन्हीं की परछाईपूरे शिक्षक समाज को कलंकित कर देती है।उनकी वजह सेईमानदार शिक्षकों की निष्ठा पर भीउंगलियाँ उठती हैं। आज भीबहुसंख्य शिक्षकआज भी टूटी कुर्सियों और धूलभरे कमरों मेंपसीना बहा रहे हैं,अपने घर की आर्थिक कठिनाइयों को भूलकरबच्चों की आँखों में सपनों की रोशनी भर रहे हैं। वह खड़ा हैधूप में, बारिश में,टूटी कुर्सियों और धूलभरे कमरों में,सिर्फ इसलिएकि बच्चे सपनों को पहचानना सीखें। कितनी अजीब विडम्बना हैजिस समाज को वह साक्षर बनाता हैवही समाजउसे तिरछी निगाहों से देखता है।जिस देश को वह भविष्य देता हैउसी का तंत्रउसकी वृद्धावस्था का सहारा छीन लेता है। फिर भीवह टूटता नहीं,वह शिकायतों का पुलिंदा नहीं बनता,वह सिर्फ चॉक उठाता है,और बच्चों की आँखों मेंभविष्य की रेखाएँ खींच देता है। उसके हाथों मेंअक्षर हैं, अंक हैं, विचार हैं।उसके हृदय मेंनिष्ठा है, धैर्य है, विश्वास है।वह जानता हैउसका जीवन शायदसरकारी कागजों में अधूरा रह जाएगा,पर उसकी मेहनतहर उस बच्चे के जीवन मेंपूर्णता पाएगीजो उसे "सरजी" कहकर पुकारता है। यही उसका उत्सव है,यही उसका पुरस्कार है। सुशील शर्मा*संदेश*
मेरे प्यारे विद्यार्थियों,
ढेर सारा स्नेह
शिक्षक दिवस के इस पावन अवसर पर, आप सभी को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ! यह दिन केवल शिक्षकों को सम्मानित करने का नहीं, बल्कि शिक्षा के महत्व और गुरु-शिष्य परंपरा को समझने का भी है। आज मैं आपसे एक शिक्षक के रूप में नहीं, बल्कि आपके एक मार्गदर्शक के रूप में बात करना चाहता हूँ। आज की दुनिया में शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है। आप सभी के सामने कई नई चुनौतियाँ हैं। इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारियों का अंबार, परीक्षा का दबाव, और भविष्य को लेकर अनिश्चितता, ये सब आपके मन में कई सवाल पैदा करते हैं। लेकिन इन चुनौतियों से घबराना नहीं है, बल्कि इनसे निपटने की कला सीखनी है। इसके लिए, आलोचनात्मक सोच (critical thinking) विकसित करना बहुत जरूरी है। आप जो भी पढ़ें, देखें या सुनें, उस पर विचार करें कि क्या वह सही है। जानकारी को सिर्फ रटने के बजाय उसे समझना सीखें। एक शिक्षक केवल वह नहीं है जो आपको पाठ पढ़ाता है, बल्कि वह आपका सच्चा मित्र और मार्गदर्शक भी है। हमारी भूमिका आपके जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाने की है। हम आपको सही रास्ता दिखाते हैं, आपकी शंकाओं को दूर करते हैं और आपकी क्षमताओं को पहचानकर उन्हें निखारने में मदद करते हैं। एक शिक्षक और विद्यार्थी के बीच का रिश्ता सिर्फ कक्षा तक सीमित नहीं होता। यह एक मजबूत मानसिक और भावनात्मक जुड़ाव है, जो आपको जीवन भर सही निर्णय लेने में मदद करता है। जब आप हमें अपनी परेशानियाँ बताते हैं, तो हम आपका हाथ थामकर आगे बढ़ने का हौसला देते हैं। आप सभी का सबसे पहला कर्तव्य अपने लक्ष्यों को निर्धारित करना है। यह जरूरी नहीं कि हर कोई डॉक्टर या इंजीनियर ही बने, बल्कि आप अपनी रुचि के अनुसार कोई भी लक्ष्य चुन सकते हैं। इन लक्ष्यों को पाने के लिए कठिन परिश्रम, अनुशासन और ईमानदारी ही आपके सबसे बड़े साधन हैं।साथ ही, यह भी याद रखें कि आपका विद्यालय सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि आपका दूसरा घर है। इसे स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना आप सभी की जिम्मेदारी है। स्कूल में कूड़ा इधर-उधर न फेंकें, दीवारों को गंदा न करें और पानी का सदुपयोग करें। एक स्वच्छ वातावरण में ही एक स्वस्थ मन का विकास होता है। अंतिम में, मैं आप सभी को यह विश्वास दिलाता हूँ कि हम शिक्षक भी अपने कर्तव्यों के प्रति सचेत हैं। हमारा कर्तव्य केवल आपको पढ़ाना नहीं, बल्कि आपको एक अच्छा इंसान बनाना भी है। हम आपको ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्य, ईमानदारी और सम्मान का पाठ भी सिखाएँगे। हम आपके सपनों को पूरा करने में हर संभव मदद करेंगे।आप सभी हमारे लिए गौरव हैं। हमें उम्मीद है कि आप अपने ज्ञान और संस्कारों से इस देश का नाम रोशन करेंगे।आप सभी का भविष्य उज्ज्वल हो! आप सभी को शुभ आशीषसुशील शर्माप्राचार्य