: 6वीं बटालियन वि.स. बल द्वारा रांझी क्षेत्र में निकाली गई विशाल जन-जागरूकता पैदल रैली’
Tue, Jul 29, 2025
6वीं बटालियन वि.स. बल द्वारा रांझी क्षेत्र में निकाली गई विशाल जन-जागरूकता पैदल रैली’
मध्यप्रदेश शासन माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं पुलिस महानिदेशक मध्य प्रदेश श्री कैलाश मकवाना (भा.पु.से.) के निर्देशानुसार सम्पूर्ण प्रदेश में 15 जुलाई से 30 जुलाई 2025 तक ’’नशे से दूरी, है जरूरी’’ शीर्षक से नशा मुक्ति जनजागरण अभियान का आयोजन किया जा रहा है।
इसी क्रम में 6वीं वाहिनी विसबल, जबलपुर द्वारा आज दिनंाक 29-07-2025 को रांझी में नशा मुक्ति अभियान के तहत 6वीं बटालियन कमांडेंट श्री सिद्धार्थ चौधरी (भा.पु.से.) के नेतृत्व में एक विशाल जन-जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। रैली में पोस्टर, पंपलेट के माध्यम से आमजन को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया गया तथा ➡ ’’नशे से दूरी है जरूरी’’ ➡ ’’हमारा है यही संदेश, नशा मुक्त हो मध्यप्रदेश’’ जैसे नारों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाई गई।
रैली बटालियन परेड ग्राउंड से प्रारंभ होकर रांझी व्हीकल मोड़, दर्शन तिराहा होते हुए पुनः परेड ग्राउंड पर समाप्त हुई।’’नशे से दूरी है जरूरी’’ जागरूकता रैली में डिप्टी कमांडेंट श्री अभिषेक राजन, श्री लामू सिंह श्याम, असिस्टेंट कमांडेंट श्री एम. पी. सिंह, श्रीमती मेहंती मरावी, श्री विजय कुमार अंभोरे, एड्ज्युटेंट श्री सुबोध लोखंडे, निरीक्षक श्री विजय मेहरा, श्री स्वरूप सिंह उईके, श्री सुनील सिंह, श्री धन्नू सिंह, सामग्री अध्यक्ष श्री हितेश फुलझेले, सुबेदार मेजर श्री बिलर सिंह जमरा, पीटीएस में प्रशिक्षणरत नव आरक्षक, पीटीएस स्टाफ एवं अनुसचिवीय बल सहित 405 अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।
: इस कलिकाल में भगवत प्राप्ति का मूल साधन गोसेवा ही है साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती
Tue, Jul 29, 2025
इस कलिकाल में भगवत प्राप्ति का मूल साधन गोसेवा ही है साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती
सुसनेर। जनपद में मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं विश्व के लोक प्रसिद्ध गो सेवा संस्थान श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के संस्थापक एवं संरक्षक परम श्रद्धेय गो ऋषि पूज्य स्वामी दत्तशरणानन्द जी महाराज के पावन सानिध्य में संचालित विश्व के प्रथम गो अभयारण्य श्री कामधेनु गो अभयारण्य साल रिया में हरियाली अमावस्या के पुण्य पर्व पर 31 वर्षीय गो पर्यावरण एवं अध्यात्म चेतना पदयात्रा के प्रणेता ग्वाल सन्त पूज्य स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज की कृपापात्र साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती जी ने गो कृपा कथा में संबोधित करते हुए बताया कि भगवती गोमाता जहां विराजती है अगर वहां सत्संग किया जाएं तो उसका कई लाख गुना फल है और जिस व्यक्ति की परमात्मा पर कृपा हो उसे ही गोशाला में सत्संग का लाभ मिलता है और आज हम सभी को परमात्मा की कृपा से ही श्रीलाल सिंह जी पूर्व गोशाला अध्यक्ष एवं न्यासी श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के माध्यम से आज हमें यह सुअवसर मिला हैं।साध्वी जी ने आगे बताया कि आज हरियाली अमावस्या है और आज का दिन प्रकृति एवं भगवान शंकर का दिन है और श्रावण मास में भारत के सभी 12 ज्योतिर्लिंग सहित सम्पूर्ण शिवालयों में भगवान शंकर एवं उनके पाषाण के नन्दी की पूजा करके उनसे अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की मांग कर रहें है लेकिन भगवान शंकर ने जिनकी पूजा की है जिनके बिना वे एक भी फल नहीं रह सकते और उनके दर्शन में बाधा बने स्वयं काल को भी अपने तीसरे नेत्र से भस्म कर दिया है हो ऐसे सजीव नन्दी बाबा आज दर दर की टोकरे खा रहें है और मानव उस पत्थर के नन्दी को पूजने के लिए घंटों घंटों तक कतार में खड़ा रहकर उनकी पूजा के लिए दौड़धुप कर रहा है ।साध्वीजी ने बताया कि 84 लाख में सबसे श्रेष्ठ योनि मनुष्य योनि है और मनुष्य बनने का मुख्य उद्देश्य भगवत प्राप्ति है और भगवान को पाने के लिए सहनशीलता,,धैर्य एवं समर्पण ये तीन चीजें मनुष्य में न हो तब तक परमात्मा नही मिल सकते और ये सब भगवती गोमाता के सानिध्य में ही मिल सकता है अर्थात इस कलिकाल में भगवत प्राप्ति का एक ही मूल साधन है वह है गो सेवा। यानि इस कलिकाल में अगर भगवान को ढूंढना है तो गोशाला में ढूंढिए अर्थात बिना गौसेवा के जो भक्ति करता है वह भक्ति मृतप्राय: हैं। लेकिन आजकल लोग गायमाता को केवल पशु समझकर उसे दर दर की ठोकरें खाने को छोड़ दिया है,जबकि गोमाता कभी दुःखी नहीं होती बल्कि वह तो मनुष्य को भवसागर से तारने के लिए लीला करती है ताकि मनुष्य उसकी करुणा देखकर उसकी सेवा में जुट जाएं ।मासिक सत्संग के अन्त में श्री लाल सिंह जी सालरिया के परिवार के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उज्जैन विभाग के विभाग प्रचारक हीरेंद्र सिंह जी,आगर जिला प्रचारक राकेश जी मराठा सहित संघ के जिला पदाधिकारियों ने भगवती गोमाता जी का पूजन एवं आरती की एवं श्री कामधेनु गो अभयारण्य के प्रबंध न्यासी डॉक्टर विक्रम सिंह जी ने विभाग प्रचारक हीरेंद्र सिंह जी एवं जिला प्रचारक राकेश जी मराठा का उपरना पहनाकर एवं भगवती गोमाता की छवि देकर बहुमान किया और आज के यजमान लाल सिंह जी भादवा अमावस्या के यजमान भगवान सिंह जी मोखमपुरा ने पूज्य साध्वी दीदी से आशीर्वाद लिया और अन्त में हजारों गो भक्तों ने गोव्रती महाप्रसादी ग्रहण की ।
: नाग धरती के प्रहरी (नागपंचमी पर कविता)
Tue, Jul 29, 2025
नाग धरती के प्रहरी
(नागपंचमी पर कविता)
धरती के गहरे गर्भ में,जड़ों की उलझी भूलभुलैया में,शिला की दरारों औरझाड़ियों की नमी भरी छाँव मेंबसते हैं नागअनगिनत आकारों, रंगों, और स्वभावों वाले। वे न तो केवल भय हैंन ही केवल पूजा का प्रतीक,वे हैं पृथ्वी की उसपुरानी कथा के पात्रजो सृष्टि के संतुलन कोचुपचाप थामे हुए हैं। उनकी आँखों में चमकता हैसमय का अनंत प्रवाह,पलकों के बिना भीवे देख लेते हैंवह सबजो हम अपनी खुली आँखोंसे नहीं देख पाते। वे रेंगते हैं मौन,पर हर कदमधरती को नई धुन देता है।उनकी जीभ,दो फाँकों में बंटीमानो दो दिशाओं का मार्गदर्शन,सूँघने और परखने की अद्भुत शक्ति। नागधरती के चिकित्सक भी हैंचूहों की अंधाधुंध बढ़ती भीड़उनके बिना खेतों को उजाड़ देती।मेंढकों और छिपकलियों का संतुलन,कीड़ों का रहस्य,सब उनकी उपस्थिति सेसुरक्षित है। वे कभी-कभीमानव की बस्तियों के किनारेआ जाते हैं,न भय फैलाने,न हिंसा करने,बस क्योंकिधरती पर उनका घरहमने छीन लिया है। उनकी देह पर खिंची हुईतराशी हुई काष्ठ जैसी शल्कें,धूप में चमकती हैंमानो किसी प्राचीन योद्धा का कवच।उनके रंगहरीतिमा, धूसर, नीली आभा,कभी ज़हरीली चेतावनी,कभी छिप जाने का छलावरण। विष उनकी रक्षा है,न आक्रमण की प्रवृत्ति।वो काटते नहीं,जब तक उन्हेंमृत्यु का भय न छू ले।फिर भी,हम उन्हेंडर और अंधविश्वास कीपरिधि में बाँध देते हैं। नागपंचमी का यह पर्वकेवल दूध चढ़ाने काअनुष्ठान नहीं,यह स्मृति हैकि यह धरतीसिर्फ हमारी नहीं,उनकी भी हैजिन्होंने लाखों वर्षों सेसृष्टि के संतुलन को संभाला है। हम भूल जाते हैंकि जिन नागों की पूजा करते हैं,उन्हें मारते भी हैंउनकी खाल के लिए,उनके भयावह नाम के लिए।हम यह नहीं देखतेकि उनके बिनाखेत उजड़ेंगे,जंगल सूखेंगे,और जैव विविधताअपना स्वर खो देगी। धरती का हर नागएक कहानी हैप्रकृति की,जीवन की रक्षा की,संतुलन की।उसकी जीभ का कंपनहवा में लिखता हैएक अदृश्य श्लोक"हम भी तुम्हारे साथइस संसार में हैं।" आज नागपंचमी परसिर्फ दूध नहीं,बल्कि एक संकल्प लेना हैकि उनके घर नहीं उजाड़ेंगेउनकी देह का सौदा नहीं करेंगे,और उनके रहस्यमय जीवनको डर नहीं,सम्मान देंगे। क्योंकि नागसिर्फ लोककथाओं के पात्र नहीं,वे इस धरती केअनसुने प्रहरी हैंजो मौन रहकर भीजीवन की रक्षा करते हैं।
सुशील शर्मा