: "सबसे बड़ा मन्दिर गोशाला है- स्वामी गोपालानंद सरस्वती, संरक्षक गोपाल परिवार संघ
"सबसे बड़ा मन्दिर गोशाला है*- स्वामी गोपालानंद सरस्वती, संरक्षक गोपाल परिवार संघ
पिपलिया कुलमी (राजगढ़)/05 सितंबर, राजगढ़ जिले की माचलपुर तहसील के पिपल्या कुलमी में स्थित नवीन गायत्री गोशाला के नव निर्मित गोष्ठ के गवार्पण एवं नवीन ग्वाल आवास के लोकार्पण 31 वर्षीय गौ पर्यावरण एवं अध्यात्म चेतना पदयात्रा के प्रणेता व गोपाल परिवार संघ के संरक्षक आचार्य परम पूज्य ग्वाल संत स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती की के करकमलों द्वारा आज भाद्रपद शुक्ला त्रयोदशी.दिनांक.05 सितम्बर 2025 को संपन्न हुआ।
[ गोमाता के गोष्ठ के गवार्पण एवं ग्वाल आवास के लोकार्पण के बाद स्वामी जी ने गो प्रेमियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस चराचर जगत में केवल गायमाता ही है जो जन्मी नहीं बल्कि प्रगट हुई है और भगवती गोमाता देवताओं की भी देवता है यानि हमें एक ही जगह सभी देवताओं के दर्शन करने है तो सबसे बड़ा मन्दिर गोशाला ही है और जिस गांव में गोमाता सुख पूर्वक श्वास लेती है तो उस गांव के सारे पाप उसकी श्वास से समूल नष्ट हो जाते है लेकिन इस कलिकाल में गायमाता को पशु मानकर उसका तिरस्कार करना शुरू कर दिया है, जबकि गाय पशु अथवा कोई प्राणी नहीं बल्कि सनातन का प्राण है अर्थात गायमाता तो अवतारों की भी इष्ट है लेकिन आज उसे घर से बाहर निकालने का महापाप हम जाने अनजाने में कर रहें है जबकि इस महापाप का कोई प्रायश्चित नहीं है लेकिन आजादी के बाद गायमाता बहुत दुःखी है और भारत में प्रतिदिन 80,000 गोमाता कट रही है जो हमारे लिए बड़ी ही शर्मनाक बात है ।
स्वामी जी ने आगे बताया कि अगर गो को सूखी रखना है तो ग्वाले को सुखी रखना होगा और पिपलिया कुलमी के भामाशाहों ने इस गोशाला में ग्वाल आवास बनाकर बहुत ही पुण्य का कार्य किया है ।
पूज्य स्वामीजी ने नवीन गायत्री गोशाला में सहयोग करने वाले सभी भामाशाहों को उपरना पहनाकर आशीर्वाद दिया । गोशाला अध्यक्ष कैलाश पाटीदार ने सपत्नीक ,गोशाला संरक्षक श्याम बाबू जी तेजरा एवं सभी गोशाला समिति के पदाधिकारियों के पूज्य स्वामी जी का चरण पूजन कर आशीर्वाद लिया । पिपलिया कुलमी के ही कथावाचक पंडित सत्यनारायण शास्त्री एवं युवा गो सेवक ओम प्रकाश राठौर का सम्मान किया और कोटा निवासी डॉक्टर दीनदयाल सोनी ने आभार प्रगट किया और कार्यक्रम का संचालन शंभू लाल टेलर ने किया और कार्यक्रम के अंत में पूज्य स्वामीजी ने भामाशाहों के सहयोग से बनने वाली नन्दी शाला का भूमि पूजन किया ।
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