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: श्री पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर खितौला में दसलक्षण पर्व का पाँचवाँ दिन “उत्तम सत्य” धर्म को समर्पित

Aditi News Team

Tue, Sep 2, 2025
श्री पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर खितौला में दसलक्षण पर्व का पाँचवाँ दिन “उत्तम सत्य” धर्म को समर्पित सिहोरा। श्री पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, खितौला में चल रहे दसलक्षण महापर्व के अंतर्गत प्रतिदिन विविध धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। इस पावन अवसर पर जबलपुर से पधारे भैयाजी राजेश भैयाजी गढ़ा वाले का सानिध्य पूरे नगर के लिए सौभाग्य का विषय बना हुआ है।आज पर्व का पाँचवाँ दिन “उत्तम सत्य धर्म” के रूप में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। प्रातःकालीन आराधना में भगवान पारसनाथ का मंगल अभिषेक, शांतिधारा और पूजा-अर्चना की गई। उसके पश्चात् भैयाजी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए अपने प्रवचन में कहा कि –“सत्य का पालन ही धर्म का वास्तविक आधार है। सत्य बोलने, सत्य सोचने और सत्य आचरण करने से आत्मा शुद्ध होती है। असत्य वचन व्यक्ति को मोह और बंधन में उलझाता है, जबकि सत्य मार्ग आत्मा को मोक्ष की ओर ले जाता है। इसीलिए आचरण में सत्य का विशेष महत्व है।”उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर जाकर पूजन-अर्चना करना ही धर्म नहीं है, बल्कि “मंदिर जाने का विचार मात्र भी अनगिनत उपवासों का फल प्रदान करता है।” इस प्रेरक संदेश ने सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्ममंथन और आत्मसुधार के लिए प्रेरित किया।सायंकालीन सत्र में जिनवाणी प्रवचन का आयोजन हुआ, जिसमें सत्य धर्म के विविध आयामों पर चर्चा की गई। प्रवचन के उपरांत प्रश्न मंच आयोजित हुआ, जिसमें पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के लिए अलग-अलग प्रश्न रखे गए। सही उत्तर देने वालों को स्मृति-चिह्न और उपहार देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पूरे वातावरण में उत्साह और उमंग का संचार हो गया।कार्यक्रम के समापन पर नवयुवक मंडल खितौला द्वारा संगीतमय भक्ति भाव से ओतप्रोत आरती की शानदार प्रस्तुति दी गई। भक्ति संगीत की लहरों ने वातावरण को और अधिक पावन एवं भावपूर्ण बना दिया।श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से लेकर देर रात तक मंदिर परिसर में उमड़ती रही। महिलाएँ, पुरुष, युवा और बच्चे सभी ने अपने-अपने ढंग से धर्मलाभ प्राप्त किया। मंदिर प्रांगण में जगह-जगह सजावट और दीप प्रज्वलन से वातावरण और भी मनमोहक बन गया।मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि कल पर्व का छठा दिन “उत्तम संयम धर्म” के रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर पर विशेष प्रवचन, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।

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