: गाडरवारा में "पोला पर्व" पर बच्चों ने चलाया घुल्ला
क्षेत्र के "पोला पर्व" पर आज भी बच्चे चलाते हैं घुल्ला, बुन्देलखण्ड के महत्वपूर्ण त्यौहार जिसमें पूर्व में खेती के महत्वपूर्ण अंग रहे बैल और घोडे की पूजन की जाती है तथा दूसरे दिवस उन्हें चलाने का प्रचलन हैं बच्चे आज भी लकडी और पीतल के घोडों के साथ प्रातः नगर के मार्गों पर चलाते नजर आये बहुत से बालक /बालिका नगर की कृषि उपज मंडी प्रांगण में प्रतिवर्ष घुल्ला चलाने आते हैं जब वह आते है उनकी खुशी का ढिकाना नहीं रहता कुछ बच्चों से पूछा तो उन्होनें बताया हम गतवर्ष भी आये थे तथा साथियों के साथ घुल्ला चलाना और खुरमा बतिये खाना बहुत अच्छा लगता है, रविवार होने के कारण बडी संख्या में बच्चे मार्गों पर दिखे, यह सुखद है कि हमारे नगर में प्रत्येक त्यौहार को बडे उत्साह के साथ मनाया जाता है जवकि अब बडे शहर इन पारम्परिक त्यौहारों को भूलते जा रहे हैं।
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