आज श्री कैलाश सोनी के जन्म दिवस पर विशेष : "वे/ सुदूर अंचल तक/ फैले रेगिस्तान में/ हरियाली की तरह/ जहां अंकित रहते हैं/
Aditi News Team
Thu, Jan 8, 2026
नारायण श्रीवास्तव,वरिष्ठ साहित्यकार की कलम से
पूर्व सांसद श्री कैलाश सोनी के जन्म दिवस 8 जनवरी पर विशेष लेख
वस्तुत: आज नर्मदांचल व मध्यप्रदेश के एक ऐसे तपस्वी, संघर्षशील व्यक्तित्व व सागर से भी कहीं ज्यादा गहरे कृतित्व की चर्चा करने में गर्व महसूस कर रहा हूं, जिनकी राजनीतिक साधना के स्तंभ साहित्य, संस्कृति और समाज को लेकर अडिग खड़े हैं।
मेरा अभिप्राय अपनी प्राथमिक उम्र में नव जागृति मंडल का गठन कर गणेशोत्सव आयोजित करने वाले उत्सव धर्मी श्री कैलाश सोनी को भली-भांति जानने से है। उनके नेतृत्व में सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत रंगमंच व अखिल भारतीय कवि सम्मेलन तथा विभिन्न साहित्यिक समारोह प्रमुख हैं। माध्यमिक व उच्चतर कक्षाओं में आते- आते प्रखर वक्ता व रंगकर्मी के लिए प्रतिष्ठित हो चुके कैलाश जी महाविद्यालयीन जीवन में परिपक्व राजनीतिज्ञ के रूप में प्रदेश भर में जाने गए। सन् 1971 के लोकसभा चुनाव से ही संविधानवेत्ता पूर्व सांसद श्री हरि विष्णु कामथ के विश्वासपात्र बनकर राज्य और देश की राजनीति में पदार्पण किया।
करेली नगर पालिका के चुनाव में तीसरा मोर्चा गठित कर उसे भारी मतों से विजय दिलाते हुए सक्रिय राजनीति की जोरदार दस्तक दी। सामान्य परिवार में पले बढ़े कैलाश जी ने समाज के प्रत्येक वर्ग से नजदीकियां कायम की। जन सरोकारों हेतु संघर्षों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में उन्होंने अनेक जेल यात्राएं की। इनके साथ-साथ अटल जी के नेतृत्व में बांगलादेश की मान्यता के लिए 10 अगस्त 1971 में तिहाड़ जेल दिल्ली की यात्रा उल्लेखनीय है। भाजपा के नैनपुर अधिवेशन के संयोजन में अटल जी के पूरे प्रवास भर साथ रहने का सुअवसर उन्हें मिला, उनके विचारों से और जुड़ाव हुआ। जिले व महाकौशल संभाग में संपन्न अटल जी की अनेक सभाओं का कुशल संचालन कैलाश जी द्वारा किया गया, जो लोगों को आज भी जुबानी याद है। दरअसल अटल जी से कैलाश जी का सीधा जुड़ाव व परिचय रहा है, वे कैलाश जी को सीधे नाम से जानते थे।
सन् 1972- 1973 में अखिल भारतीय युवा सम्मेलन आयोजित कर तत्कालीन राजनीतिज्ञों का ध्यान उनकी सच्ची लगन और कठोर परिश्रम की ओर आकृष्ट हुआ। इन आयोजनों में देश के जो युवा सम्मिलित हुए उनमें सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, शरद यादव, रघु ठाकुर, रामेश्वर नीखरा इत्यादि प्रमुख थे। सन् 1975 में इंदिरा गांधी ने जब स्वयं की राजनीतिक प्रतिष्ठा बनाए रखने हेतु आपातकाल घोषित किया, तब कैलाश जी को सर्व प्रथम जेल में डाला गया। प्रदेश में सर्वाधिक मीसाबंदी नरसिंहपुर जिले के उन्हीं के नेतृत्व में थे। कैलाश जी को सन् 1977 के लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद ही रिहाई मिली थी। उनकी जनता पार्टी के गठन से लेकर भारतीय जनता पार्टी के बंबई अधिवेशन में गठन हेतु उजली तपस्या विशेष उल्लेखनीय रही है। आपातकालीन डेढ़ साल से भी अधिक जेल यात्रा के दौरान देश के वरिष्ठ राजनीतिज्ञों के सत्संग से ऐसी सक्रिय राजनीति का गहन अध्ययन किया जिसमें बाल्यावस्था से प्राप्त संघ के संस्कारों में तपने का सुअवसर मिला। आपातकाल के उपरांत आपने नगर, तहसील, जिला, संभाग, प्रदेश और देश स्तर पर लोकतंत्र सेनानी संघ स्थापित कर लोकतंत्र सेनानियों के हित में अनेक निर्णय लिये। आज यह संगठन देश में निरंतर सक्रिय है, यही कारण है कि अनेक राज्यों के लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान निधि मिल रही है। लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाते अनेक अधिवेशन जिले से लेकर दिल्ली में आज भी उनके मार्गदर्शन में आयोजित किए जाते हैं।
सन् 1977 के लोकसभा चुनाव में हरि विष्णु कामथ जी के चुनाव प्रभारी के रूप में आपकी संगठन क्षमता को देश- प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं ने पहचाना। इसीलिए दल ने जिला भाजपा के अध्यक्ष का दायित्व अनेक बार दिया। भाजपा के सभी संगठनों में उनकी राजनीतिक सूझ-बूझ की सराहना आज भी सभी करते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी, राजमाता सिंधिया, कुशाभाऊ ठाकरे, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, वीरेंद्र सखलेचा, कैलाश जोशी, सुन्दरलाल पटवा, मेघराज जैन, बाबूराव परांजपे जैसी हस्तियों के सन्निकट रहकर देश और दल की स्तुत्य सेवा में निरंतर रत हैं। आज के दौर की राजनीतिक विचारधाराओं से सुपरिचित राष्ट्रवादी कैलाश जी ने को- ऑपरेटिव बैंक के जिला अध्यक्ष व अपेक्स बैंक के पहले डायरेक्टर फिर उपाध्यक्ष पद पर आसीन रहकर अनेक उल्लेखनीय कार्य करते हुए राज्यसभा सांसद के रूप में जन सामान्य के विषय प्रस्तुत कर अपनी वजनदारी बनाए रखी।
बाबूजी के आत्मीय संबोधन से सुप्रतिष्ठित कैलाश जी ने लंबे समय तक वकालत करते हुए क्षेत्र और प्रदेश में अपनी गहरी पैठ बनाई। उनकी स्मरण शक्ति श्लाघनीय है। तभी तो छात्र जीवन के मित्रों से लेकर गांव-गांव के कार्यकर्त्ताओं के नाम उन्हें जुबानी याद हैं। हमें गर्व है कि पार्टी व देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृह मंत्री माननीय अमित शाह के सानिध्य में रहते हुए राज्यसभा काल के महत्त्वपूर्ण निर्णयों में तीन तलाक़ और जम्मू कश्मीर से 370 हटाना जैसे उल्लेखनीय क्षण में श्री कैलाश जी की सक्रिय भागीदारी रही। क्षेत्र वासियों से निरंतर संपर्क में रहने वाले कैलाश जी देश में भी सभी के सुख-दुख में सम्मिलित रहते हैं। उनके इस प्रेमातिरेक आत्मीय और स्पष्ट वक्ता के स्वभाव से जो भी परिचित हैं सभी आत्माभिभूत हैं। कैलाश जी सुधी पाठक हैं, उन्होंने अनेक राजनीतिक, आर्थिक, आध्यात्मिक विचारकों की पुस्तकों के अलावा विभिन्न काल के साहित्यकारों की पुस्तकें गहराई से पढ़ी हैं।
जन्मदिन के अवसर पर मेरे कविता संग्रह "कविता की सरलतम इबारत" में संकलित रचना प्रस्तुत करने का लोभ मैं संवरण नहीं कर पा रहा हूं, जो उन्हीं को समर्पित है...
तो लीजिए- ढाई अक्षरों में कैलाश सोनी कविता-
"वे/ सुदूर अंचल तक/ फैले रेगिस्तान में/ हरियाली की तरह/ जहां अंकित रहते हैं/ पानी तलाशते/ श्रम साधकों के पांव/ वे/ अबोध बच्चों में/ मुस्कान की तरह/ जो प्रफुल्ल कर देते हैं/ अपरिचित बटोही को भी/ वे जल तरंग की तरह/ जिनमें झंकृत होता है/ तरलनाद/ जिनका मेल बन जाता है/ राग तिलक कामोद/ वे/ पोनी की तरह/ जो घूमते चरखे से बनते जाते हैं धागा/ विभिन्न सुमनों की माला गूंथने के लिए और वह फकीर जो/ किसी लकीर की सीमा में नहीं/ रामचरित मानस के/ अखंड पाठ हेतु/ वे आते हैं अकेले और फिर टोलियों सहित जाते हैं- अगले निर्वहन के लिए/ किसी शहीद के/ स्मारक पर/ भरने वाले मेले में/ समर्पित श्रद्धालु की तरह/ जहां पहुंच गीता के अक्षरों का/ खींचते हैं/वृत्त चित्र/जीवन के द्वंद्व में खड़े/मित्रों के लिए/ढाई अक्षरों की परिधि/उन्हें समाज है/और घर फुंक जाना/बाजार की परिभाषा/दरवाजे के ऊपर/उछारे गये स्वास्तिक/उनकी परंपराएं हैं/और कर्मकांड/जरूरतों की पंक्तियों के/आखिरी अक्षर की/मधुर मुस्कान है।
आयु के 75 वर्ष की पूर्ति पर निरंतर उल्लेखनीय लंबे जीवन की मेरे अग्रज माननीय श्री कैलाश जी को अशेष शुभकामनाऍं व अनेक आत्मीय बधाईयां।
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पूर्व राज्यसभा सांसद कैलाश सोनी करेली
नरसिंहपुर भाजपा
नारायण श्रीवास्तव वरिष्ठ साहित्यकार,