: भगवान के गर्भकल्याण के अवसर पर मुनिश्री ने कहा ,हम जितने समृद्धशाली हुए एकाकी हो गये
Sat, Apr 12, 2025
रिपोर्टर अनिल जैन
भगवान के गर्भकल्याण के अवसर पर मुनिश्री ने कहा ,
हम जितने समृद्धशाली हुए एकाकी हो गये
बहोरिवंद फलों से लदा हुआ वृक्ष झुक जाता है पत्थर लगने पर भी फल ही देता है चोट की पीड़ा भी आनंद का कारण बनता है हम जितना समृद्ध साली हुए हमारा जीवन एकाकी हो गया समाज से पृथक हो गया संवेदनाहीन हो गया यह प्रवृत्ति आत्म हनन ही है हमें पकृति ने जो दिया है बांटना सीखें झुकना सीखें हम प्रकृति का आदर विनय - समपन्नता का प्रयास करे तुम्हारे लिए मोक्ष का द्वार खोल देगा विनय को मोक्ष का द्वार कहा गया है परमात्मा प्रभु का अतिशय पुण्य तो देखो 6 महीने पूर्व धरा पर खुशहाली वातावरण निर्मित हो जाता है उनके पुण्य की बरगनाएं सभी के चित्त में प्रसन्नता का प्रकाश भर देती हैं भगवान गर्भ में आए हैं गर्व कल्याणक की खुशी 6 महीने से रत्न वर्षा हो रही है एक पुण्य आत्मा का अवतरण होगा मां की गोद भराई हो रही है जगत के लोग उत्साह मना रहे हैं भगवान पृथ्वी पर आकर जीवन को सुख समृद्धि और आत्म कल्याण का उपदेश वचन एवं अपने क्रिया आचरण से प्रकट करेंगे उक्ताशय के सारगर्भित उद्गार बहोरीबंद मे चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सवके अवसर पर मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज एवं मुनि श्री प्रसाद सागर जी महाराज द्वारा प्रातः कालीन धर्म सभा में व्यक्त किया गर्व कल्याणक के अवसर पर वाल कम्हचारी प्रदीप भैया के निर्देशन मे प्रातः श्रीजी का अभिषेक शांति धारा याज्ञ मंडल विधान के अर्घ आहार चर्या दोपहर में माता मरु देवी की गोद भराई का कार्यक्रम संपन्न किया गया इस अवसर पर अष्ट कुमारियों ने सेवा सुष्तता पूर्वक मां मरू देवी की गोद भराई की क्रिया रस्म पूरी कराई जिसमें सभी पंचकल्याणक में शामिल पात्रों एवं जन समुदाय को इस प्रसंग को देखने का अवसर मिला एवं तीर्थंकर भगवान के अवतरण की रस्म क्रिया को देखकर सभी ने अनुमोदन की।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्रीमंत सेठ उत्तमचंद जैन कोयला अनुराग जैन प्रमोदजैन काका महेन्द्र जैन शैलेन्द्र जैन मनोज जैन राजेश जैन सत्येन्द्र जैन डा के एल जैन प्रशांत जैन सुरेन्द्र सिंघई अभय कुमार जैन विनय जैन दिनेश जैन डा सुबोध जैन प्रदीप जैन पुष्पेन्द्र मोदी युवामंडल महिला मंडल के सदस्यो की बडी संख्या मे उपस्थिति रही।
: वर्तमान समय में हनुमान जी की प्रासंगिकता (हनुमान जयंती पर विशेष)
Sat, Apr 12, 2025
वर्तमान समय में हनुमान जी की प्रासंगिकता
(हनुमान जयंती पर विशेष)
आज का युग विज्ञान और तकनीक की अभूतपूर्व प्रगति का समय है, परंतु इसके साथ ही यह युग चिंता, भय, असुरक्षा, भटकाव और मानसिक तनाव का भी युग बन गया है। भौतिक उपलब्धियों की भरमार होने के बावजूद मनुष्य का आंतरिक जीवन शून्य होता जा रहा है। ऐसे में हनुमान जी का चरित्र न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि नैतिक, सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन की दिशा में भी अत्यंत प्रासंगिक बन गया है। हनुमान जी शक्ति और भक्ति के अद्वितीय संगम हैं। उनका जीवन बताता है कि केवल बल से नहीं, बल्कि भक्ति, निष्ठा और सेवा से भी असंभव कार्यों को संभव किया जा सकता है। जब आज का मनुष्य स्वार्थ, अहंकार और प्रतिस्पर्धा की दौड़ में थक गया है, तब हनुमान जी की निष्काम सेवा भावना उसे आत्मिक शांति की ओर ले जा सकती है। उन्होंने अपने जीवन में कभी भी अपने बल और सामर्थ्य का घमंड नहीं किया, अपितु उसे राम कार्य में समर्पित किया। यही गुण आज के नेताओं, कर्मियों, और युवाओं में अत्यंत आवश्यक है। हनुमान जी का ब्रह्मचर्य, आत्मसंयम और विचारों की पवित्रता आज के समाज में विशेष आदर्श के रूप में प्रस्तुत होती है। जब युवा पीढ़ी दिशाहीनता और आकर्षणों में उलझी हुई है, तब हनुमान जी की चरित्र-निर्माण की प्रेरणा उन्हें अनुशासन, समर्पण और साधना का मार्ग दिखाती है। वर्तमान समय में “संकटमोचन” के रूप में हनुमान जी की प्रासंगिकता अत्यधिक बढ़ गई है। जब व्यक्ति स्वयं को असहाय महसूस करता है, तब आस्था और श्रद्धा का सहारा ही उसे शक्ति प्रदान करता है। “हनुमान चालीसा” का पाठ मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा देता है। कोरोना महामारी के समय यह स्पष्ट रूप से देखा गया कि लोगों ने भय और अनिश्चितता से निपटने के लिए आध्यात्मिक आश्रय को अपनाया, और हनुमान जी का नाम एक बल के रूप में उभरा। हनुमान जी का चरित्र सामाजिक समरसता और सहयोग का संदेश भी देता है। वे केवल राम के सेवक ही नहीं, बल्कि समस्त मानवता के रक्षक हैं। उनकी विनम्रता, साहस और सेवा भावना हमें बताती है कि किसी भी संगठन या समाज को सुचारु रूप से चलाने के लिए नेतृत्व से अधिक सेवा और समर्पण आवश्यक है। आज जब हमारा समाज धार्मिक उग्रता, मानसिक विभाजन और मूल्यहीनता की चुनौतियों से जूझ रहा है, तब हनुमान जी जैसे आदर्श चरित्रों की ओर लौटना समय की आवश्यकता है। वे हमें यह सिखाते हैं कि धर्म केवल पूजा नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सदाचार, कर्तव्य और सेवा का नाम है। इस प्रकार हनुमान जी न केवल अतीत की एक पौराणिक विभूति हैं, बल्कि वे वर्तमान और भविष्य के लिए भी प्रेरणा, मार्गदर्शन और आश्रय के स्तंभ हैं। उनके आदर्शों को जीवन में अपनाकर हम व्यक्तिगत और सामाजिक रूप से एक सशक्त, संतुलित और समर्पित जीवन जी सकते हैं।सुशील शर्मा
: जय राम वीर(हनुमत वंदना) (मधुभार छंद- सुशील शर्मा)
Sat, Apr 12, 2025
जय राम वीर(हनुमत वंदना)(मधुभार छंद- सुशील शर्मा) जय राम वीर ,हनुमत प्रवीर।रण रंग धीर ,सब हरो पीर। जय रूद्र अंश ,जय पवन वंश।जय शत्रु दंश ,रघुवर प्रसंश। जय राम दूत ,अक्षय प्रसूत।जय रौद्र रूप ,हनुमत अनूप। जय सीय त्राण ,जय राम वाण।जय राम प्राण ,आगम पुराण। जय मुक्ति चित्र ,जय भक्त मित्र।संयम चरित्र ,हे विधि विचित्र। हे सुख सुवास ,श्री राम वास।शुभ भक्ति रास ,हे राम दास। हे सौम्य शील ,साधु सुशील।हे दुष्ट कील ,वाणी रसील। हे सूर्य शिष्य ,पावन भविष्य।हे भजन तिष्य ,राघव रुचिष्य। हे अप्रमेय ,हे सारमेय।अनुपम अगेय ,हनुमत अजेय। हे ज्ञान अग्र ,हे राम व्यग्र।हे सत प्रत्यग्र,स्वस्ति समग्र। हे गुण निधान ,रघुवर प्रधान।सब दुख निदान ,प्रभु राम मान। हे धीर बुद्धि ,हे अष्ट सिद्धि।हे ज्ञान वृद्धि ,पावन प्रसिद्धि। हे मोक्ष द्वार ,हे राम सार।मुक्ति प्रसार ,हे जीव तार। हे करुणा निकुंज ,हरो पाप पुञ्ज।भय ताप भंज ,जय सुख प्रपुंज। राम भक्ति सुखदायनी ,हरे पाप का भार।हनुमत की जब हो कृपा ,मनुज करे भव पार। *श्री हनुमंत लाल के अवतरण दिवस पर आप को अनंत मंगलकामनाएं,श्री हनुमंत लाल आप के सभी शुभ संकल्प पूरे करें।*सुशील शर्मा