: गाडरवारा। हवेली में डोलोत्सव भजन रंग-गुलाल के साथ सम्पन्न
Thu, Mar 9, 2023
हवेली में डोलोत्सव भजन रंग-गुलाल के साथ सम्पन्नhttps://youtu.be/3J1MRjEjl0sगाडरवारा । वल्लभकुल पुष्टिमार्गीय देवस्थान श्रीगौर्वधननाथजी जी की हवेली (मंदिर) में बंसत पंचमी से होली के पावन पर्व की त्यौहार की शुरुआत प्रतिदिन ठाकुर जी को रंग गुलाल अर्पित करने के साथ साथ होली संदर्भित कृष्ण रसरंग के मनभावन भजनों के साथ चालीस दिनों तक होती है जो होलिका दहन के दूसरे दिन चैत्रकृष्ण एकम धूलिवंदन तक उत्साह और उमंग के वातावरण में अंतिम दिन डोलोत्सव के साथ संपन्न हुआ । जिसमें सभी वैष्णव जन शामिल होकर ठाकुर जी के प्रति अगाध प्रेम और समर्पण की अभिव्यक्ति से मंत्रमुग्ध होकर भावप्रवण रास रंग, बृज के होली गीत भजन. मुखियाजी श्रीनाथ जी भट्ट के साथ वाद्ययंत्रों की तान पर गाते हैं । इसी दिन समापन की श्रृंखला में रंग गुलाल प्रभु चरणों में समर्पित कर वैष्णव जनो पर परम्परा अनुसार मुखिया जी के परिवार के सदस्यों मुख्य मुखियनजी साब व , गिरिराज जी, श्रीमती संगीता भट्ट ने सभी वैष्णव जन के ऊपर प्रसाद स्वरूप रंग गुलाल से होली खेलने का मनोरम कार्यक्रम संपन्न हुआ । उपरांत उपस्थित भक्तों ने रंगो और गुलाल से आपस में होली का लाड लडावा गया ,प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ ।
: मुख्यता किसकी? सलाह की अथवा सहयोग की,मुनि श्री निरंजनसागर जी
Mon, Mar 6, 2023
मुख्यता किसकी? सलाह की अथवा सहयोग की,मुनि श्री निरंजनसागर जीकुंडलपुर। साइंस ऑफ लिविंग के आज के इस सत्र में हम एक ऐसे विषय से आपको अवगत कराने का प्रयास कर रहे हैं। जिसका हम सभी को हमारे जीवन में भिन्न-भिन्न तरीकों से सामना करना पड़ता है ।एक बहुत ही नकारात्मक दृष्टिकोण सामान्यतः देखने को मिलता है ।वह है किसी की भी ना सुनना और अपने हिसाब से कार्य करना। अगर कोई कुछ कहना भी चाहे तो उसे तुरंत कह देना सलाह नहीं सहयोग दीजिए ।अर्थात कार्य तो चाहे गलत हो या सही पर करेंगे वही जो हम चाहते हैं और अगर आप इसमें कुछ करना चाहते हो तो भी हमारे हिसाब से ही करो। आप अपने दिमाग का इस्तेमाल तो बिल्कुल भी मत करो ।यहां तक लोगों को कहते सुना है कि कृपया यहां ज्ञान ना बाटे क्योंकि यहां सभी ज्ञानी है ।इस तरह की बातें आपकी नकारात्मकता का स्पष्ट प्रमाण है ।आज हम इसके सकारात्मक पहलुओं तक पहुंचने का प्रयास करेंगे ।इस तरह के प्रसंग पर आपका यह कहना उचित होगा कि आप सभी की हमें सहयोगात्मक सलाह अपेक्षित है ,और आप सभी का हम सलाहात्मक सहयोग चाहते हैं। ।अर्थात सलाह और सहयोग दोनों ही महत्वपूर्ण है, और उससे भी महत्वपूर्ण है उसकी उपयोगिता ।कई लोग कहते हैं कि पहले बीज आया अथवा वृक्ष। जिस प्रकार यह प्रश्न भी हमेशा से ही शाश्वत है परंतु बीज की भी अपनी उपयोगिता है और वृक्ष की भी अपनी उपयोगिता है। ठीक उसी प्रकार सलाह और सहयोग दोनों की अपनी-अपनी उपयोगिता है ।एक अच्छी सलाह से सहयोग भी दिया जा सकता है और अच्छे सहयोग से सलाह भी दी जा सकती है। आचार्य कहते हैं विधि द्रव्य दातृ पात्र विशेष:तत विशेष । अर्थात हर उस सलाह और सहयोग को कार्यकारी बनाता है ,महत्वपूर्ण बनाता है, उपयोगी बनाता है उसकी विधि विशेष ,उसकी द्रव्य विशेष, उसका दाता विशेष और उसका पात्र विशेष ।विधि अर्थात प्रक्रिया (प्रोसेस )द्रव्य अर्थात सामग्री (कंटेंट )दातृ अर्थात दाता (देने वाला) (गिवर )पात्र अर्थात ग्रहण करने वाला (रिसीवर)। आपका सलाहकार कौन है यह बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि दुर्योधन शकुनि से सलाह लेता था और अर्जुन श्रीकृष्ण से ।आपके सहयोगी कौन हैं यह भी बड़ा महत्वपूर्ण है क्योंकि राम के भाई लक्ष्मण ने सहयोग दिया तो राम को विजयश्री प्राप्त हुई और रावण के भाई विभीषण ने असहयोग किया तो रावण को मृत्यु श्री प्राप्त हुई ।जब हम किसी से कुछ भी सहयोग चाहते हैं तो आपको आपके सहयोगी की कुछ सलाह भी मानना पड़ेगी। आप देखेंगे कि आप जब उसकी सलाह मानते हैं तो उसका भी बहु मान रह जाता है और उसका आपके प्रति समर्पण भी बढ़ जाता है।एक मजबूत संगठन की नींव है प्रत्येक सहयोगी को साथ लेकर चलना। प्रत्येक व्यक्ति को उसकी योग्यता अनुसार कार्य का विभाजन कर देने से वह अपने कार्य के संपादन में व्यस्त हो जाता है ।कार्यकर्ता की व्यस्तता ही संगठन का प्राण है ।जिससे संगठन मजबूत होता चला जाता है। जब आपके पास उच्च श्रेणी के सलाहकार एवं सहयोगी होंगे तब आपका संगठन भी स्वयमेव उत्कृष्टता को प्राप्त हो जाएगा। दीपक मिट्टी का है या सोने का यह महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि वह कितनी रोशनी दे रहा यह महत्वपूर्ण है ।इसी प्रकार आपके सलाहकार एवं सहयोगी कैसे हैं वह आपका कितना सहयोग करते हैं ।किस स्तर की आपको सलाह देते हैं यह महत्वपूर्ण है। चाहे वह आपसे उम्र में ,वैभव में या पद में छोटा ही क्यों ना हो यह महत्वपूर्ण नहीं है। कहावत है डूबते को तिनके का सहारा अर्थात जो व्यक्ति पतन को प्राप्त हो रहा हूं उसे आपका जरा सा भी हंस्तावलम्वन सहारा दे सकता है ।यही सही मानवता है ।मरे हुए को मारना कोई महान कार्य नहीं है ।महानता तो तब है जब कोई मरे हुए को जीवन प्रदान कर दें। किसी विद्वान ने कहा है सारे साथी काम के सबका अपना मोल ,जो संकट में साथ दें वह सबसे अनमोल।जयकुमार जैन जलज
: नगर गौरव का आज नगर में होगा नगर प्रवेश,आचार्य विभव सागर जी महाराज आज हटा आयेगें
Sun, Mar 5, 2023
नगर गौरव का आज नगर में होगा नगर प्रवेश,आचार्य विभव सागर जी महाराज आज हटा आयेगेंजो कभी नगर की गलियों में लुकाछिपी खेलते, साइकिल चलाते वही आज वैराग्य धारण कर आ रहे हैहटा दमोह।वर्ष २०११ में नगर में ऐतिहासिक, गौरवशाली पंचकल्याणक कराने वाले जैन दिगम्बर संत आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज का २० पिछियों के साथ नगर में ०६ मार्च सोमवार मंगल प्रवेश हो रहा है।ज्ञातव्य हो कि इस आचार्य संघ में नगर के दो वैराग्यधारी भी है, नगर की गलियों में कभी साइकिल से इधर उधर दिखने वाले नितिन चुनु भैया जिन्होने अपनी युवा अवस्था में वैराग्य के मार्ग पर चल दिया था अब मुनिश्री शुद्दात्म सागर बनकर पहली बार नगर में आ रहे है, वही बिटिया प्रिया जिसने प्रारंभ से ही अपना जीवन आत्मकल्याण धर्म के लिए समर्पित कर दिया वही बिटिया आज आर्यिका श्री सिद्धमति के रूप में नगर में पधार रही है।आचार्य संघ का रविवार को दोपहर में कुण्डलपुर से मंगल बिहार हुआ, रात विश्राम रास्ते में होगा, सुबह ९ बजे हटा में मंगल प्रवेश होगा, आचार्य संघ की अगवानी के लिए नगर की सकल जैन समाज के द्वारा सभी से पटेरा नाका पर पहुंचने की अपील की गई है।