खटारा वाहनों में जानवरों की तरह भरकर हो रहा स्कूली बच्चों का परिवहन, : नौनिहाल बच्चों की जान जोखिम में, क्या किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं, ज़िम्मेदार
Aditi News Team
Mon, Nov 3, 2025
नौनिहाल बच्चों की जान जोखिम में, क्या किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं, ज़िम्मेदार
निजी स्कूलों के खटारा वाहनों में जानवरों की तरह भरकर हो रहा स्कूली बच्चों का परिवहन,
गाडरवारा। शहर के कुछ प्राइवेट स्कूलों की घोर लापरवाही और मनमानी के कारण मासूम छात्र-छात्राओं की जान हर पल जोखिम में है। नियमों को ताक पर रखकर, ये स्कूल प्रबंधन अपने मुनाफे के लिए बच्चों को असुरक्षित और खटारा वाहनों में बच्चों को धोर मवेशियों की तरह भरकर लाना-ले जाना कर रहे हैं। इन घटिया वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसने अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों को सदमे में डाल दिया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शहर के कई निजी स्कूलों के वाहन जिनमें वैन, बसें और अन्य छोटे वाहन शामिल हैं परिवहन विभाग के सुरक्षा मानकों का बिल्कुल भी पालन नहीं कर रहे हैं। इन वाहनों की स्थिति इतनी जर्जर है कि इन्हें देखकर ही इनके कवाड़ खाना बाला (खटारा) होने का अंदाजा लगाया जा सकता है। सबसे बड़ी चिंता का विषय है ओवरलोडिंग (अधिक सवारी)। स्कूल के बच्चे, जिनकी सुरक्षा स्कूल प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, उन्हें क्षमता से कहीं अधिक संख्या में ठूंसा जाता है।
स्कूल प्रबंधन की चल रही तानाशाही
सुबह बच्चों को घर से स्कूल और छुट्टी के समय ये वाहन सड़कों पर तेज गति से दौड़ते हुए साफ देखे जा सकते हैं, जिससे हर पल किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। अभिभावकों का कहना है कि न तो इन वाहनों में स्पीड गवर्नर (गति नियंत्रक) लगा है और न ही अग्नि शमन यंत्र (Fire E&tinguisher) जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन और परिवहन की फीस के रूप में मोटी रकम वसूलने वाले ये प्राइवेट स्कूल बच्चों के परिवहन के लिए सस्ते और असुरक्षित तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद स्कूल प्रबंधन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है, जिससे स्पष्ट है कि उनकी मनमानी चल रही है। एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, हम डर के मारे हम स्वयं बच्चों को स्कूल भेजने लगे हैं। जिस तरह से इन बच्चों को ठूसा जाता है, ऐसा लगता है जैसे स्कूल को बच्चों की सुरक्षा से यादा सिर्फ अपने पैसों की चिंता है।
ओवरलोड और नशा से होती है दुर्घटना
यह बड़ा सवाल है कि अगर इन घटिया और ओवरलोडेड वाहनों से कोई दुर्घटना हो जाती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा क्या स्कूल प्रबंधन अपनी लापरवाही की जिम्मेदारी लेगा क्या परिवहन विभाग इस अनदेखी का जिम्मा लेगा, जो ऐसे वाहनों को सड़क पर चलने की अनुमति दे रखी है स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि प्रशासन, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) को तुरंत इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए। एक विशेष अभियान चलाकर इन सभी प्राइवेट स्कूल वाहनों की फिटनेस, परमिट और बच्चों की सुरक्षा के मानकों की गहन जांच प्रत्येक स्कूल कैंपस में की जाए। और बाहर चलाने वाले व्यक्तियों का भी फिटनेस, पुलिस वेरिफिकेशन, चरित्र प्रमाण पत्र, सहित दस्तावेजो का अवलोकन करें और नशा करने वाले और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूल प्रबंधन और वाहन संचालकों पर सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में बच्चों की जिंदगी को जोखिम में डालने की हिम्मत कोई न कर सके।
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जिम्मेदार अधिकारी ध्यान दें
अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
खटारा वाहनों में जानवरों की तरह भरकर हो रहा स्कूली बच्चों का परिवहन,
निजी स्कूलों की मनमानी