: नरसिंहपुर,गुड़ कोल्हू प्रदूषण के सुव्यवस्थित रूप से संचालन के लिए निर्देश जारी कलेक्टर ने जिले में इन निर्देशों का कठोरता से पालन सुनिश्चित करने के दिये निर्देश
गुड़ कोल्हू प्रदूषण के सुव्यवस्थित रूप से संचालन के लिए निर्देश जारी
कलेक्टर ने जिले में इन निर्देशों का कठोरता से पालन सुनिश्चित करने के दिये निर्देश
नरसिंहपुर। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जबलपुर से प्राप्त गार्डड लाईन आदेश के अनुसार गुड़ कोल्हू प्रदूषण के सुव्यवस्थित रूप से संचालन किए जाने के लिए निर्देश जारी किये गये हैं। इस संबंध में कलेक्टर श्रीमती शीतला पटले ने जिले में इन निर्देशों का कठोरता से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने नरसिंहपुर, गाडरवारा, गोटेगांव व तेंदूखेड़ा के संबंधित अनुविभागीय राजस्व अधिकारियों, सहायक संचालक गन्ना, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर परिषद संबंधित क्षेत्र में संचालित गुड़ भट्टियों को सूचित कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए कहा है। इस आदेश को तत्काल प्रभाव से प्रभावशील किया गया है।
जारी निर्देश के अनुसार गुड़ कोल्हू इकाईयाँ स्वीकृत आवास, स्कूल अस्पतालों और संवेदनशील क्षेत्रों से 0.5 किलोमीटर की दूरी के भीतर स्थापित नहीं की जायेगी। ईधन के रूप केवल सूखी खोई, लकडी और कृषि अवशेष/ अपशिष्ट का उपयोग किया जायेगा। किसी भी स्थित में रबर, प्रयुक्त टायर प्लास्टिक आदि का उपयोग भट्टी में नही किया जायेगा। कोल्हू द्वारा उन्नत/ उर्जा कुशल भट्टी का उपयोग किया जायेगा। भट्टी चिनाई वाली ईटों या दुर्दम्य ईटों से निर्मित होगी। ईटों के स्थान पर मिट्टी के उपयोग से बचा जाना चाहिए। भट्टी का निर्माण इस तरह से किया जाये कि यह मल्टी पैन सुनिश्चित करें (श्रृंखला में एक से अधिक पैन) भट्टी के डिजाइन के आधार पर पैन की संख्या 2 से 5 तक हो सकती है। चूंकि ग्रिप गैस पैन में गर्मी स्थानांतरित करती है, इसका तापमान कम हो जाता है। ग्रिप गैस में शेष गर्मी का उपयोग बाद के पैन में रस को पहले से गर्म करने के लिए किया जाता है। दो मिलियन टन/ दिन से कम उत्पादन क्षमता वाले कोल्हू के पास पैन या मल्टी पैन व्यवस्था अपनाने का विकल्प होता है। अतिरिक्त हवा को नियंत्रित करने के लिए भट्टी के ईंधन फीड होल पर एक फलैप स्थापि किया जायेगा। भट्टी में ईधन को कुशल तरीके से जलाने के लिए फायर ग्रेट का प्रावधान किया जायेगा। उत्पन्न राख को भट्टी के नीचे से एकत्र किया जाये। विशेष पदार्थ को रोकने के लिए स्टैक (चिमनी) की ओर जाने वाले ग्रिप गैस पथ में बैफल्स का प्रावधान किया जाना चाहिए। स्टैक की उंचाई स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित की जाएगी, लेकिन यह 10 मीटर से कम नहीं होगी। बिना ढेर के कोल्हू की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ग्रिप गैस में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) की सीमा स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित की जाएगी लेकिन यह 500 मिलीग्राम/ एनएम 3 से अधिक नहीं होनी चाहिए। कोल्हू से उत्पन्न ठोस अपशिष्ट का पुन: उपयोग या उचित निपटान किया जाएगा। खोई का उपयोग भट्टी में ईधन के रूप में किया जाएगा। तवे और राख से एकत्रित मैल का उपयोग कृषि भूमि में मृदा कंडीशनर के रूप में किया जाए। बर्तनों की धुलाई का निपटान सोकपिट के माध्यम से किया जाए। कोल्हू परिसर में स्वच्छता की स्थिति सुनिश्चित की जाये।
Tags :