: भगवत गीता का संदेश देकर कर रहे कृष्ण भक्ति का प्रचार
Fri, Nov 11, 2022
भगवत गीता का संदेश देकर कर रहे कृष्ण भक्ति का प्रचारगाडरवारा। नगर में इनदिनों इस्कॉन मंदिर उज्जैन से आये कृष्णभक्त सीतानाथ दास एवं श्यामवल्लभ जी जन जन से मिलकर श्रीमद भागवत गीता का प्रचार करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के संदेश को पहुंचाने का अनुपम कार्य कर रहे है । उनके द्वारा स्थानीय सरस्वती उच्चतर माध्यनिक विद्यालय एवं ज्ञानसागर विद्यालय मनकवारा में जाकर छात्र छात्राओं को श्रीमद भगवत गीता से जुड़ी जानकारी देते हुए कहा कि जीवन में सदैव आगे बढ़ने के लिए गीता का ज्ञान जरूरी है। श्रीमद भगवत गीता के अध्ययन से बहुत ही अच्छी बातें सीखने को मिलती है। उल्लेखनीय है कि रात्रि के समय स्थानीय माहेश्वरी भवन में भी इस्कॉन मंदिर से आये लोगो द्वारा हरे रामा हरे कृष्णा भजन गाया जाता है।
: कुंडलपुर, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आचार्य पदारोहण दिवस पर हुए विविध धार्मिक कार्यक्रम
Thu, Nov 10, 2022
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आचार्य पदारोहण दिवस पर हुए विविध धार्मिक कार्यक्रमकुंडलपुर। श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में संत शिरोमणि परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में शिखर मंदिर प्रांगण में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का 51 वे दीक्षा दिवस पर विविध धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए ।इस अवसर पर एक ओर जहां पूज्य बड़े बाबा मंदिर में भक्तांमर महामंडल विधान ,अभिषेक शांतिधारा, पूजन विधान संपन्न हुआ ।वहीं दूसरी ओर वर्धमान सागर के सामने स्थित शिखर मंदिर में श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा ,आचार्य श्री की पूजन एवं आचार्य छत्तीसी विधान का आयोजन कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी एवं स्थानीय जैन समाज, उपस्थित तीर्थयात्रियों ने बड़े उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लेकर शातिशय पुण्य अर्जन किया। इस अवसर पर मुनि श्री 108 निरंजन सागर जी महाराज ने अपनी मंगल वाणी में बताया कि आज का दिन इतिहास का दिन है क्योंकि आज के दिन एक ऐसा इतिहास लिखा गया जो युग युगांतर तक एक ऐसी अमिट छाप इस संस्कृति के ऊपर डाल गया जिसके माध्यम से आज पूरा विश्व प्रकाशमान हो रहा है ।पूज्य आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज ने अपने श्रेष्ठ शिष्य मुनि श्री विद्यासागर जी महाराज को आज के दिन आचार्य पद दिया था। आचार्य पद की गरिमा को रखते हुए आचार्य महाराज ने पूर्व आचार्यों द्वारा लिखित आचार्य भक्ति में आचार्यों के लिए जो जो उपमाये दी हैं उनको अपने जीवन में साकार कर दिखाया है ।जिसके कारण आज पूरी श्रमण संस्कृति प्रकाशमान है और अपनी श्रेष्ठता को प्राप्त हो रही है ।आज इतनी विशाल विराट संघ की स्थापना करके आचार्य श्री ने अपने गुरुदेव के उस कथन को साकार किया है क्योंकि पूज्य ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा था कि कुल को गुरुकुल बनाना है आज गुरुकुल बनाकर पूरे विश्व में जैन धर्म का परचम लहरा दिया है ।मुनि श्री ने आचार्य कुंदकुंद स्वामी द्वारा रचित आचार्य भक्ति की गाथा को समझाते हुए बताया उत्तम क्षमा से जो पृथ्वी के समान हैं, प्रशन्न भाव से जो स्वच्छ जल के समान हैं , कर्म ईंधन को जलाने से अग्नि है, परिग्रह रहित होने से वायु है, आकाश के समान वह निरुपलेय है । प्रचार मंत्री जयकुमार जलज ने बताया इस अवसर पर शांति धारा करने का सौभाग्य अरहंत पायल जैन प्रेमी परिवार कटनी विनोद कुमार पारस जैन पठारी विदिशा ,प्रथम कलश करने का सौभाग्य सुनील कुमार गिरीश दीपक जैन जयपुर, मनोहरलाल अनिल अभिषेक बरमान नरसिंहपुर को प्राप्त हुआ, रिद्धि मंत्र अभिषेक करने का सौभाग्य नेमिश अभिषेक अजय चूडीवाल अहमदनगर ,कमलेश संदीप लाभांश चांदमल संघी कोटा राजस्थान को प्राप्त हुआ।