फर्जी दस्तावेजों पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जाना संदेह के घेरे मे : आखिर जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे हैं, कैसे कमल जोशी नामक एक व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया,
Aditi News Team
Fri, Jan 9, 2026
रिपोर्टर संदीप राजपूत
फर्जी दस्तावेजों पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जाना संदेह के घेरे में।
कमल जोशी नामक एक व्यक्ति के मृत्यु प्रमाण पत्र का मामला, जिसे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जिला अस्पताल से किया गया जारी।।
नरसिंहपुर/ फर्जी दस्तावेजों के सहारे जिला अस्पताल नरसिंहपुर से कमल जोशी पिता कोमल श्रीवास्तव के नाम से एक मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया है। आखिर क्या है इस मामले की पूरी सच्चाई,क्या कमल जोशी नाम का व्यक्ति जिंदा है, जिंदा है तो कहा है ओर किसने यह मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जारी किया। कमल जोशी अगर मृतक हो गया है तो उसके आधार कार्ड में वा मृत्यु प्रमाण पत्र में पता अलग क्यों। कमल जोशी का आखिर मृत्यु प्रमाण पत्र किसने बनवाया ओर क्यों,, क्या उक्त मृत्यु प्रमाण पत्र अनुकंपा नियुक्ति हासिल करने के लिए बनवाया गया है या बीमा क्लेम के लिए। कमल जोशी पिता कोमल श्रीवास्तव,, जोशी ओर श्रीवास्तव दोनों शब्द भिन्न है। वैसे भी पूर्व से ही जिला अस्पताल के कुछ अधिकारी कर्मचारी विवादों में रहे है। 23-12-2025 को जनसुनवाई कलेक्टर कार्यालय में की गई शिकायत के अनुसार कमल जोशी जीवित है अथवा मृत—इसका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सामने अभी तक नहीं आया है, जिससे पूरे मामले की गंभीरता कई गुना बढ़ गई है।
क्या बीमा कंपनी को धोखा देने और अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने के उद्देश्य से मृत्यु प्रमाण पत्र पाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया। जिला चिकित्सालय नरसिंहपुर में कमल जोशी के भर्ती होने से लेकर मृत्यु होने तक कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद फर्जी आधार कार्ड फर्जी ओपीडी टिकट, फर्जी भर्ती टिकट, फर्जी बिना डॉक्टर के साइन वाली लाल पर्ची जो मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है के बिना मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जाने की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों का आरोप है कि जिला चिकित्सालय में पदस्थ कुछ अधिकारी इस पूरे फर्जीवाड़े में धन-बल के प्रभाव में संलिप्त हो सकते है। सूत्र बताते है किसी अधिकारी या डॉक्टर के कहने पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया है। सूत्र बताते है कि 500 से 1000 रुपये की अवैध वसूली कर जन्म,मृत्यु प्रमाण पत्र दो दिन से तीन दिन में बना दिए जाते है। सीधे साधे लोगो को तो 15 दिन से 01 माह का समय दिया जाता है। आशंका तो ये तक होने लगी है कि अब तक इस तरह के कई जाली दस्तावेज के आधार पर प्रमाण पत्र बनाए न जा चुके हो, जिनका दुरुपयोग विभिन्न शासकीय व निजी कार्यों में किया जा रहा है। अभी तक जानकारी अनुसार कलेक्टर मैडम ने टीम तो गठित कर दी थी, लेकिन आज दिनांक तक कार्रवाई शून्य।
पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन द्वारा एक जांच टीम गठित की गई, जिसमें अंजना त्रिपाठी जी सहित तीन अन्य सदस्य टीम में शामिल किए गए थे। टीम द्वारा जिला अस्पताल का निरीक्षण भी किया जा चुका है, जिला अस्पताल पहुंची टीम ने कंप्यूटर सिस्टम से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त कर अपने कब्जे में ले लिया है, टीम द्वारा अस्पताल प्रबंधक को बोला भी गया था कि इस मामले से संबंधित सारे दस्तावेज हमारे समक्ष उपलब्ध कराए जाए इसके बावजूद अब तक कमल जोशी से संबंधित कोई वैध दस्तावेज अस्पताल के रिकॉर्ड से सामने नहीं आ सके है।
करीब 15 दिन बीत जाने के बावजूद आज दिनांक तक इस मामले से जुड़े व्यक्तियों पर एफआईआर दर्ज की गई, जिससे पूरे मामले में मिलीभगत की आशंका समझ आ रही।
क्या कार्यवाही होनी थी
नियमों के अनुसार इस मामले में तत्काल कलेक्टर मैडम के समक्ष जांच रिपोर्ट टीम को जांच कर सौंप देना चाहिए थी।फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र एफआईआर दर्ज की जानी थी।
जिला अस्पताल के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की जानी चाहिए थी।
मृत्यु प्रमाण पत्र को निरस्त कर डिजिटल रिकॉर्ड सील किया जाना चाहिए था।
लेकिन अब तक इन में से किसी भी बिंदु पर ठोस कार्रवाई नहीं होना समझ से परे।
क्या गंभीर घटनाएँ घट सकती हैं
यदि इस मामले में शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं—
फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर लाखों–करोड़ों रुपये की बीमा राशि का गलत भुगतान हो सकता है।
जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर सरकारी नौकरी (अनुकंपा नियुक्ति) दी जा सकती है।
भविष्य में इसी तरीके से अपराधी फर्जी मृत्यु दिखाकर अपराध से बच निकलने का रास्ता अपना सकते हैं।
जिला अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान की विश्वसनीयता पूरी तरह समाप्त हो सकती है।
आम नागरिकों का शासकीय दस्तावेज प्रणाली से विश्वास उठ सकता है।
यह मामला जिले के अब तक के सबसे बड़े फर्जीवाड़ों में से एक माना जा रहा है, जिसमें तीन से चार लोगों की संलिप्तता की बात सामने आ रही है। सरकारी अस्पताल के सामने कोई सांची दुग्ध नाम का ठेला है सुना है वहां से ज्यादा प्रमाण पत्रों का खेल चल रहा है। सांची दूध ठेला मालिक सुना है जिला अस्पताल में जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र शाखा के महत्वपूर्ण पद पर बैठे किसी अधिकारी/ कर्मचारी का सगा संबंधी है जो कई बार जन्म मृत्यु प्रमाण बनवाने अस्पताल के अंदर जाता है,, प्रशासन अगर सी सी टी वी कैमरों की फुटेज चेक कराए तो सब सच सामने आ जाएगा।अब पूरे मामले में देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण में कब तक चुप्पी साधे रहता है या दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर जनता का विश्वास बहाल करता है।
Tags :
अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
नरसिंहपुर,कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह
नरसिंहपुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी मनीष मिश्रा