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जिले के सहकारिता विभाग में कार्यरत सहायक आयुक्त : लोकयुक्त की टीम ने सहकारिता एवं सिमरिया सोसायटी के प्रशासक को 3000 रु., की रिश्वत लेते रंगे हाथों किया गिरफ्तार

Aditi News Team

Thu, Dec 11, 2025

लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई , नरसिंहपुर सहकारिता विभाग के अधिकारी रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

नरसिंहपुर । जिले के सहकारिता विभाग में कार्यरत सहायक आयुक्त सहकारिता एवं सिमरिया सोसायटी के प्रशासक संजय दुबे को आज लोकायुक्त की टीम ने ₹3000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई दोपहर लगभग 2 बजे उनके नरसिंहपुर स्थित कार्यालय में की गई।

शिकायत कर्ता प्रबंधक देवी प्रसाद तिवारी ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके अक्टूबर और नवंबर माह के रुके हुए वेतन को जारी करने के नाम पर अधिकारी द्वारा लगातार रिश्वत की मांग की जा रही थी। देवी प्रसाद तिवारी के अनुसार, उन्होंने कई बार वेतन जारी करने का आग्रह किया, लेकिन आरोपी अधिकारी रिश्वत के बिना वेतन पास करने को तैयार नहीं थे।

शिकायतकर्ता ने बताया—“मैंने उन्हें कहा था कि रिश्वत मांगने पर लोकायुक्त में शिकायत करूंगा, लेकिन वे नहीं माने।”लोकायुक्त टीम ने योजना बनाकर ट्रैप कार्रवाई की और जैसे ही संजय दुबे ने ₹3000 की रिश्वत स्वीकार की, उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया नकदी बरामद करते हुए टीम ने आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। इस कार्रवाई के बाद सहकारिता विभाग में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

मध्यप्रदेश लोकायुक्त अधिनियम, 2014 के तहत लोकायुक्त भ्रष्टाचार के मामलों में जांच करता है। इसके तहत सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों, और जनप्रतिनिधियों के भ्रष्ट आचरण की जांच होती है।

शिवपुरी के मामले में भी लोकायुक्त की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ा है। इस घटना से यह भी पता चलता है कि उच्च पदस्थ अधिकारी के भी कर्मचारियों या स्टेनो की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वे अक्सर सीधी जनता से भ्रष्टाचार के संपर्क में रहते हैं।

कानून और सजा के नियम लोकायुक्त भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अनुसार, रिश्वत लेना गंभीर अपराध है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को काउंसिलिंग, जमानत से पहले हिरासत और सजा का सामना करना पड़ सकता है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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