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प्रकृति हमारी मां, इसका संरक्षण और संवर्धन हमारा परम कर्तव्य: ब्रह्माकुमारी कुसुम दीदी सेवाकेंद्र

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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवाकेंद्र म : प्रकृति हमारी मां, इसका संरक्षण और संवर्धन हमारा परम कर्तव्य: ब्रह्माकुमारी कुसुम दीदी सेवाकेंद्र

Aditi News Team

Fri, Jun 5, 2026

रिपोर्टर भागीरथ तिवारी

प्रकृति हमारी मां, इसका संरक्षण और संवर्धन हमारा परम कर्तव्य: ब्रह्माकुमारी कुसुम दीदी

करेली। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवाकेंद्र 'प्रभु उपहार भवन' में विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में 30वां वार्षिकोत्सव बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय को पर्यावरण संरक्षण और अधिक से अधिक पौधारोपण करने का संकल्प दिलाया गया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में ब्रह्माकुमारीज़ की जिला संचालिका ब्रह्माकुमारी कुसुम दीदी जी उपस्थित रहीं। इस अवसर पर स्थानीय सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी सरोज दीदी सहित मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य नगरपालिका अधिकारी श्रीकांत पाटकर, महात्मा गांधी महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. यू.सी. विश्वकर्मा, मित्र मिलन संस्था से अमित रावत, मनीष राय, आदर्श कोहली, अग्रवाल सभा के अध्यक्ष राकेश अग्रवाल एवं वरिष्ठ पत्रकार भागीरथ तिवारी व भुजवल राजपूत सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

प्रकृति के साथ संबंध सुधारना आज की महती आवश्यकता: कुसुम दीदी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला संचालिका ब्रह्माकुमारी कुसुम दीदी जी ने पर्यावरण के आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:

"प्रकृति हमारी मां है और आदिकाल से ही मानव का इससे गहरा नाता रहा है। प्रकृति ने बिना किसी स्वार्थ के मनुष्य को जीवनोपयोगी सभी संसाधन सौंपे हैं। प्रकृति के पंचतत्वों में जहां सृजन की अपार शक्ति है, वहीं विनाश की क्षमता भी निहित है। जब मनुष्य प्रकृति का अत्यधिक दोहन और दुरुपयोग करता है, तब प्रकृति समय-समय पर विभिन्न माध्यमों से संकेत देती है। यदि मानव समय रहते अपने व्यवहार में सुधार नहीं करता, तो प्रकृति विकराल रूप धारण कर लेती है, जिससे भारी जन-धन की हानि होती है।"

उन्होंने सभी को प्रेरित करते हुए संकल्प दिलाया कि प्रत्येक व्यक्ति को वर्ष में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी परवरिश की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

पौधों की देखभाल और संरक्षण सबसे जरूरी: मुख्य अतिथि

मुख्य नगरपालिका अधिकारी श्रीकांत पाटकर ने पौधारोपण की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि केवल पौधा लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका वृक्ष बनने तक संरक्षण और देखभाल करना सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

पूर्व प्राचार्य डॉ. यू.सी. विश्वकर्मा ने मानव जीवन में वृक्षों की उपयोगिता पर वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टिकोण साझा किया। इसके साथ ही मित्र मिलन संस्था के अमित रावत ने आयोजन की सराहना करते हुय कहा कि उनका ग्रुप भी निरंतर प्रकृति और समाज सेवा में प्रयासरत है और प्रति वर्ष सेवा के कार्य में प्रयासरत लोगो का सम्मान भी करता है अग्रवाल समाज के अध्यक्ष राकेश अग्रवाल और पत्रकार भागीरथ तिवारी ने भी पर्यावरण दिवस पर अपने विचार रखे और बताया कि किस प्रकार उनकी संस्थाएं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर कार्य कर रही हैं।

नृत्य-नाटिका और सामूहिक संकल्प बना मुख्य आकर्षण

कार्यक्रम के दौरान नन्हें-मुन्ने बच्चों ने एक सुंदर नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की, जिसके माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि मनुष्य का जीवन और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक हैं।

इसके पश्चात, मंच पर उपस्थित आमंत्रित अतिथियों और संस्था के सदस्यों ने सेवाकेंद्र परिसर में सामूहिक रूप से पौधारोपण किया। आए हुए सभी अतिथियों का तिलक लगाकर, बैज लगाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर आत्मीय सम्मान किया गया।

हरियाली की अनूठी भेंट:

कार्यक्रम की सबसे विशेष बात यह रही कि विदाई के समय सभी अतिथियों और उपस्थित जनों को भेंट स्वरूप एक-एक पौधा प्रदान किया गया, ताकि वे उसे अपने घरों या आसपास रोपित कर सकें। अंत में सभी को ईश्वरीय सौगात और प्रभु प्रसाद का वितरण किया गया। पूरा परिसर 'प्रकृति बचाओ' के संकल्प से गुंजायमान हो उठा।

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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

ब्रह्माकुमारी कुसुम दीदी

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