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शंकराचार्य व साधु संतों सहित नन्हें बटुकों के अपमान के विरोध में : गाडरवारा में सर्व ब्राह्मण महासभा ने प्रयागराज की घटना के विरोध में सौंपा ज्ञापन,

Aditi News Team

Sat, Jan 24, 2026

गाडरवारा में सर्व ब्राह्मण महासभा ने प्रयागराज की घटना के विरोध में सौंपा ज्ञापन,

गाडरवाड़ा । बीते दिनो उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज एवं साधु संतों सहित नन्हें बटुकों के साथ पुलिस द्वारा जो अभद्रता कर अपमान किया है जिससे पूरे देश में आक्रोश की भावना व्याप्त है। इसी तारतम्य में आज गाडरवारा सर्व ब्राम्हण महासभा ने भारत के राष्ट्रपति एवं मध्य प्रदेश के राज्यपाल के नाम एसडीएम गाडरवारा को ज्ञापन सौपा गया।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि परम पूज्य शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज एवं नन्हे बटुकों एवं बुजुर्ग साधु संतों के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा की गई बर्बरता तथा मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर सनातन परंपरा अनुसार स्नान से रोके जाने के संबंध में कठोर कार्रवाई की जाए।

ज्ञापन में उल्लेख किया है कि हम समस्त संत समाज एवं सनातन धर्म में आस्था रखने वाले नागरिक अत्यंत पीड़ा और आकोश के साथ आपका ध्यान एवं गंभीर विषय की ओर आकृष्ट कराना चाहते हैं।

दिनांक 18 जनवरी को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में परम पूज्य उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्‌गुरू शंकराचार्य स्वामीश्रीः अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के साथ उपस्थित नन्हे मासूम बटुकों एवं बुजुर्ग साधु संतों दंडी सन्यासियों पर राज्य सरका की पुलिस द्वारा बर्बरतापूर्वक बल प्रयोग एवं मारपीट (धक्का मुक्की) की गई। इतना ही नहीं सनातन परंपरा के अनुसार मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर घाट पर स्नान करने से भी रोका गया, जो न केवल धार्मिक भावनाओं पर आघात है बल्कि भारत के संविधान का स्पष्ट उल्लंघन भी है।

भारत का संविधान अनुच्छेद 25 के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन, आचरण एवं प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है। संतों, धर्मचार्यों और मासूम बच्चों पर बल प्रयोग कर उन्हें धार्मिक अनुष्ठान से वंचित करना लोकतंत्र, संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता की कूल भावना के विपरित है।

ज्ञापन में दर्शाया है गया कि संत समाज पर किया गया यह दुर्व्यवहार केवल एक व्यक्ति या समुदाय पर नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आस्था और संविधान प्रदत्त अधिकारों पर सीधा प्रहार है। यदि इस प्रकार की घटनाओं पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो यह भविष्य में सामाजिक सौहार्द एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।ज्ञापन के अवसर पर बड़ी संख्या में विप्र बंधु शामिल हुए।

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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

सर्व ब्राह्मण महासभा गाडरवारा

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