: 2 अप्रैल को राठौर साहू तैलिक समाज की हुंकार सभा भोपाल के जंबूरी मैदान में जुटेगा भारी हुजूम
Sat, Mar 11, 2023
2 अप्रैल को राठौर साहू तैलिक समाज की हुंकार सभा
भोपाल के जंबूरी मैदान में जुटेगा भारी हुजूम
प्रदेश के सभी सामाजिक संगठन आए एक छत के नीचे
शक्ति प्रदर्शन की सफलता हेतु बनी संयुक्त रणनीतिभोपाल। आगामी 2 अप्रैल को राजधानी के जंबूरी मैदान में तैलिक साहू राठौर समाज की हुंकार रैली संपन्न होने जा रही है। इस रोज समाज द्वारा 5 लाख लोगों के एकत्रीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कार्यक्रम की सफलता के लिए समाज के सभी संगठन एकजुट हो गए हैं और उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए संयुक्त रणनीति को तैयार कर लिया है। इस बाबत अनेक महत्वपूर्ण निर्णय प्रांत स्तरीय बैठक में लिए गए। यह बैठक भोपाल के मानस भवन में संपन्न हुई। जिसमें साहू राठौर तेली समाज के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उल्लेखनीय है कि राजनीतिक आर्थिक और सामाजिक लाभ के स्तर पर तेली समुदाय को अनदेखा किया जाता रहा है। यही वजह है कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति में आक्रोश का माहौल है। सभी राजनीतिक दल भारी तादाद में मौजूद तेली समाज की ताकत को समझें और उन्हें वह अधिकार व सम्मान मुहैया कराएं, जिसके वे हकदार हैं। इसके लिए आगामी 2 अप्रैल को भोपाल के जंबूरी मैदान में हुंकार रैली किया जाना सुनिश्चित हुआ है। इसे सफल बनाने के लिए एक जागरूकता रथ यात्रा पिछले साल से निरंतर बनी हुई है। यात्रा के केंद्र बिंदु रवि करण साहू अब तक वायु मार्ग और सड़क मार्ग के माध्यम से मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों का दौरा कर चुके हैं। जो थोड़े बहुत क्षेत्र रह गए हैं वहां भी शीघ्र अति शीघ्र संपर्क किए जाना जारी है। इसी तारतम्य में एक बैठक भोपाल के मानस भवन में संपन्न हुई। जिसमें पूरे प्रदेश के तेली बंधु एकत्रित हुए और कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु तन मन धन से सहयोग करने का इरादा जताया। कार्यक्रम की सफलता के लिए अनेक समितियां बनाई गईं। साथ में दायित्ववान पदाधिकारियों को चिन्हित किया गया। इस दौरान समाज के अनेक संगठनों के पदाधिकारी भी बैठक में पहुंचे। इनमें कार्यक्रम के केंद्र बिंदु रविकरण साहू, सरक्षक प्रकाश साहू इंदौर, यात्रा संयोजक गुलाब गोल्हानी, प्रदेश उपाध्यक्ष जे पी साहू, संतोष राठौर प्रदेश अध्यक्ष राठौर महासभा,वरिष्ठ अभिभाषक एवं संरक्षक एडवोकेट पुरुषोत्तम गुप्ता, हिन्दू उत्सव समिति के अध्यक्ष संतोष लखपति, वरिष्ठ पत्रकार मोहन लाल मोदी, साहू वैश्य महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय साहू, दिनेश सिल्लन साहू, कार्यकारी अध्यक्ष आर के साहू, अनूप साहू राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, तैलिक साहू महासभा के संस्थापक संरक्षक डाक्टर हेमराज साहू, प्रदेश संरक्षक रामनारायण साहू, कार्यकारी अध्यक्ष ओम प्रकाश साहू, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमेश साहू,पूर्व महिला अध्यक्ष श्रीमती भावना साहू, युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष रविंद्र साहू झूमरवाला, उपाध्यक्ष कैलाश साहू, भारतीय तैलिक राठौर महा सभा प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सत्येंद्र साहू दमोह, महासंगठन के मुख्य राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष किशोर साहू, राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा चन्दन साहू, महिला महामंत्री पूनम साहू सागर, महिला प्रदेश अध्यक्ष कल्पना वात्री, प्रदेश अध्यक्ष आई टी कविता साहू, महिला जिला उपाध्यक्ष शिखा साहू, महिला संभागीय अध्यक्ष ललिता साहू इंदौर, अपर महामंत्री मुकेश साहू, कैलाश साहू, भगवान सिंह साहू जिला युवा अध्यक्ष, पूर्व युवा अध्यक्ष बाबूलाल साहू, युवा कार्यकारी अध्यक्ष राजेश साहू शिक्षक, प्रचार मंत्री संतोष राज, प्रदेश मिडिया प्रभारी रवि साहू, संभागीय अध्यक्ष विमल साहू, जिला अध्यक्ष गिरीश बंटी साहू, साहू राठौर महासभा के प्रांतीय पदाधिकारी जवाहर लाल गुप्ता, वरिष्टि समज सेवी किशोर कुमार लहरपुरे, नन्द लाल साहू, भोपाल की सभी इकाइयों के अध्यक्ष विनोद साहू (घोड़ा निकास), प्रवीण साहू (बाड़खेड़ी), शैलेन्द्र साहू (बरखेड़ा पठानी), दिनेश साहू (एरो सिटी करोंद), सुरेश साहू (करोंद), कन्नू प्रसाद साहू (टीलाजमालपुरा), चंद्र मोहन साहू (भेल), गोपाल साहू (कोलर), राजेश कर्मा टेंट (सेमरा), विनोद साहू (आनद नगर), शिव चरण साहू (भीम नगर), जगदीश साहू रेलवे (शिव नगर), डी डी साहू (बागसेवनिया) सहित प्रदेश के कई जिलों के सैकड़ों पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें बरखेड़ी इकाई की मौजूदगी प्रमुखता से रही जिनमें वर्तमान और पूर्व अध्यक्ष, और कार्यकारणी के पदाधिकारीगण आर सी साहू बिम्ब, मुकेश साहू आर टी ओं, सुरेश साहू, डॉक्टर प्यारे लाल साहू, राजेश साहू, डालचंद साहू, गोपाल साहू, जितेंद्र साहू प्रमुख हैं।
कार्यकर्म के समाप्ति के पश्चात महासंगठन के जिला अध्यक्ष गिरीश बंटी साहू जी के द्वारा इस कायकर्म को सफल बनाने हेतु उपस्तीथ हुए सभी सामाजिक बंधुओ को दिल से आभार व्यक्त कर धन्यवाद दिया ।
: गाडरवारा, नाटक के जरिये बताया होली का महत्त्व
Fri, Mar 10, 2023
नाटक के जरिये बताया होली का महत्त्वगाडरवारा। गत दिवस क्षेत्र के चीचली ब्लॉक अंतर्गत ग्राम टेकापार की शासकीय माध्यमिक शाला में होली के महत्त्व को नाटक के माध्यम से छात्र छात्राओं ने बताया। संस्था की प्रधानपाठक श्रीमती सुनीता सोनी के संयोजन में प्रस्तृत नाटक में हिरण्यकश्यप एवं भक्त प्रहलाद की कहानी का प्रस्तुतिकरण शाला के छात्र छात्राओं ने किया। नाटक में साक्षी कौरव ने भक्त प्रहलाद, सुमित यादव ने हिरण्यकश्यप, रागिनी यादव ने होलिका , अंशिका कौरव ने रानी,संजय कौरव ने ब्रह्देव,मानसी कौरव ने मंत्री , शेख़ मुस्तफा ने नारद मुनि , अजय धानक ने सैनिक की भूमिका निभाई। नाटक को ग्रामवासियों ने खूब सराहा।
: नारी दिवस पर दो कविताएँ (मेरी भूमिका , में वो नहीं )
Thu, Mar 9, 2023
नारी दिवस पर दो कविताएँ1मेरी भूमिकासुशील शर्मा सृष्टि के प्रथम सोपान सेआज के अविरल विकास महान तक।मेरी भूमिका का संदर्भअहो प्रश्न चिन्ह कितना दुःखद। सनातन संस्कृति का आरंभसृष्टि के प्रथम बीज का रोपणमेरी गर्भनाल से प्रारम्भ।आदि मानव की संगनी से लेकरव्यस्ततम प्रगति सोपानों तकमेरी भूमिका का संदर्भअहो प्रश्न चिन्ह कितना दुःखद। ऋग्वेद से लेकर बाज़ारीकरण तककितनी अकेली मेरी अंतस यात्राहर समय सिर्फ त्याग और बलिदान।न जी सकी कभी अपना कालसदा बनती रही पूर्ण विराम।विकास के अविरल पथ परमेरी भूमिका का संदर्भअहो प्रश्न चिन्ह कितना दुःखद। मैं दुर्गा गार्गी मैत्रयी से लेकरवर्तमान की अत्याधुनिक वेषधारीकितनी असहनीय अमानवीय यात्रओं को सहती।मेरे तन ने अनेक रूप बदलेमन लेकिन वही सात्विक शुद्धमानवीय मूल्यों को समेटेनित नए संकल्पों में विकल्प ढूँढतीमेरी भूमिका का संदर्भअहो प्रश्न चिन्ह कितना दुःखद। क्षितिज के पार महाकाश दृश्यशब्दों सी स्वयं प्रकाशित स्वयं सिद्धकाल की सीमाओं से परे मेरा व्यक्तित्व।देश नही विश्व निर्माण में मेरा अस्तित्व।मेरी भूमिका का संदर्भअहो प्रश्न चिन्ह कितना दुःखद। हर युग हर काल में मेरा रुदनविरोधाभास और विडम्बनाएं गहनअंतस में होता हमेशा मेरे नव सृजनहर देश हर काल का विकास पथहै मेरे इतर शून्यतम।मेरी भूमिका का संदर्भअहो प्रश्न चिन्ह कितना दुःखद। 2मैं वो नहींसुशील शर्मा सपने भी सहमे हैं मेरेकल्पनाओं में क्रांति है।सन्नाटे के सृजन मेंसब मैंने बुनातुमने सिर्फ गाँठ बाँधीऔर सब कुछ तुम्हारा था।शब्दों की अंतरध्वनियोंमें गूँजते मेरे सवालतुमने कभी नही सुने।साँचे-ढले समाज कीअकम्पित निर्ममताहब्बा से आज तकछलती रही मुझेऔर तुम बने रहे भगवानहांकते रहे मुझेउनींदी भोर से सिसकती रात तकउड़ेलते रहेअपने अस्तित्व का जहरप्यार का नाम देकर।हाँ तुमने गहा था मुझेलेकिन मुझे छोड़ करसाथ ले गए सिर्फ मेरी देहउस देह से तुमने उपजा लिएअनगिन रिश्तेजिह्वा ललन लालसाएंमैं तो अभी भी बैठी हूँवहीँ अकेली ,अधूरीअंतहीन ,अनकही। विश्व महिला दिवस पर मातृशक्ति को समर्पित।