भगवान परशुराम जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं ,, परशुराम जयंती पर हार्दिक अभिनंदन
प्रभु परशुराम पर दोहे
परशुराम प्रभु नाम है, शक्ति शौर्य का रूप।विप्र शिरोमणि आप हैं, भार्गव वंश अनूप।। पिता जमदग्नि सुत प्रबल, मात रेणुका लाल।फरसा कर में धारते, तेज प्रचंड विशाल।। लड़ते रहे अधर्म से, क्रोध अग्नि अवतार।शस्त्र ज्ञान बुद्धि प्रबल, महिमा अपरम्पार।। शिव के अनुपम शिष्य हैं, विद्या प्रबल प्रवीण।न्याय हेतु लड़ते सदा, रखते धर्म नवीन।। दानवीर अति वीर वर, कर दी पृथ्वी दान।हृदय भाव वैराग्य का, तज मन का अभिमान।। ब्राह्मण तेज अनूप है, वाणी में थी धार।सत्य हेतु संघर्षरत, करते नहीं विचार।। टूटा जब गुरु का धनुष, लिया क्रोध अवतार।शांत हुए तत्काल फिर,देख राम व्यवहार। भीष्म, द्रोण गुरु आप हैं,आप सत्य संधान।शस्त्र आप से सीख कर, मिला कर्ण को ज्ञान। परशु जयंती आज है, करते सुमिरन ध्यान।जीवन में साहस भरें, करें धर्म का मान।। विप्र शिरोमणि आप हैं, शक्ति बुद्धि आधार।पाप मिटे इस धरा से, हो सबका उद्धार।। विप्र वंश पर हो कृपा,दो बल विद्या दान।अन्यायों से हम लड़ें,रहे न मन अभिमान। ✒️
सुशील शर्मा
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ब्राह्मणत्व की ज्योति
(दो कविताएं - सुशील शर्मा)
1ब्रह्म के पथ पर जो चलता है।ज्ञान दीप सा जो जलता है।शांत, सरल, सहिष्णु, विवेकी,धर्म हेतु जो हिम सा गलता है। वेद ऋचाओं का स्वर बनकर,ज्ञान फैलता मंत्रों को गाकरवह ब्राह्मण है, सृष्टि का दीपकजो अन्याय से लड़ता है संघर्ष चुन कर। ज्ञान देकर भी जो पीड़ा सहता हैनहीं अहंकारों में ब्राह्मण बहता है।सत्य-मार्ग का वह पथिक सनातन हैराष्ट्र के लिए समर्पित जिसका जीवन है। 2 वेदों की वीणा के झंकृत स्वर,यज्ञों की अग्नि में तप कर।श्लोकों की धारा, मंत्रों का आवाहन।ब्रह्मस्वरूप वह ज्ञान अवगाहन। सृष्टि के सूरज की पहली किरण,संस्कारों की धरती पर गुणों का आवरण।जगत का वह प्रथम पुरोहित है,जिसकी वाणी में सत्य आरोहित है। वर्तमान में भी जो प्रासंगिक है।संस्कारों का जो आनुषंगिक है।मानवता का जो दीप जलाता है,ब्राह्मण दाधीच सा स्वयं को मिटाता है। ✒️
सुशील शर्मा
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आपका परशुराम अवतरण दिवस पर आत्मीय अभिनंदन भगवान परशुराम आपको यश,विद्या ,बुद्धि ,बल प्रदान करें।