: MP बना करप्शन का गढ़, 5000 की रिश्वत लेते BRC , भोपाल लोकायुक्त ने की कार्रवाई
Fri, Apr 18, 2025
MP बना करप्शन का गढ़! 5000 की रिश्वत लेते BRC
भोपाल लोकायुक्त ने की कार्रवाई ,
नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश भ्रष्टाचार का गढ़ बनते जा रहा है. अधिकारी-कर्मचारी बस अपनी जेब गर्म करने में लगे हुए हैं. ताजा मामला नर्मदापुरम से आया है. जहां लोकायुक्त ने BRC (Block Resource Coordinator) को 5000 रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है. यह मामला आदिवासी विकासखंड केसला का है।प्राथमिक शाला सोमूखेड़ा के प्रधान पाठक देवेंद्र पटेल ने भोपाल लोकायुक्त में शिकायत की थी।विकासखंड स्त्रोत समन्वयक के के शर्मा केसला ब्लॉक के हर स्कूल से मध्यान्ह भोजन , बिल्डिंग रेनोवेशन सहित कूलर और पंखे के लिए अवैध राशि की मांग करते थे. जिसके आधार पर प्रधान पाठक ने पांच स्कूलों से राशि एकत्रित कर बी आर सी शर्मा को दी।पैसे मिलने के बाद भी विकासखंड स्त्रोत समन्वयक और स्कूलों से राशि एकत्रित करने की बात कही. जिससे तंग आकर प्रधान पाठक देवेंद्र पटेल ने भोपाल लोकायुक्त से मामले की शिकायत की. जिसके आधार पर गुरुवार को लोकायुक्त इंस्पेक्टर रजनी तिवारी की टीम ने कार्रवाई करते हुए के के शर्मा को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते धर दबोचा. आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
: सरकारी शिक्षा बनाम निजी शिक्षा : समाज की दशा और दिशा
Fri, Apr 18, 2025
सरकारी शिक्षा बनाम निजी शिक्षा : समाज की दशा और दिशा
( विशेष आलेख - सुशील शर्मा)
भारतीय समाज में शिक्षा केवल ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक उन्नति, आर्थिक सशक्तिकरण और राष्ट्र–निर्माण का आधार है। किंतु इस शिक्षा व्यवस्था में दो समानांतर धाराएँ स्पष्ट दिखती हैं — सरकारी शिक्षा और निजी शिक्षा। इन दोनों प्रणालियों के बीच का अंतर आज शिक्षा के लोकतांत्रिक स्वरूप को चुनौती देता दिखाई देता है। ज़रूरत है गहराई से यह समझने की कि समस्या सिर्फ तुलना की नहीं, संतुलन और सुधार की भी है।
सरकारी स्कूल : सच्चाई और चुनौतियाँ
1. आधारभूत समस्याएँ
भवन और संसाधनों का अभाव: कई सरकारी स्कूलों में अभी भी छत टपकती है, शौचालय नहीं हैं, पीने का पानी अस्वच्छ है।
शिक्षक की कमी: एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं में पढ़ाना पड़ता है। कई बार गणित शिक्षक को विज्ञान पढ़ाना पड़ता है।
गुणवत्ता में गिरावट: ASER रिपोर्टों में बार–बार यह बात आई है कि सरकारी स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई और गणना करने की क्षमता में गिरावट देखी गई है।
2. सामाजिक दृष्टिकोण की कमी
सरकारी स्कूलों को गरीबों, मजदूरों, पिछड़े वर्गों के बच्चों की पढ़ाई का स्थान मान लिया गया है।
मध्य वर्ग और शिक्षित वर्ग स्वयं निजी स्कूलों की ओर रुख करता है, जिससे यह संस्थान "कमज़ोरों का स्कूल" बनते जा रहे हैं।
लेकिन… क्या सिर्फ कमी ही है? नहीं!
सरकारी स्कूलों में जहाँ अनेक चुनौतियाँ हैं, वहीं कुछ बेहद प्रेरणादायक सफलताएँ भी देखने को मिली हैं:
1. बोर्ड परीक्षाओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन
हाल ही में कई राज्य बोर्ड परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों के छात्र–छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन किया है।
दिल्ली, तमिलनाडु, ओडिशा,मध्यप्रदेश और राजस्थान के कई सरकारी स्कूलों में बच्चे 90% से अधिक अंक प्राप्त कर रहे हैं।
2. नवोदय विद्यालय और केन्द्रीय विद्यालयों की सफलता
ये सरकारी स्कूल भारत के ग्रामीण और अर्ध–शहरी बच्चों को गुणवत्ता–युक्त शिक्षा देते हैं। यहाँ से निकले विद्यार्थी देश-विदेश की श्रेष्ठ संस्थाओं में पहुँचते हैं।
3. नवाचार और शिक्षक–संकल्प
कई सरकारी शिक्षकों ने अपने प्रयासों से स्कूलों का कायाकल्प किया है — कहीं बागवानी, कहीं स्मार्ट क्लास, तो कहीं मोबाइल एप के जरिए पढ़ाई।
छत्तीसगढ़, केरल, और मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में ऐसे शिक्षक उदाहरण बन चुके हैं।
निजी स्कूल : आधुनिकता की आड़ में अंधी दौड़
1. सुविधाएँ — पर किस मूल्य पर?
निजी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, एसी कक्षाएँ, अंग्रेज़ी माध्यम आदि आधुनिकता के प्रतीक बन गए हैं।
पर यह सब अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ता है — हर साल बढ़ती फीस, ब्रांडेड यूनिफॉर्म, और महंगी किताबें।
2. शिक्षा या प्रतिस्पर्धा?-
बच्चों पर कक्षा 1 से ही परीक्षा, रैंक, ओलंपियाड का दबाव बनाया जाता है। इससे रचनात्मकता और मनोवैज्ञानिक संतुलन प्रभावित होता है।
अनेक निजी विद्यालय केवल अंकों की होड़ में लगे रहते हैं — नैतिक शिक्षा, सह–अस्तित्व और चरित्र निर्माण जैसे विषय गौण हो जाते हैं।
समाज पर प्रभाव : एक असमान भारत
सरकारी और निजी शिक्षा के बीच गहराता अंतर शैक्षिक असमानता को जन्म देता है।
निजी विद्यालयों के विद्यार्थी साक्षात्कार, प्रवेश परीक्षाओं में आगे निकल जाते हैं; वहीं सरकारी स्कूलों का बच्चा शुरुआत से ही पिछड़ जाता है।
यह स्थिति समान अवसर की अवधारणा को खंडित करती है और वर्ग आधारित समाज को जन्म देती है।
भविष्य की संभावनाएँ : नई रोशनी की राह
1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020):
स्कूली शिक्षा को समावेशी, बहु–विषयक और मातृभाषा–आधारित बनाने का प्रयास किया गया है।
सरकारी स्कूलों को "School Complex" या "Cluster School" के रूप में विकसित करने की योजना है।
2. प्रौद्योगिकी का उपयोग:
डिजिटल लर्निंग, ई–पाठशालाएँ, DIKSHA जैसे सरकारी प्लेटफॉर्म सरकारी शिक्षा को तकनीकी रूप से समृद्ध बना रहे हैं।
3. सामुदायिक भागीदारी:
ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से सरकारी स्कूलों का कायाकल्प हो रहा है।
“स्कूल चलें हम” जैसे अभियान स्कूलों में बच्चों की भागीदारी और अभिभावक की जागरूकता को बढ़ा रहे हैं।
समाधान और सुझाव
1. सरकारी स्कूलों में निवेश बढ़ाया जाए। बजट का कम से कम 6% शिक्षा को दिया जाए — जैसा कि नई शिक्षा नीति प्रस्तावित करती है।
2. शिक्षकों को सिर्फ पढ़ाने का कार्य दिया जाए। गैर–शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति मिले।
3. निजी स्कूलों को नियंत्रण में लाने हेतु कड़े नियम लागू हों।
4. एक समान पाठ्यक्रम प्रणाली लागू हो। जिससे सभी बच्चे एक ही स्तर पर खड़े हों।
5. शिक्षा में मूल्य और जीवन कौशल को शामिल किया जाए।
6. जनप्रतिनिधियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ें — ऐसा नियम हो। ताकि व्यवस्था में जवाबदेही आ सके।
शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी दिलाना नहीं, व्यक्ति निर्माण और समाज निर्माण है। अगर सरकारी स्कूलों को सशक्त किया गया और निजी स्कूलों को संयमित किया गया, तो भारत एक शैक्षिक रूप से समरस और सशक्त राष्ट्र बन सकता है।
समाज तभी बदलेगा जब स्कूल बदलेंगे। और स्कूल तब बदलेंगे जब हम — आप और हम — शिक्षा को अधिकार नहीं, कर्तव्य मानकर आगे बढ़ाएँगे।
✒️सुशील शर्मा✒️
: पंचायत सचिवों और रोजगार सहायकों की स्थानांतरण नीति शीघ्र होगी घोषित: मंत्री श्री पटेल
Fri, Apr 18, 2025
पंचायत सचिवों और रोजगार सहायकों की स्थानांतरण नीति शीघ्र होगी घोषित: मंत्री श्री पटेल
आवास प्लस योजना में 27 लाख आवास मंजूर, 6.5 लाख आवासों को भी मिलेगी मंजूरी
जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रदेश में बनेंगे 50 हजार खेत तालाब
रीवा जिला योजना समिति की बैठक में कई प्रस्तावों को दी गई मंजूरी
पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम एवं रीवा जिले के प्रभारी मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल की अध्यक्षता में गुरूवार को जिला योजना समिति की बैठक हुई। बैठक में शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज का नाम कल्पना चावला पॉलिटेक्निक कालेज करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। मेसर्स गोकुलदास एक्सपोर्ट लिमिटेड बैंगलोर के सहयोग से शासकीय कन्या महाविद्यालय के छात्रावास में सिलाई एवं कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र शुरू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि ग्राम पंचायत सचिवों तथा ग्राम रोजगार सहायकों के स्थानांतरण की नीति शीघ्र घोषित होगी। इसके अनुसार ही स्थानांतरण किए जाएंगे। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि "जल गंगा संवर्धन" अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन करें। जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में इस अभियान में जल संरक्षण के कार्य कराएं। गत वर्षों में जिन गांवों में पानी का संकट रहा, वहाँ हैण्डपंप तथा कुओं में रिचार्ज पिट प्राथमिकता से बनाएं। अभियान में शामिल जल संरक्षण कार्यों की तकनीकी और प्रशासकीय स्वीकृति तत्काल जारी करके निर्माण कार्य तेजी से पूरा कराएं। अभियान के तहत मनरेगा से मंजूर सभी अधूरे कार्य 15 मई तक पूरे कराएं। प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान से 50 हजार से अधिक खेत तालाबों का निर्माण कराया जाएगा। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण की समीक्षा करते हुए मंत्री श्री पटेल ने कहा कि इस योजना से रीवा जिले ही नहीं पूरे विन्ध्य में बहुत अच्छा कार्य हुआ है। नए पात्र परिवारों को योजना का लाभ देने के लिए एक लाख 72 हजार परिवार चिन्हित किए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास प्लस योजना से प्रदेश में 27 लाख गरीब परिवारों को आवास मंजूर किए गए हैं। इसके शेष 6 लाख 50 हजार आवास शीघ्र स्वीकृत किए जा रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिये कि ग्रामीण क्षेत्र में गरीब परिवारों को पक्के आवास के लिए सभी एसडीएम प्राथमिकता से जमीन उपलब्ध कराएं। इस योजना से मल्टी स्टोरी आवास भी बनाए जा सकते हैं। पेयजल की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष जिले में औसत से कम वर्षा हुई है। जिले की सभी बसाहटों में पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करें। जिन क्षेत्रों में पेयजल संकट की आशंका हो वहाँ वैकल्पिक स्त्रोत से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करें। ग्राम पंचायतों के पास उपलब्ध राशि से स्पॉट सोर्स पर पानी की टंकी रखकर भी पेयजल की आपूर्ति कराएं। जहाँ जरूरत हो वहाँ तत्काल हैण्डपंपों में सिंगल फेज मोटर लगाकर पानी की आपूर्ति करें। जल जीवन मिशन की समूह नल जल योजना से जिन गांवों में पानी दिया जा रहा है, उनमें पाइप की मरम्मत तथा अन्य कमियाँ दूर कर नियमित रूप से पानी की सप्लाई करें। बैठक में पिछली बैठक के पालन प्रतिवेदन को भी मंजूरी दी गई। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रीवा विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में ग्राम पंचायतें नल जल योजनाओं का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं। जल संवर्धन और संरक्षण के कार्य में सामाजिक संगठनों तथा आम जनता की भी भागीदारी आवश्यक है। विधायक गुढ़ श्री नागेन्द्र सिंह ने ग्रामीण क्षेत्र में पानी का संकट दूर करने के लिए बाणसागर बांध की नहरों से तालाबों और नदियों में पानी छोड़ने का सुझाव दिया। विधायक देवतालाब श्री गिरीश गौतम ने जिला योजना समिति के पुनर्गठन तथा जब तक मऊगंज जिले में जिला पंचायत का गठन नहीं हो जाता तब तक वहाँ के जिला पंचायत सदस्यों को रीवा की योजना समिति की बैठक में सदस्य के रूप में शामिल करने का सुझाव दिया। विधायक श्री गौतम ने नल जल योजना तथा पेयजल व्यवस्था के भी मुद्दे उठाए। विधायक सेमरिया श्री अभय मिश्रा ने पेयजल व्यवस्था, बसामन मामा में तीन करोड़ 21 लाख रुपए की लागत से एनिकट निर्माण, कौआढान में सड़क निर्माण तथा जिला योजना समिति के पुनर्गठन की बात कही। बैठक में महापौर रीवा नगर निगम श्री अजय मिश्रा ने बाणसागर बांध की नहरों की साफ-सफाई तथा गाद निकालने का सुझाव दिया। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल ने ग्राम पंचायत सचिवों के स्थानांतरण, समिति सदस्य डॉ. अजय सिंह ने मतदाता सूची संबंधित बातें कही। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने जिले में योजनाओं के क्रियान्वयन एवं "जल गंगा संवर्धन" अभियान की प्रगति की विस्तार से जानकारी दी। बैठक में विधायक सिरमौर श्री दिव्यराज सिंह, विधायक मनगवां श्री नरेन्द्र प्रजापति तथा समिति के सदस्यगण सहित अधिकारी उपस्थित रहे। प्रभारी मंत्री ने आमजनों की समस्यायें सुनीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री व श्रम एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री सिंह पटेल ने रीवा में स्थानीय लोगों से भेंट कर आमजनों की समस्यायें सुनीं। उन्होंने प्राप्त आवेदनों में संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिये। प्रभारी मंत्री ने डॉ. योगानंद गिरी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।