: हरसिंगार का उपयोग एवं साइटिका का आयुर्वेद से सफल चमत्कारी इलाज
Mon, Dec 9, 2024
साइटिका का आयुर्वेद से सफल चमत्कारी इलाज
हरसिंगार का उपयोग
शोध में बताया गया है कि हरसिंगार का व्यापक रूप से ब्रोंकाइटिस, गठिया, अस्थमा, खांसी, मतली, कटिस्नायुशूल, गठिया, कब्ज आदि के उपचार में उपयोग किया जाता है। पत्तियों से लेकर जड़ों तक, हरसिंगार का पूरा पौधा विभिन्न उपचार गुणों के लिए बहुत उपयोगी है। यह आयुर्वेद में एक अद्भुत पौधा है और इसे कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है।हरसिंगार, जिसे आमतौर पर रात में खिलने वाली चमेली या पारिजात के नाम से भी जाना जाता है, एक फूल वाला पेड़ है, जो अपने सुगंधित फूलों के लिए बहुत प्रसिद्ध है। फूल में सफेद रंग की पंखुड़ियां और एक नारंगी तना होता है और ये फूल हर सुबह पेड़ से गिरते हैं। तो, अगली बार जब आप अपने आस-पड़ोस में सफेद और नारंगी फूलों से भरी हुई जमीन देखें, तो जान लें कि यह हरसिंगार है।रिसर्चगेट पर प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, “हरसिंगार के पौधे कुछ फाइटोकेमिकल घटकों की उपस्थिति के कारण एंटी-एलर्जी, जीवाणुरोधी, एंटीवायरल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-डायबिटिक जैसे कई औषधीय गुणों के लिए खास हैं। इसलिए यह पौधा विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में बहुत उपयोगी है।”शोध में यह भी कहा गया है कि हरसिंगार का व्यापक रूप से ब्रोंकाइटिस, गठिया, अस्थमा, खांसी, मतली, कटिस्नायुशूल, गठिया, कब्ज आदि के उपचार में उपयोग किया जाता है। पत्तियों से लेकर जड़ों तक, हरसिंगार का पूरा पौधा विभिन्न उपचार गुणों के लिए बहुत उपयोगी है। यह आयुर्वेद में एक अद्भुत पौधा है और इसे कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है।
हरसिंगार पौधे के विभिन्न भागों के औषधीय उपयोग और लाभ
पत्तियों का उपयोग
हरसिंगार के पौधे की पत्तियों का उपयोग एक अलग तरह के बुखार, खांसी, गठिया, कृमि संक्रमण आदि के इलाज के लिए किया जाता है। पत्तियों का रस कड़वा होता है और टॉनिक के रूप में काम करता है।इसका काढ़ा गठिया, कब्ज, कृमि संक्रमण के लिए उत्तम होता है। पत्तियों के काढ़े में एस्पिरिन जैसे महत्वपूर्ण गुण होते हैं जो बुखार को प्रबंधित करने में सहायक होते हैं। यह मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया बुखार सहित विभिन्न प्रकार के मिचली के बुखार को ठीक करता है।
फूलों का उपयोग
हरसिंगार के फूल गैस्ट्रिक और सांस की शिकायत के लिए अद्भुत काम करते हैं। ये हेयर टॉनिक के रूप में काम करते हैं और बालों को मजबूत बनाने और बालों को झड़ने से रोकने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
तना, बीज और छाल का उपयोग
हरसिंगार के तने का चूर्ण जोड़ों के दर्द और मलेरिया में बहुत उपयोगी होता है। पौधे के बीज बालों के झड़ने और गंजेपन में सहायता करते हैं। हरसिंगार के बीजों का प्रयोग बवासीर के इलाज में भी किया जाता है। इसकी छाल को पान के साथ खाने से खांसी ठीक हो जाती है जबकि बीज मुख्य रूप से त्वचा और बालों के लिए अच्छे होते हैं।अगर हम आयुर्वेद समाधान देखें, तो हमारी अधिकांश स्वास्थ्य समस्याओं का उत्तर एक पेड़ के रूप में है, इसलिए हरसिंगार को आजमाएं और अपने दर्द को दूर करें!
साईटिका रोग के लक्षण
-: एक पैर मे पंजे से लेकर कमर तक दर्द होना गृध्रसी या रिंगण बाय कहलाता है। प्रायः पैर के पंजे से लेकर कूल्हे तक दर्द होता है जो लगातार होता रहता है। मुख्य लक्षण यह है कि दर्द केवल एक पैर मे होता है। दर्द इतना अधिक होता है कि रोगी सो भी नहीं पाता।
रोग का इलाज हारसिंगार-:
पारिजात के 10-15 कोमल पत्ते को कटे फटे न हों तोड़ लाएँ। पत्ते को धो कर मिक्सी मे या कैसे ही थोड़ा सा कूट ले या पीस ले। बहुत अधिक बारीक पीसने कि जरूरत नहीं है। लगभग 200-300 ग्राम पानी (2 कप) मे धीमी आंच पर उबालें। तेज आग पर मत पकाए इसे चाय की तरह पकाए। और चाय कि तरह छान कर गरम गरम पानी (काढ़ा) पी ले।
दिन में दो बार पिए एवं ठंडा पानी व खटाई का परहेज करें
प्रतिदिन 2 बार पिए यदि आप ऑफिस जाते हैं तो दोगुना पानी उबाले। थर्मस मे भरकर ले जाएँ। इस हरसिंगार के पत्तों के काढ़े से 15 मिनट पहले और बाद तक ठंडा पानी न पीए दही लस्सी और आचार न खाएं।।
: जिले में हुआ राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ
Sun, Dec 8, 2024
जिले में हुआ राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ
नरसिंहपुर। राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ जिले में विधायक श्री विश्वनाथ सिंह पटेल व श्री महेन्द्र नागेश, कलेक्टर श्रीमती शीतला पटले सहित अन्य जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने जिला चिकित्सालय नरसिंहपुर में जन्म से लेकर 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाकर किया।इस दौरान पूर्व राज्यमंत्री श्री जालम सिंह पटेल, सीईओ जिला पंचायत श्री दलीप कुमार, डॉ. अनंत दुबे, श्री सुनील कोठारी, श्रीमती बबीता जाट ने भी बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई। सिविल अस्पताल गाडरवारा में नगर पालिका अध्यक्ष श्री शिवकांत मिश्रा, रोटरी क्लब, रोगी कल्याण समिति की सदस्य श्रीमती बसंती पालीवाल ने बच्चों को पोलियो की दवा पिलाकर शुभारंभ किया।उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत जिले में 8 से 10 दिसम्बर 2024 तक जन्म से लेकर 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई जायेगी। शासन द्वारा एक लाख 70 हजार 329 बच्चों को पल्स पोलियो की दवा पिलाने का लक्ष्य दिया गया है। अभियान के अंतर्गत जिले में कुल 1335 टीमें गठित की गई हैं। इनमें 2670 सदस्य, 43 मोबाइल टीम व 51 ट्राजिट टीम बनाई गई है। राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत पहले दिन 8 दिसम्बर को बूथ पर और 9 एवं 10 दिसम्बर को घर- घर जाकर बच्चों को पोलियो की दवाई पिलाई जायेगी। एक भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे, इसके लिए मोबाइल दल घुम्मकड़ आबादी तथा बंजारा बस्ती, ईट भट्टा, सुगर मिल, गुड़ भट्टी, निर्माणधीन, मजदूर परिवार आदि सुदूर स्थलों में जाकर बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई जा रही है।शुभारंभ अवसर पर सीएमएचओ डॉ. एपी सिंह, सिविल सर्जन डॉ. जीसी चौरसिया, डीएचओ 01 डॉ. एआर मरावी, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सुनील पटैल, एसएनसीयू प्रभारी डॉ. संदीप पटैल, डॉ. देवेन्द्र रिपुदमन एवं स्वास्थ्य के सभी अधिकारी- कर्मचारी एवं पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद था।
: गाडरवारा,डॉ. उमाशंकर दुबे: 40 वर्षों से पोलियो मुक्त भारत के लिए समर्पित सेवा
Sun, Dec 8, 2024
डॉ. उमाशंकर दुबे: 40 वर्षों से पोलियो मुक्त भारत के लिए समर्पित सेवा
गाडरवारा। पोलियो मुक्त भारत अभियान में गाडरवारा के वरिष्ठ चिकित्सक, समाजसेवी, और रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3261 के असिस्टेंट गवर्नर डॉ. उमाशंकर दुबे का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। पिछले 40 वर्षों से वे न केवल गाडरवारा तहसील बल्कि आसपास के ग्रामीण और सुदूर आदिवासी अंचलों में लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं।राष्ट्रीय पल्स पोलियो कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. दुबे ने न केवल जागरूकता फैलाई है, बल्कि सक्रिय रूप से घर-घर जाकर पोलियो ड्रॉप्स पिलाने में भाग लिया है। रविवार को उन्होंने गाडरवारा के शासकीय अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और विभिन्न स्कूलों में बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई।डॉ. उमाशंकर दुबे का कहना है कि पोलियो जैसी गंभीर बीमारी को खत्म करने के लिए सतत प्रयास और जागरूकता आवश्यक है। उनका मानना है कि हर बच्चा पोलियो से मुक्त हो, इसके लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना चाहिए।उनकी सेवाओं को लेकर गाडरवारा और आसपास के क्षेत्रों में उनका व्यापक सम्मान है। डॉ. दुबे ने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को पोलियो की दवा जरूर पिलाएं और इस अभियान को सफल बनाने में योगदान दें।डॉ. दुबे के समर्पण और 40 वर्षों की सेवा ने न केवल गाडरवारा बल्कि पूरे क्षेत्र में पोलियो उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका यह योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।