: गुरु अमृत की धार,गुरु पूर्णिमा पर आलेख, एवं कविता
Thu, Jul 10, 2025
गुरु पूर्णिमा पर आलेख, एवं कविता
गुरु अमृत की धार
( गुरु पूर्णिमा पर आलेख - सुशील शर्मा)
आज गुरु पूर्णिमा। यह वह दिन है जब हम उस महान परंपरा को नमन करते हैं, जो हमें अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती है, जो हमें जीवन के सही मार्ग पर चलना सिखाती है। महर्षि वेद व्यास जी के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाने वाला यह पर्व, वास्तव में गुरु-शिष्य परंपरा के अमरत्व का प्रतीक है। गुरु निर्मित करते हमें, गढ़ते हैं व्यक्तित्व।मात-पिता से तन रहे, गुरु देते अस्तित्व।। यह पंक्ति गुरु की महिमा का सार है। माता-पिता हमें जन्म देते हैं, हमारा शरीर गढ़ते हैं, परंतु गुरु हमें व्यक्तित्व देते हैं, हमें जीवन का उद्देश्य देते हैं, हमें अस्तित्व का बोध कराते हैं। वे हमारे अंतस की यात्रा के लिए हमें तैयार करते हैं, हमें सद आचार की सीख देते हैं और हमारी आत्मा को आत्मबोध के लिए प्रेरित करते हैं।हम सभी जीवन में किसी न किसी रूप में शिक्षक और गुरु से जुड़े होते हैं। अक्सर हम इन दोनों शब्दों को एक ही मान लेते हैं, पर वास्तव में इनमें गहरा अंतर है।आइए इन अंतरों पर एक नज़र डालें: * शिक्षक शिष्य के विकास की जिम्मेदारी लेता है, जबकि गुरु शिष्य को विकास की जिम्मेदारी सौंपता है। शिक्षक हमें राह दिखाता है, पर गुरु हमें इतना सक्षम बनाता है कि हम अपनी राह खुद चुन सकें। * शिक्षक वह देता है जो शिष्य को चाहिए, जबकि गुरु वह लेता है जो शिष्य को नहीं चाहिए। गुरु हमारे अहंकार, हमारी कमियों, हमारी नकारात्मकताओं को दूर करता है, ताकि हम शुद्ध हो सकें। * शिक्षक शिष्य के प्रश्नों के उत्तर देता है, जबकि गुरु शिष्य के उत्तर पर प्रश्न खड़े करता है। गुरु हमें सोचने पर मजबूर करता है, हमारी जिज्ञासा को शांत करने के बजाय उसे और प्रज्वलित करता है। * शिक्षक शिष्य का अहंकार से परिचय कराता है, जबकि गुरु शिष्य के अहंकार को नष्ट करता है। गुरु हमें विनम्रता सिखाता है, हमें स्वयं को जानने की प्रेरणा देता है। * शिक्षक शिष्य से आज्ञापालन और अनुशासन चाहता है, जबकि गुरु शिष्य से विश्वास और विनम्रता चाहता है। गुरु-शिष्य का संबंध आज्ञा का नहीं, बल्कि अटूट विश्वास और श्रद्धा का होता है। * शिक्षक शिष्य को भौतिक यात्रा के लिए तैयार करता है, जबकि गुरु शिष्य को आंतरिक और आध्यात्मिक यात्रा के लिए तैयार करता है। शिक्षक हमें दुनियावी सफलताओं के लिए तैयार करता है, पर गुरु हमें जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने की दिशा में ले जाता है, हमें परमात्मा से जोड़ता है। * शिक्षक शिष्य को सफलता के मार्ग पर चलना सिखाता है, जबकि गुरु शिष्य को स्वतंत्रता के पथ पर चलना सिखाता है। गुरु हमें केवल सफल नहीं, बल्कि स्वतंत्र बनाता है, ताकि हम स्वयं अपने निर्णय ले सकें। * शिक्षक आपको दुनिया से परिचित कराता है, जबकि गुरु आपको स्वयं से परिचित कराता है। यह सबसे महत्वपूर्ण अंतर है। गुरु हमें हमारी आत्मा का दर्शन कराता है। * शिक्षक आपको निर्देशित करता है, जबकि गुरु आपको निर्मित करता है। शिक्षक दिशा देता है, पर गुरु हमें गढ़ता है, हमें एक नया स्वरूप देता है। * शिक्षक अपनी विद्वत्ता से शिष्य को प्रेरित करता है, जबकि गुरु अपने आचरण से शिष्य को प्रेरित करता है। गुरु का जीवन ही उसके शिष्य के लिए सबसे बड़ा उदाहरण होता है। * शिक्षक शिष्य को उपाधि दिलाता है, जबकि गुरु शिष्य को सम्मान दिलाता है। शिक्षक हमें डिग्री दिला सकता है, पर गुरु हमें वास्तविक सम्मान का पात्र बनाता है। * शिक्षक शिष्य के लिए पिता समान है, जबकि गुरु शिष्य के लिए माता समान है। माता का प्रेम निस्वार्थ होता है, और गुरु का प्रेम भी उतना ही पवित्र और निस्वार्थ होता है। * हम जीवन भर शिक्षक के आभारी रहते हैं, जबकि हम जीवन भर गुरु के ऋणी रहते हैं। शिक्षक का आभार व्यक्त किया जा सकता है, पर गुरु का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता।इन अंतरों को समझकर हम गुरु की महत्ता को और अधिक गहराई से अनुभव कर सकते हैं। वे हमें भौतिकता से दूर कर अध्यात्म की ओर ले जाते हैं, हमारी सांसारिक बाधाओं को हरते हैं और हमें परमात्म से जोड़ते हैं। वे हमारे अहंकार का नाश कर आत्मबोध का संधान करते हैं, हमारे अंतस के कूड़े को साफ कर हमें एक नया विधान देते हैं। जीवन के अनजाने और कठिन पथों पर वे हमारे लिए मील का पत्थर होते हैं, अंधकार में एक दीप की तरह प्रकाशित होते हैं।आज इस पावन अवसर पर हम सभी अपने गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। उनके असीम ज्ञान, उनके मार्गदर्शन और उनके निस्वार्थ प्रेम के बिना हमारा जीवन अधूरा है। आइए, हम सब मिलकर अपने गुरुओं को नमन करें और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लें।गुरु पर दोहे( गुरु पूर्णिमा पर विशेष - सुशील शर्मा) गुरु ज्ञानी गुरु ब्रह्म हैं, देते सच्चा ज्ञान।दूर करें अज्ञान सब,गुरु की कृपा महान ।। गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु सम, गुरु हैं देव महेश।गुरु बिन ज्ञान न होत है, गुरु ही हैं परमेश।। गुरु पद शीश नवाइए, गुरु पद सदा प्रणम्य।गुरु की कृपा कटाक्ष से, मिटते पाप अक्षम्य।। अंधकार ये जग सकल, गुरु दीपक की जोत।सही मार्ग दर्शित करें, जब मन विचलित होत।। संकट में यदि शिष्य हो, गुरु करते निर्वाण।मृत्यु निकट आती नहीं,गुरु रक्षित हों प्राण। गुरु वाणी ही ब्रह्म है, जो सुनता धर ध्यान।भवसागर से पार हो, मिलें उसे भगवान।। समझे जो गुरु ज्ञान को, उसका बेड़ा पार।बिना गुरु के ज्ञान के, व्यर्थ लगे संसार।। गुरु पोषक हैं शिष्य के , जो सींचे नित ज्ञान।शिष्य सुमन जैसे खिलें, करके गुरु का ध्यान।। गुरु श्री ब्रह्म समान हैं, गुरु ही मन के मीत।गुरु ही जीवन सार है, गुरु ही सच्ची जीत।। व्यास पूर्णिमा पर्व पर, गुरु को करो प्रणाम।जीवन हो सुखमय सदा, सफल बनें सब काम।।आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक मंगलकामनाएं। सुशील शर्मा
: प्रांतीय पदाधिकारियों का सम्मान समारोह एवं क्षेत्रीय समिति का गठन संपन्न
Tue, Jul 8, 2025
प्रांतीय पदाधिकारियों का सम्मान समारोह एवं क्षेत्रीय समिति का गठन संपन्न
गाडरवारा l विगत दिवस मेहर गढ़वाल समाज कल्याण परिषद के नवनिर्वाचित प्रांतीय पदाधिकारियों के सम्मान समारोह कार्यक्रम का आयोजन दादा धुनी वालों की नगरी साइखेड़ा में संपन्न हुआ जिसमें मुख्य अतिथियों के रूप में प्रांतीय अध्यक्ष जीपी मेहरा, प्रांतीय उपाध्यक्ष महेश हनोतिया, प्रांतीय महासचिव अशर्फीलाल बामलिया, प्रांतीय कोषाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद हाथिया, प्रांतीय संयुक्त सचिव विष्णु प्रसाद मेहरा, समाज के वरिष्ठ रेवा सिंह जी मेहरा, जिलाध्यक्ष रविन्द्र गढ़वाल, युवा प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष इंजी मुकेश मेहरा, पत्रकार राजेंद्र मेहरा, कमल गढ़वाल एवं युवा कार्यकर्ता राजेंद्र मेहरा थे l कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्य अतिथियों द्वारा सरस्वती पूजन एवं बाबा अंबेडकर के तेल चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित किया गया l तत्पश्चात समाज की नन्ही बालिकाओं मानसी मेहरा एवं भूमि मेहरा मिड़वानी द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया l स्वागत समारोह की श्रृंखला में समाज के वरिष्ठ संतोष जी ग्वारिया द्वारा मुख्य अतिथियों का पुष्पहारों से स्वागत एवं शाल श्रीफल तथा स्मृति चिन्ह से सम्मान किया गया l शिवकुमार मेहरा द्वारा समाज का प्रतिवेदन एवं सामाजिक क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया l इस दौरान प्रांतीय महासचिव अशर्फीलाल बामलिया ने समाज की गाइडलाइन के अनुसार क्षेत्रीय समिति साइखेड़ा के चुनाव संपन्न कराये जिसमें सर्वसम्मति से बलवान मेहरा संरक्षक, गोविंद गढ़वाल अध्यक्ष, गणेश प्रसाद मेहरा, तुलसीराम मेहरा, रणवीर मेहरा एवं विष्णु प्रसाद मेहरा उपाध्यक्ष, दामोदर मेहरा कोषाध्यक्ष, जगदीश मेहरा सचिव, प्रेम नारायण मेहरा संयुक्त सचिव चुने गये l सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारी को प्रांतीय अध्यक्ष जीपी मेहरा द्वारा शपथ दिलाई गई l उद्बोधन की श्रृंखला में राजेंद्र मेहरा पत्रकार, एसपी मेहरा, विष्णु मेहरा, राजेंद्र हाथिया, आशर्फीलाल बामलिया, महेश हनोतिया, रेवा सिंह मेहरा ने उपस्थित सभी जनों को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी को मिलजुलकर समाज हित में कार्य करना है एवं समाज में फैली हुई कुरीतियों को जड़ से समाप्त करना है l कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रांतीय अध्यक्ष जीपी मेहरा ने उपस्थित सामाजिक बंधुओ को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी के सहयोग से आज यह बड़ा कार्यक्रम संपन्न हुआ है हम सभी को मिलकर समाज के अंतिम छोर पर बैठे हुए व्यक्ति को साथ लेकर समाज के उत्थान हेतु अग्रसर रहना है l समाज में वर्षों से चली आ रही कुछ प्रथाओं पर भी हम सभी को विराम लगाना है l उन्होंने आगे कहा कि अगर आपको कभी मेरी जरूरत महसूस होती है तो मैं हमेशा आपके लिए उपलब्ध रहूंगा l उन्होंने साइखेड़ा समिति के नवनिर्वाचित सभी पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए पूरे मन से सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने की बात कही l इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम के सूत्रधार संतोष ग्वारिया की मंच से प्रशंसा भी की l कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन साइखेड़ा समिति के नवनिर्वाचित अध्यक्ष गोविंद गढ़वाल द्वारा किया गया l पूरे कार्यक्रम में मंच का संचालन शिवकुमार मेहरा द्वारा किया गया l कार्यक्रम में सचिन मेहरा, मुंशीलाल मेहरा, सत्यनारायण मेहरा, बद्री प्रसाद मेहरा, जमुना प्रसाद मेहरा, साहब लाल मेहरा, दीपक मेहरा, चंद्रभान मेहरा, हेमराज मेहरा के अलावा अनेकों सामाजिक बंधुओ की उपस्थिति रही l
: कुण्डलपुर में बड़े बाबा के अभिषेक शांतिधारा के साथ सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन हुआ
Tue, Jul 8, 2025
कुण्डलपुर में बड़े बाबा के अभिषेक शांतिधारा के साथ सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन हुआ
कुण्डलपुर दमोह। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में बड़े बाबा मंदिर परिसर में जहां एक और अष्टांन्हिका महापर्व में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन 1 जुलाई से 8 जुलाई तक आयोजित हुआ वहीं दूसरी ओर प्रतिदिन पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक शांतिधारा पूजन विधान देश के कोने-कोने से आए भक्तों द्वारा किया जा रहा है। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में पुन्यार्जक परिवार, दमोह जिला के श्रद्धालु भक्तों सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालु भक्तों ने बढ़चढ़ कर भक्ति भावपूर्वक सिद्धों की आराधना की। प्रचार मंत्री जयकुमार जलज ने बताया विधान के सातवें दिन विधान में सम्मिलित बड़ी संख्या में भक्तों द्वारा 1024 अर्घ समर्पित किए गए। अंतिम दिवस हवन यज्ञ हुआ। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का सर्वाधिक रिकॉर्ड बनाने वाले विधानाचार्य विद्वान पं. ब्रह्मचारी संजीव भैया जी कटंगी के कुशल मार्गदर्शन में ब्रह्मचारी अनुज भैया सहित संगीतकार राजेश जैन बागीद्वारा संगीत पार्टी की संगीत की मधुर स्वर लहरियों के बीच श्रद्धालुओं ने अत्यंत भक्ति पूर्वक नाचते गाते सिद्धों की आराधना करते प्रतिदिन बढ़ते क्रम में प्रत्येक अर्घ समर्पित किये। प्रातः भक्तामर महामंडल विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांति धारा ,पूजन ,बड़े बाबा महामंडल विधान हुआ इस अवसर पर प्रथम अभिषेक शांतिधारा रिद्धिमंत्र कलश ,आरती, छत्र ,चंवर चढ़ाने का सौभाग्य अरविंद आरुष खेमचंद जैन जबलपुर, विकास आकांक्षा अनुज परिवार अहमदाबाद, अजित अनिल जबलपुर, वैभव मनोज झांसी, अमियवर्धन जैन सतना संजय जैन बांसवाड़ा ,राकेश सरिता आदित्य सोनम सिंघई परिवार हटा ,अशोक अमित इटारसी, अभिषेक सुभाष यशी परिवार ग्वालियर, स्नेह ममता ब्रह्मचारिणी गोल्डी दीदी परिवार सागर , वीरेन्द्र सन्मति सानिध्य सिंघई जबेरा, मुकेश पियूष चौधरी पनागर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने प्राप्त किया। सिद्ध चक्र महामंडल विधान पुन्यार्जक परिवार क्षुल्लक श्री स्वस्तिक सागर जी महाराज का ग्रहस्थ जीवन का परिवार श्रीमंत संतोष सिंघई रेशु सिंघई परिवार दमोह, शीलचंद बैसाखिया परिवार दमोह सहित कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी का सराहनीय सहयोग रहा।