: गाडरवारा,981 वे सप्ताह कदम ने किया पोधारोपण
Mon, Oct 21, 2024
981 वे सप्ताह कदम ने किया पोधारोपण।
गाडरवारा।जन्मोत्सव पर पौधारोपण करती आ रही कदम संस्था का साप्ताहिक पौधारोपणअभियान का 981 वें सप्ताह का पौधारोपण शासकीय चिकित्सालय के समक्ष डिवाइडर स्थल पर संपन्न हुआ जिसमें -जयमोहन जी शर्मा ,मनोहरलाल जी आरसे, विशाल सिंह जी ठाकुर, श्रीमति अंजना जी साहू ,कुमारी दुर्गेश साहू, हेमंत श्रीवास्तव,चिरंजीव अर्चित अग्रवाल ,चिरंजीव शरद नीखरा,चिरंजीव शुभम् श्रीवास्तव, चिरंजीव समर्थ सोनी, श्रीमति सुषमा जी साहू के जन्म दिवस पर पौधा रोपित हुआ ।जन्मदिवस पर पौधा रोपित करने वाले सभी को कदम साथियों ने गायत्री मंत्र व महामृत्युन्जय मंत्र के माध्यम से अपनी शुभकामनाएँ दीं । इस अवसर पर कदम साथियों के अलावा नगर के गणमान्य नागरिकों की अभूतपूर्व उपस्थिति रही ।
: गाडरवारा,प्राचार्य संघ की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए
Sun, Oct 20, 2024
प्राचार्य संघ की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए
गाडरवारा। नरसिंहपुर जिले में उच्च माध्यमिक शिक्षक संघ से हाई स्कूल प्राचार्य बने साथियों की बैठक विगत रविवार को सुरभि होटल पैलेस में आयोजित की गई उक्त बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री राव उदयप्रताप सिंह को धन्यवाद ज्ञापित कर जिले में,10और20 वर्षीय समयमान वेतनमान पर विस्तृत चर्चा की गई एवं जिन साथियों के प्रस्ताव में किसी प्रकार की कोई आपत्ति नहीं है उन्हें शीघ्र संभागीय कार्यालय भिजवाने हेतु जिला शिक्षा अधिकारी महोदय से निवेदन करने का प्रस्ताव पारित किया गया। हाई स्कूल प्राचार्य से हायर सेकेंडरी प्राचार्य पद पर पदोन्नति हेतु नवीन केडर को शामिल करने हेतु लोक शिक्षण संचालनालय को ज्ञापन देने पर भी सहमति बनी ।आईएफएमएस पोर्टल पर नियुक्ति दिनांक में सुधार हेतु आयुक्त कोष लेखा के पत्र अनुसार संकुल प्राचार्य डीडीओ को आवेदन दिया जाए जिसमें डॉक्यूमेंट सहित प्रकरण विकास खंड शिक्षा अधिकारी को भिजवाने हेतु सभी सदस्यों ने आग्रह किया। विभाग ने पोर्टल पर प्राचार्य पद चेंज करके उच्च माध्यमिक शिक्षक कर दिया है जबकि हाई स्कूल प्राचार्य न्यू केडर होना चाहिए इस संबंध में ज्ञापन तैयार कर आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल भेजने पर भी सर्व सहमति से प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक में मुख्य रूप से शैलेन्द्र बक्शी,संजय सोनी,सुशील शर्मा,सतीश नाईक,चंद्रकांत विश्वकर्मा,अनुराग दुबे,गोविन्द बड़कुल,विनय शंकर शर्मा, मिलन जारोलिया,कमल सिंह सतारे,वीरेन्द्र सिंह राजपूत,शमीम कुरैशी,संजय शर्मा,मनीष जैन इकबाल कुरैशी,राजेश राजपूत,राजेश गुप्ता औरश्रीमती कल्पना पटेल आदि प्राचार्य उपस्थित थे।
: करवा चौथ बनाम सुखी गृहस्थी(सुशील शर्मा)
Sun, Oct 20, 2024
करवा चौथ बनाम सुखी गृहस्थी(सुशील शर्मा)
दाम्पत्य के रिश्ते चन्द्रमा के चाहने से चलते हैं या उन्हें चाहिए विश्वास और स्नेह की कसौटी। खट्टी मीठी यादों ,बहसों एवं लड़ाइयों से सजे रिश्ते महज करवा चौथ के व्रत से सँवर जायें ये मुमकिन नहीं है। शादी के बाद जिंदगी की असली कहानी शुरू होती है ,पहले कुछ वर्ष सपनों से बीत जाने के बाद गृहस्थी का मजा शुरू होता है ,जिसमे बहस ,लड़ाई ,रूठना मनाना ,अपने अपने अहंकारों के खोलो से बाहर आते हुए व्यक्तित्व,बच्चों का लालन पालन ,गृहस्थी का सफल संचालन इन्ही सूत्रों को पिरो कर माला का रूप धारण करता है। पति पत्नी का रिश्ता वन वे ट्रैफिक रोड है। यहाँ से दूसरे रास्ते पर जाने की कोई गुंजाइश नहीं बचती है। उसी रास्ते पर या तो समन्वय से सरपट गाड़ी दौड़ाओ या अहंकारों के स्पीड ब्रेकर लगाकर अटक अटक कर चलो।घर मात्र ईंट-पत्थरों से बना हुआ मकान नहीं होता, बल्कि घर वह होता है जिसे पति पत्नी मिलकर बनाते हैं। यदि लोग प्रेम, समर्पण, ईमानदारी और निष्ठा से रहें, तो उन्हें स्वर्ग का आनंद और सुख अपने घर में ही मिलेगा। रिश्तों में असहमति या मत भिन्नता जरूरी है। दो व्यक्तित्व कभी एक जैसी सोच नहीं रख सकते लेकिन "सिर्फ मेरी ही सुनी जाये" से या तो टकराव की स्थिति बनेगी या फिर दास गुलामी प्रथा का अनुसरण होगा। कही गई बातों को गलत सन्दर्भों में पकड़ने से ग़लतफ़हमी उत्पन्न होती हैं जो परस्थितियों को गंभीर बनातीं हैं एवं इसका एकमात्र उपाय ठन्डे दिमाग से बातचीत कर गलतफहमियों को दूर करना है।गृहस्थी में आपसी विश्वास से ही तालमेल बनता है। पति से गलती हो तो पत्नी संभाल ले और पत्नी से कोई त्रुटि हो जाए तो पति उसे नज़रअंदाज़ कर दे। यही सुखी गृहस्थी का मूल मंत्र है।जब परिवार में एकता होगी तो मतभेद नहीं होंगे, मतभेद नहीं होंगे तो प्रेम होगा, प्रेम होगा तो सुख होगा, सुख होगा तो शांति होगी यही सुखी जीवन का आधार बनेगा। संयम,संतुष्टि,संकल्प,सामर्थ्य,संवेदनशीलता और संतान सुखी दाम्पत्य जीवन के सूत्र हैं। जिआवन पथ पर दो सहचरों का संकल्पबद्ध होकर धर्म और नीति को साथ ले चलना ही दाम्पत्य जीवन का शुद्ध लक्ष्य होता है। गृहस्थी की धुरी परिवार का बजट होता है। अगर धुरी गड़बड़ाई तो गाड़ी का डोलना स्वाभाविक है। जिंदगी में शौक उतने ही पालो जितना आपका बजट हो दूसरों के शौक को अगर आपने अपने शौक बनाये तो "आमदनी अट्ठनी खर्च पाँच रुपैया" की नौबत आने पर गृहस्थी की नाव प्यार के वावजूद डूबना स्वाभाविक है। बजट के आलावा पड़ोसियों से सम्बन्ध ,रिश्तेदारों से रिश्ते ,सामाजिक सरोकारों का निर्वहन, नैसर्गिक एवं नागरिक कर्तव्यों का पालन इन सब का अपनी गृहस्थी में संतुलित समावेश सुखी जीवन की कुंजी बन जाती है। समन्वित हितों को प्राथमिकता ,दूसरे की रुचियों को अपने जीवन में जगह देना ,व्यक्तिगत स्वार्थ को परिवार के हितों में बदलना कठिन क्षणों में एक दूसरे को जोड़े रखता है।मतभेद होना वैवाहिक जीवन में सामान्य बात है किन्तु बुद्धिमत्ता इसी में है कि अपनी बात को इस ढंग से प्रस्तुत किया जाये कि दूसरे को ठेस भी न पहुंचे और आपकी बात भी रह जाये। दिन का झगड़ा रात को शयन कक्ष में सुलझ जाये तो तनाव और कटुता वहीं समाप्त हो जाते हैं।समाज में इतनी उच्छृंखलता, मनमुखता एवं पशुता का खुला प्रचार होते हुए भी दुनिया के 250 देशों का सर्वेक्षण करने वालों ने पाया कि हिन्दुस्तान का दाम्पत्य जीवन सर्वश्रेष्ठ एवं संतुष्ट जीवन है । यह भारतीय संस्कृति के दिव्य ज्ञान एवं ऋषि-मुनियों के पवित्र मनोविज्ञान का प्रभाव है । बच्चों की शिक्षा एवं संस्कार सर्वोपरि हैं। बच्चों की शिक्षा संस्कारित तरीके से हो इसके लिए त्याग और समर्पण जरूरी है वर्ना दहन और सम्मान दोनों का कोई मतलब नहीं बचता है।जिस घर में हंसी-खुशी और उल्लास होता है, वहां पर बच्चों के जीवन का पूर्ण विकास होता है। इस करवा चौथ को अपनी गृहस्थी सँभालने के संकल्प लें। अंत में एक दूसरे का विश्वास ,प्रोत्साहन ओर छोटे छोटे त्याग और समर्पण मन में साहस एवं उत्साह भर देतें हैं।