: भोपाल,ग्राम सभा को बनाएं सिकल सेल रोग काउंसलिंग का मंच : राज्यपाल श्री पटेल
Mon, Jun 26, 2023
ग्राम सभा समिति सदस्यों का प्रशिक्षण जरूरी
राज्यपाल ने बैठक में अधिकारियों से कहा
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल एनीमिया रोग की काउंसलिंग के लिए ग्राम सभा के मंच का उपयोग किया जाये। ग्राम सभा को बताया जाये कि सिकल सेल एनीमिया रोग की रोकथाम के लिए जरूरी है कि युवक-युवती दोनों यदि सिकल सेल वाहक हैं, तो वे आपस में विवाह नहीं करें। यह समझाना भी जरूरी है कि यदि कोई एक वाहक अथवा रोगी है, तो वे आपस में विवाह कर सकते हैं। उन्होंने रोग से संबंधित सावधानियों, उपचार, आहार और विहार संबंधी जानकारियों के प्रसार के लिए ग्राम के व्यक्तियों को सूचित और शिक्षित करने के प्रयासों के लिए भी कहा। राज्यपाल श्री पटेल ने राजभवन में आयोजित बैठक में वन और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि सिकल सेल रोग के उन्मूलन के लिए ग्राम सभाओं को प्रेरित किया जाना चाहिए। ग्राम सभा में सिकल सेल रोग के संबंध में चर्चा के आयोजन किए जाने चाहिए। ग्राम सभाओं को रोग की रोकथाम के प्रयासों के लिए संकल्पित कराया जाना चाहिए। ग्राम सभा की शक्तियों, कार्यवाही, बैठक में शामिल होने वाले और भाग नहीं लेने वाले सदस्यों की जानकारियों का प्रसार किया जाए, ताकि ग्रामीणों को ग्राम सभा की बैठक में शामिल होने की प्रेरणा मिले। ग्राम सभा की समितियों की उपलब्धियों का भी व्यापक प्रसार किया जाए। इससे अन्य ग्राम सभाओं को भी आगे बढ़ कर कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी। राज्यपाल ने पेसा कानून के तहत गठित समितियों के सदस्यों के प्रशिक्षण की व्यवस्था करने के लिए भी कहा। बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री दीपक खांडेकर, अपर मुख्य सचिव वन श्री जे.एन. कंसोटिया, अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री मलय श्रीवास्तव, राज्यपाल के प्रमुख सचिव श्री डी.पी. आहूजा, जनजातीय प्रकोष्ठ के सदस्य सचिव श्री बी.एस. जामोद, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ श्री पुष्कर सिंह उपस्थित थे।
: नरसिंहपुर, कृषि विभाग द्वारा फसलों के लिए किसानों को समसामायिक सलाह
Mon, Jun 26, 2023
कृषि विभाग द्वारा फसलों के लिए किसानों को समसामायिक सलाहनरसिंहपुर।जिले में मानसून आ चुका है, अभी तक जिले में एक जून से 52.2 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है। उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने किसानों को खरीफ दलहनी एवं तिलहनी फसलों के लिए समसामायिक सलाह दी है।लगातार वर्षा होने पर सामान्य फीड ड्रिल से नाली में बोनी करने पर बोनी के तुरंत बाद ज्यादा वर्षा होने पर बीज सड़ने की संभावना रहती है। अंकुरण के बाद कुछ दिन लगातार वर्षा होने पर नाली में बोनी करने पर बरसात का पानी नाली में भरने लगता है और पौधों की जड़े भी नाली में होने से पौधों की वृद्धि में प्रभावित होती है। अत: किसानों को सलाह दी गई है कि खरीफ दलहनी एवं तिलहनी फसलों की बोनी रिज- फरो पद्धति (मेड़, नाली) पद्धति से करें। इस पद्धति से फसल बोनी करने पर बीज या पौधा मेड़ में रहता है एवं अगल- बगल नाली रहती है। सामान्य फीड ड्रिल को भी रिज- फरो फीड ड्रिल बनाया जा सकता है, पीछे की टाइन्स में 2 से 3 इंच मोटा लकड़ी गुटका लगाकर एवं V की शेष की निर्धारित साइज लगभग 14 इंच व्यास की पंजी लगा सकते हैं। बोनी आगे की टाइन्स से 18 इंच कतार से कतार की दूरी पर करते हैं। यदि खेत में ढलान है, तो फसलों की बोनी ढलान के विपरीत दिशा में करें, ताकि ऊपर की उपजाऊ भूमि का वर्षा जल से छरण न हो।तुअर की बोनी करने हेतु किसान गन्ना रेजर से 3 फिट या 4 फुट पर मेड़ बनाकर पौधों से पौधों की 1 से 1.5 फिट की दूरी रखें। उर्वरक एवं तुअर का बीज डिवलिंग कर सकते हैं। इस विधि में 1 से 2 किलो बीज से 1 एकड़ की बोनी की जा सकती है। खरीफ में जोखिम कम करने एवं उत्पादकता में वृद्धि और अधिक आय प्राप्त करने के लिए अंतरवर्ती खेती उपनाना चाहिये। तुअर की कतार से कतार 3 या 4 फिट पर तुअर की कतार से कतार की दूरी रखने पर बीच में 2 लाइन ज्वार की बोनी कर सकते हैं (तुअर+ज्वार 1:2 अनुपात में) इसी प्रकार सोयाबीन एवं उडद के साथ ही 4:2 अनुपात में ज्वार की बोनी भी कर सकते है। ज्वा्र के साथ अंतरवर्ती खेती में अंकुरण के पूर्व पेन्डीमेथालीन नींदानाशक दवा का 2 ली. प्रति हेक्टेयर की दर से छिडकाव कर सकते है।मक्का या धान की बोनी करने के लिए 50 प्रतिशत नाइट्रोजन की मात्रा बोनी करते समय प्रयोग करें तथा शेष 25 प्रतिशत मात्रा बोनी के 20 दिन बाद और शेष 25 प्रतिशत मात्रा 40 दिन बाद पौधों के बगल में दें। बोनी के लिए सोयाबीन 30 किग्रा प्रति एकड़, उड़द 8 किग्रा प्रति एकड़, तुअर 6 किग्रा प्रति एकड़ मक्का 8 से 10 किग्रा प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करें।खरीफ फसलों की बोनी हेतु 1 बोरी डीएपी के स्थान पर 1 बोरी 12:32:16 एनपीके का काम्प्लेक्स उर्वरक का प्रयोग ज्यादा लाभदायक है। क्योंकि इसमें पोटाश तत्व भी रहता है, जिसके कारण पौधों में रोग एवं कीड़े भी कम आते हैं। साथ ही दाने में चमक भी रहती है। यदि केवल डीएपी या सिंगल सुपर फास्फेट उर्वरक का प्रयोग कर रहे हैं, तो प्रति एकड़ 15 से 20 किलो म्यूरेट आफ पोटाश का प्रयोग करें। तुअर की बोनी सीडड्रिल से करने पर पौधों से पौधों की दूरी बहुत कम हो जाती है। अत: तुअर की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए पौधों से पौधों की दूरी 1.5 फिट रखते हुए बीच के पौधों को उखाड़कर बिरलन करें।
: कलेक्टर अरविंद दुबे की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक का आयोजन
Mon, Jun 26, 2023
कलेक्टर श्री अरविंद दुबे की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित
KamarRana
रायसेन, 26 जून 2023
-----------कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कलेक्टर श्री अरविंद दुबे द्वारा जिले में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने, नागरिकों को यातायात नियमों का पालन करने हेतु जागरूक करने हेतु चलाए जा रहे अभियान, गतिविधियों की समीक्षा की गई। उन्होंने गत बैठक में लिए गए निर्णयों के पालन हेतु की गई कार्यवाही की जानकारी लेते हुए सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाने के निर्देश दिए। साथ ही अधिक दुर्घटना वाले सड़क मार्गो पर चिन्हित किए गए ब्लैक स्पाट पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए की जा रही कार्यवाही की जानकारी ली एवं कार्यवाही करने के निर्देष संबंधित अधिकारियों को दिए।
बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री विकास शहवाल ने कहा कि पुलिस तथा यातायात अमले द्वारा सम्पूर्ण जिले में सड़क सुरक्षा संबंधी जागरूकता गतिविधियां तथा विगत 6 माह से बैठकों में लंबित एजेंडों के बिंदु पर विभागवार एवं एजेंसीवार चर्चा की। बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अमृत मीणा द्वारा गत बैठक में लिए गए निर्णयों पर अभी तक की गई कार्यवाही, सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों के पालन हेतु चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों एवं विगत 06 माह से लंबित बैठको के ऐजेंडो बिंदुवार पावर प्लाइंट प्रजेन्टेशन के माध्यम से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया की जिले में ब्लैक, ब्लाईंड स्पॉट दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सड़क निर्माण एजेंसी के साथ समन्वय स्थापित कर आवष्यकतानुसार परिषोधन के कार्य किए जा रहे है।
साथ ही बैठक में निर्माण ऐजेंसी द्वारा क्या-क्या कार्य किए गए उनसे भी अवगत कराया गया। साथ ही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवारा पशुओं को गौषाला में भेजना, सूचक संकेतक पेड़ एवं झाढ़ियो/पत्तियों से ढक गई उनकी कटाई-छटाई करने, पुल-पुलिया पर बरसात का पानी आ जाने पर वाहन ना निकलने आदि की जानकारी विस्तार से दी। बैठक में डीएफओ विजय कुमार, अपर कलेक्टर श्री वृंदावन सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।