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: चारागाहों पर हो रहे अबैध कब्जे,बेशकीमती कई एकड़ जमीनो पर दबंगो की हो रही खेती,घटता जा रहा पशुपालन जिम्मेदार बेखबर

Aditi News Team

Wed, Aug 13, 2025
रिपोर्टर अनिल जैन  चारागाहों पर हो रहे अबैध कब्जे,बेशकीमती कई एकड़ जमीनो पर दबंगो की हो रही खेती,घटता जा रहा पशुपालन जिम्मेदार बेखबर सड़कों पर बैठने वाले मवेशी गंभीर हादसो का कारण बन रहे हैं कस्बा ही नहीं तहसील जिला व प्रदेश में इस समस्या को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है इन्हें रोकने के लिए कुछ प्रयास भी हो रहे हैं लेकिन समस्या की जो मुख्य जड़ है उसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है जानकारों की माने तो गांव में चरागाहों के लिए छोड़ी गई शासकीय जमीनों पर किए गए अवैध कब्जे इस समस्या की मुख्य जड़ है सिहोरा तहसील में ऐसा कोई गांव नहीं है जहां हरी घास और चरोखर की भूमि की पर अवैध कब्जा न हो आंकड़ों पर गौर करें तो तहसील में चार हजार हेक्टेयर भूमि चारागाह के लिए राजस्व रिकार्ड मे आरक्षित है इसमें से करीब पचास फीसदी भूमि पर अवैध कब्जे हो चुके हैं इन पर दबंगो की फसले लहलिहा रही हैं कब्जाधारी इतने दबंग है की गांव के लोग उनके खिलाफ आवाज उठाने का साहस नहीं कर पा रहे हैं जहां पर शिकायतें भी हुई तो वह तहसील कार्यालय में शिकायत दफन कर दी गई राजनीतिक हस्तक्षेप या मिली भगत के कारण उन पर आज तक कोई तगडी कार्यवाही नहीं हो पाई सिर्फ नोटिस देकर इतिश्री कर ली जाती है तो आखिर कहां जाएं मवेशी हमारा देश किसानों का देश कहा जाता है किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ कहा जाता किसानों का पशुपालन आमदनी का स्त्रोत माना जाता है पशुपालन से जुडे किसान रामदयाल दुबे का कहना है की अब हालत यह है की चारागाह हो या बगीचों की जमीन पर अवैध कब्जों के कारण मवेशियों के चरने व घूमने फिरने के लिए कोई जमीन नहीं बची पशुपालन से बना रहे दूरी किसान अब चारागाह की जमीन पर अबैध कब्जा के चलते कई गांव में तो लोगों ने मवेशी पालना तक बंद कर दिए हैं पशुपालक ब्रजकिशोर यादव की मानें तो कारण यह भी है की मवेशी के लिए चरोखर भूमि नहीं होने से मवेशी सड़कों पर चले जाते हैं हादसों में कई मवेशियों की मौत भी हो जाती है इससे दुखी ग्रामीण अब पशुपालन को छोड़ना ही बेहतर विकल्प मान रहे हैं।शिकायत नजर अंदाज,चारागाहों पर अबैध कब्जा को लेकर अधिकारियों के सामने शिकायत तो आई पर प्रभावी एक्शन न होने से हालात ज्यों के त्यों है प्राप्त जानकारी के जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील मे करीब 160 गांव हैं इनमें से ज्यादा गांव में हरी घास और चरोखर की भूमि पर प्रभावशाली लोगों ने कब्जी कर रखा है सिहोरा तहसील के अंतर्गत जुनवानी घाट सिमरिया बेला कछपुरा जुझारी सिलुवा रानीताल झांसी देवनगर बंधा मानगांव झांझा हिरदेनगर टिकरिया खजुरी भदम घुटना मे दबंगों द्वारा कब्जा किए जाने की शिकायत दर्ज कराई गई है शिकायत पर पटवारियो द्वारा इसका प्रतिवेदन भी सबंधित न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता है बताया जाता है पर प्रभावी कार्ययोजना के अभाव मे अबैध कब्जा की बढोतरी लगातार हो रही है झांझा गांव के श्याम सिंह चौहान ने बताया की उक्त भूमि मवेशियों के लिए राजस्व अभिलेख मे चारागाह के रूप में दर्ज थी जो अब मौके पर भू माफियाओं के कब्जे मे है कुछ गांव में तो दबंगों ने शमशान घाट की जमीनों तक में कब्जा कर लिया है इन पर फसल ऊगा रहे हैं अनेक मामलो की शिकायत ग्रामीणों ने प्रशासन सी की है लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई तहसील की 60 ग्राम पंचायतो के अंतर्गत आने वाले अधिकांश गांव में कब्जाई गई चारनोई भूमि कही सड़क किनारे है या प्राइम लोकेशन पर है। गौशालाओं पर खर्च की बजाय चरागाहों को करें मुक्त जनसेवा समिति के पदाधिकारियों का कहना है की सरकार गौ पालन और उनके संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए गौशालाएं खुलवा रही है लेकिन इससे भी सरकार का उद्देश्य सार्थक नहीं हो पा रहा है गांवो में लगातार गौ पालन घट रहा है प्रबुद्ध जनों का मानना है की गौशालाओं पर राशि खर्च करने की बजाय गांव में आरक्षित चारागाहों की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाना चाहिए । इससे एक तरफ जमीन,बचेगी तो दूसरी ओर गौ पालन,के प्रोत्साहन से गांव में रोजगार भी बढ़ेगा।

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