Saturday 5th of September 2026

ब्रेकिंग

शिक्षक दिवस पर विशेष - श्री मति निर्मला पाराशर (शिक्षिक) की कलम से

राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद की जबलपुर संभागीय इकाई के तत्वावधान में

भारत के महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में

नर्मदा नदी किनारे एवं निचले क्षेत्रों में निवासरत नागरिकों से सतर्क रहने तथा आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील

स्कूलों में बच्चों की कम उपस्थिति और शिक्षण व्यवस्था में लापरवाही पर जताई नाराजगी, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

गाडरवारा को जिला बनाये जाने एस पटेल ने ailu कि ओर से प्रेस विज्ञप्ति : गाडरवारा को जिला बनाओ,AILU

Aditi News Team

Sun, Nov 30, 2025

गाडरवारा को जिला बनाओ,AILU

"अधिवक्ताओं द्वारा गाडरवारा को जिला बनाये जाने एस पटेल ने ailu कि ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया है कि :--आज गाडरवारा को औद्योगिक , प्रशासनिक तथा राजनीतिक दृष्टि से एवं जनहित को ध्यान में रखते हुए जिला बनाया जाना समय की आवश्यकता है ,किसी भी भू-भाग के इतिहास को जानने के लिए उस भू-भाग कि राजनीति, सामाजिक, आर्थिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों को जानना आवश्यक होता है।इस दृष्टि से देखा जाए तो सन 1817 का वर्ष नरसिंहपुर जिले के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण वर्ष रहा है,इसी वर्ष 27 नवंबर को नागपूर के सीताबर्डी मैं अंग्रेजों के साथ हुए समझौते के अनुसार नरसिंहपुर जिले के भूभाग को ब्रिटिश शासन के अधीन लिया गया था, जिसका नियंत्रण ब्रिटिश सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल मेक मूरिश के अधीन था। तब उन्होंने सन 1818 में नरसिंहपुर को प्रथम बार जिले के रूप में गठित किया था, जिसका मुख्यालय प्रशासन की सुविधा की दृष्टि से गाडरवारा रखा गया था ,गाडरवारा से ही जिले का शासन चलाया जाता था। सन 1820 में नरसिंहपुर जिले का प्रभार एक समिति को सौंपा गया था ,जिसमें लेफ्टिनेंट माउंट मोगरे तथा कप्तान अनबर्ड प्रमुख थे, जिले में सबसे पहले गतिरोध सन 1836 में आया जब नरसिंहपुर जिले को समाप्त कर इसे एक संभाग के रूप में जिला होशंगाबाद में मिला दिया गया था, उसके बाद पुनः 1842 में नरसिंहपुर को जिला के रूप में बहाल किया गया था ,जिसे सन 1932 में पुन: समाप्त कर दिया गया था। भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन में मध्य प्रदेश राज्य की स्थापना के बाद नवंबर सन 19 56 को पुन:नरसिंहपुर को जिले के रूप में स्थापित किया गया है ,जो आज तक बना हुआ है ।इस प्रकार से देखा जाए तो नरसिंहपुर जिले के अस्तित्व के बारे में गतिरोधों एवं परिवर्तनों की एक श्रृंखला से गुजरता रहा है। नरसिंहपुर जिले का उसके गठन के पूर्व भी ऐतिहासिक महत्व रहा है। नवमी शताब्दी में हैह्ययवंशीय कल्चुरी शासकों के राज्य के पतन के बाद नरसिंहपुर जिले का भूभाग आल्हा एवं उदल,( बनाफर राय पौराणिक वीर) के पिता एवं चाचा जच्छराज एवं बच्छराज के अधिनस्थ था ,उनकी उस समय राजधानी जिले के पश्चिमी भाग वर्तमान जो वोहानी ग्राम है, में स्थित थी ,जिसे उस समय बोहारी के नाम से जाना जाता था ।वोहानी तथा उसके आसपास अभी भी उनके ऐतिहासिक निशांनात है तथा उनके वंश के बनाफर लोग पास के ग्राम भैंरोंपुर प्रेमपुर तथा अन्य जगहों पर बहुत कम मात्रा में रहते हैं , वो लोग स्वयं को आल्हा ऊदल के वंशज बनाफर राय होना बताते हैंऐसा लोग कहते हैं। गाडरवारा क्षेत्र के चारों तरफ भू-भाग में एनटीपीसी, बी एल ए, सोयाबीन जैसे विशालकाय प्लांट, मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा शुगर मिल्स ,दाल मिल्स , 100 वर्ष से अधिक पुरानी अदालतें हैं, कृषि उत्पादन का सर्वोच्कृष्ट क्षेत्र, इससे जो जिला बनाए जाने के लिए आवश्यक सभी विशेषताएं होनी चाहिए वे सब मौजूद हैं। गाडरवारा को जिला बनाए जाने के लिए राजनीतिक पहल की आवश्यकता है, जो नहीं हो रही है, यदि इसमें हमारे राजनेता थोड़ा सा भी इंट्रेस्ट ले तो गाडरवारा को जिला बनाए जाना कठिन कार्य नहीं है।

Tags :

अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

मुख्यमंत्री मप्र शासन

गाडरवारा जिला बनाओ

गाडरवारा को जिला बनाओ,AILU

जरूरी खबरें