: रेपुरा वन परिक्षेत्र की घूटेही बीट में वृक्षारोपण के नाम पर भ्रष्टाचार का खुलासा
रेपुरा वन परिक्षेत्र की घूटेही बीट में वृक्षारोपण के नाम पर भ्रष्टाचार का खुलासा
रिपोर्टर कविता पांडे
पन्ना /रेपुरा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाली घुटेही बीट में वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, इस क्षेत्र में वृक्षारोपण के लिए नियुक्त नाबालिग मजदूरों से काम करवाया जा रहा है और उन्हें निर्धारित मजदूरी से कम भुगतान किया जा रहा है। यह मामला न केवल बाल श्रम के उल्लंघन को उजागर करता है, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है।
स्थानीय ग्रामीणों और मजदूरों के अनुसार, घुटेही बीट में वृक्षारोपण के लिए वीट गार्ड द्वारा ठेके पर काम करवाया जा रहा है। इस दौरान 14 से 17 वर्ष की आयु के नाबालिग बच्चे को पौधरोपण, खाद डालने और अन्य श्रमसाध्य कार्यों में लगाया गया है। नाबालिग मजदूरों ने बताया कि उन्हें प्रतिदिन 8-10 घंटे काम करने के बावजूद न्यूनतम मजदूरी से भी कम, यानी दो रुपये 50पैसे प्रति पौधा ही दिए जा रहे हैं, जबकि सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी इससे कहीं अधिक है।
एक स्थानीय कार्यकर्ता, ने बताया, "नाबालिगों से काम करवाना गैरकानूनी है, लेकिन बीट गार्ड और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह खुलेआम हो रहा है। मजदूरी का बड़ा हिस्सा बीच में ही गायब हो जाता है, और इसका फायदा कुछ लोग उठा रहे हैं।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वृक्षारोपण के लिए आवंटित पौधों की संख्या और उनकी देखभाल के लिए दी गई राशि में भी हेराफेरी की जा रही है। कई पौधे लगाए ही नहीं गए, और जो लगाए गए, उनकी देखभाल नहीं हो रही, जिससे अधिकांश पौधे सूख रहे हैं।
स्थानीय ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस तरह की अनियमितताएं लंबे समय से चल रही हैं। "ऊपरी स्तर पर कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के कारण यह सब संभव हो रहा है। ठेकेदारों को बचाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं होती," उन्होंने कहा।
यह मामला तब और गंभीर हो जाता है, जब राष्ट्रीय वन नीति, 1988 के अनुसार देश के 33% भौगोलिक क्षेत्र को वन आवरण के अंतर्गत लाने का लक्ष्य रखा गया है। घुटेही बीट जैसे क्षेत्रों में वृक्षारोपण के नाम पर हो रहा यह भ्रष्टाचार न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक शोषण को भी बढ़ावा दे रहा है।
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने इस मामले की जांच की मांग की है। एक गैर-सरकारी संगठन के प्रतिनिधि ने कहा, "हम इस मामले को बाल श्रम निषेध अधिनियम और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत उच्च अधिकारियों तक ले जाएंगे।"
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से इस संबंध में संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इस मामले में आगे की जांच और कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है। जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इस तरह की अनियमितताओं पर रोक नहीं लगी, तो वृक्षारोपण जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम अपनी विश्वसनीयता खो देंगे।
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