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: डॉक्टर पर गलत इलाज़ के गंभीर आरोप के बाद भी स्वास्थ्य विभाग मौन , लिलवानी निवासी ग्रामीण ने कलेक्टर की जनसुनवाई में लगातार दो बार निष्पक्ष जांच की लगाई गुहार गरीब की आवाज कब सुनोगे श्रीमान,

Aditi News Team

Sun, Sep 7, 2025
रिपोर्टर रजनीश कुमार कौरव  डॉक्टर पर गलत इलाज़ के गंभीर आरोप के बाद भी स्वास्थ्य विभाग मौन , लिलवानी निवासी ग्रामीण ने कलेक्टर की जनसुनवाई में लगातार दो बार निष्पक्ष जांच की लगाई गुहार https://youtu.be/eKB-U3JOCoI?si=YD7WcHA4a6hxmo_z गरीब की आवाज कब सुनोगे श्रीमान, गाडरवारा । ग्राम लिलवानी निवासी सतेन्द्र कुमार पिता किशोर कुमार मिश्रा ने बीते 15 दिनों में 2 बार मंगलवार को कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत दी है। जिसमें चिकित्सक द्वारा उनकी मां के गलत इलाज का आरोप लगाते हुए मृत्यु होना बताया है। आवेदन में सतेंद्र मिश्रा ने बताया है कि उनकी मां प्रभा बाई मिश्रा की तबीयत 12 जुलाई 2025 को खराब हुई थी। जिन्हे डॉ. पंकज थारवानी की निजी-क्लीनिक में इलाज के लिए ले गया था। वहां पर कुछ खून की जांच की गई थी जिसमें ईसीआर 65 पाई गई थी। उसके उपरांत लगातार 3 दिनों तक 6 वॉटल, 6 इंजेक्शन और अन्य तेज पावर की दवाइयां दी गईं। इसके बाद 15 जुलाई 2025 को दोबारा डॉक्टर को दिखाया गया, तो उन्होंने कहा कि इनका ईसीआर बढ़ा हुआ है 3 दिन में जो 65 से 125 है इन्हें बाहर ले जाओ। डॉक्टर ठारवानी द्वारा प्रारंभिक दिन से शुगर की जांच नहीं की गई। इसके बाद जबलपुर में इलाज कराया जहां पर शुगर 449 निकली। शुगर बढ़ने और इंजेक्शन और दवाइयों के तेज डोज की वजह से किडनी में इंफेक्शन हो गया था। डॉ. ठारवानी द्वारा लापरवाहीपूर्वक इलाज, शुगर की जांच ना करना और 6 वॉटल एन एस की मरीज को लगाना जिससे शुगर की मात्रा अत्याधिक बढ़ गई। जिसके कारण मरीज की किडनी में इंफेक्शन हो गया व मरीज की मृत्यु हो गई। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि डॉ. ठारवानी जो शासकीय अस्पताल गाडरवारा में पदस्थ है और सरकारी अस्पताल के पास ही सरकारी संपत्ति को तोड़कर अधिक मुनाफा उठाने के लिए अस्थाई निजी अस्पताल संचालन कर रहे हैं। ऐसे डॉक्टर के खिलाफ लापरवाहीपूर्वक ईलाज करने की निष्पक्ष जांच कर एफ आई आर दर्ज की जाए। 15 दिनों में दो बार जिले की मुखिया कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत होने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नरसिंहपुर मनीष मिश्रा का कहना है कि जांच दल का गठन किया गया है जांच कराई जाएगी जिससे स्पष्ट है कि स्वास्थ विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और डाक्टर पर अपना संरक्षण प्रदान कर रहे हैं।

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