: भगवान कृष्ण ने स्वयं भूतल में आकर हमें गो सेवा का मंत्र दिया गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज
Mon, Mar 31, 2025
भगवान कृष्ण ने स्वयं भूतल में आकर हमें गो सेवा का मंत्र दिया गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज
सुसनेर। मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के उपसंहार उत्सव के द्वितीय दिवस पर पूज्य गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज द्वारा एक वर्षीय गौ आराधना महा महोत्सव के अंतर्गत भक्त चरित्र नरसिंह मेहता का परम पावन चरित्र प्रसंग नानी बाई के मायरे के माध्यम से आगे की कथा सुनाते हुए कहा कि परम पावन इस दिव्य तीर्थ गो अभयारण्य की इस भूमि पर वर्ष पर्यन्त गो महिमा का गान होता रहा है और अभी दिव्य भाव से शिव शक्ति यज्ञ यहां संपादित हो रहा है जबकि यहां बहुत अधिक पेड़ भी नहीं है बहुत अधिक जल के स्रोत भी नहीं हैं है और इस पूरे जंगल के पथरीले पठार में यहां रहकर जो गो सेवा हो रही है और जो सेवा कर रहे हैं वह अदभुत है और निश्चित मानिए कि बिना गोपाल कृष्ण की कृपा व आशीर्वाद के बिना यह संभव नहीं हैमहाराज जी ने बताया कि जिस प्रकार गांव के व्यक्ति को अपने गांव के जीवन में शहर वाले को शहर के जीवन में रस मिलता है,उसी प्रकार जो गो सेवा में रस आता है, उसको लगता है जो रस गोमाता के गोष्ठ में गो सेवा से मिलता है उतना रस बड़े बड़े शहरों में नहीं मिलता । भगवान ने अनेक अवतार लिए और खूब पराक्रम दिखाया लेकिन नारद जी ने भगवान को कहां कि प्रभु ऐसे अवतार लीजिए जिसके माध्यम से आप कुछ करके दिखाएं ताकि आपका वे अनुसरण कर सकें और भगवान ने द्वापर में कृष्णावतार लेकर पहले माखन की चौरी की और फिर गोचारण किया । आजकल लोगों का मानना है कि पंचगव्य उत्पाद का प्रचार किसी बड़े फिल्म स्टार अथवा खिलाड़ी से करवाना चाहिए ताकि माल अधिक सकें इसपर महाराज जी ने बताया कि कोई नेता अभिनेता किसी वस्तु का प्रचार करें तो उसमें खोट हो सकती है लेकिन जिस पदार्थ का भगवान ने स्वयं प्रचार किया उसमे कोई खोट नहीं हो सकती भगवान ने माखन चोरी करके पंचगव्य का प्रचार किया और दूसरा गो चारण करके गो सेवा का यानि भगवान कृष्ण ने स्वयं भूतल में आकर हमें गो सेवा का मंत्र दिया भगवान ने स्वयं कहां कि जो फल मदभागवत के परायण के पाठ करने से मिलता है वहीं फल गो सेवा से मिलता है, इसलिए हम सभी गव्य को अमृत समझकर उसका उप एवं प्रचार करें और जिस प्रकार भगवान ने कृष्णावतार में गौसेवा की उसे हम भी दोहराकर भगवान को प्रसन्न कर सकते है।महाराज जी ने नरसी मेहता जी की कथा के माध्यम से बताया कि सम्पता, विपन्नता सबको दिखती है लेकिन भक्ति किसी की नहीं दिखती और नरसी मेहता ने कुछ पाने के लिए भक्ति नहीं की लेकिन भगवान ने बिना मांगे सबकुछ दे दिया और भक्ति का सबसे श्रेष्ठ साधन गो सेवा है क्योंकि गो सेवा के बिना तो किसी भी प्रकार की कल्पना नहीं की जा सकती और जीवन में वही श्रीमंत है,जिसका जीवन उपयोगी है। महाराज जी ने बताया कि नरसी जी की तरह इस अभयारण्य की स्थिति है,लेकिन भगवान की कृपा की कृपा से आज यहां आनन्द हो रहा है और यह एक सिद्ध क्षेत्र बन गया है ओर यहां जो जो भी आएंगे उनके सारे कष्ट भगवान मिटा देंगे और अंत में पूज्य गो वत्स राधा कृष्ण जी महाराज का आभार जताते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि भगवान के बहाने जब आपने भगवान की कथा सुनाई तो ऐसा लगा कि यह अभयारण्य नरसी जी की भूमिका में है और आप नानी बाई के भाई भगवान कृष्ण के रूप में यहां पधारे है।*उपसंहार उत्सव के तृतीय दिवस 01 अप्रेल को आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक पूज्य श्री श्री रवि शंकर जी महाराज जी के कृपा पात्र शिष्य स्वामी हरिहर जी महाराज का पावन आशीर्वाद मिलेगा।एक वर्षीय गोकृपा कथा के उपसंहार उत्सव के द्वितीय दिवस पर चुनरी यात्रा मुंबई से नरेंद्र पुरोहित, कोटा से सुरेंद्र शर्मा , भवानीमंडी रवि , कपिल भराडिया ,खानपुर के गोलाना ग्रामवासी, ,खानपुर,झालावाड,सेमली खाम, धरोनिया, भोपाल से श्रीमति निर्मला माधव चतुर्वेदी dysp,ब्यावर के कोटडा केसर सिंह गोमाता के लिए मायरा ,नलखेड़ा सुई गाँव,रतलाम के.पिपलोदा तहसील के रानीगांव, रियावन एवं-संत श्री आसाराम जी गौशाला , सुसनेर आदि ने सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।
: कष्ट उठाने वाले ही कष्ट दूर कर सकते है, गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज
Mon, Mar 31, 2025
कष्ट उठाने वाले ही कष्ट दूर कर सकते है, गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज
सुसनेर। जनपद सुसनेर क्षेत्र में मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित विश्व के प्रथम गो अभयारण्य सालरिया में चल रहें एक वर्षीय गो आराधना महामहोत्सव के उपसंहार उत्सव के प्रथम दिवस भारतीय नूतन वर्ष विक्रम संवत् २०८२ रविवार को श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा लोक पुण्यार्थ न्यास के न्यासी बोर्ड कार्यकारिणी एवं सुरभि प्रज्ञा परिषद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के कार्यकारी प्रधान संरक्षक परम गो वत्स पूज्य राधाकृष्ण जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में बताया कि एक बार भानपुरा पीठ के जगतगुरू शंकराचार्य पूज्य स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरी जी महाराज ने हरिद्वार में एक सन्यासी को बताया कि राजस्थान में एक ऐसा स्थान है जहां लाखों गोमाता की सेवा होती है और वहां एक समय के चारे की ही व्यवस्था रहती है लेकिन वहां एक ऐसे संत है जो सायंकाल के चारे के लिए भजन करते है और ठाकुर जी चारे की व्यवस्था कर देते है,ऐसे दिव्य संत है पूज्य पथमेड़ा महाराज जी ,जिनका जन्म केवल भगवती माता की सेवा के लिए ही हुआ है।पूज्य महाराज जी ने आगे बताया कि भगवती गोमाता के लिए अगर कष्ट उठाना पड़े तो हमें घबराना नहीं चाहिए क्योंकि "कष्ट उठाने वाले ही कष्ट दूर सकते है " साथ ही गौसेवा करने वालों की बैठक देश के क्रांतिकारियों की बैठकों की तरह होनी चाहिए और हमारे हर न्यासी को इस बात का गर्व होना चाहिए कि हम विश्व के लोक प्रसिद्ध गोसेवा संस्थान के न्यासी है और हर कार्यकर्ता को यह ध्यान में रखते हुए कार्य करना चाहिए कि पूज्य पथमेड़ा बावजी हमारे हृदय में है इस प्रकार हम कार्य में जुटेंगे तो हम श्रेष्ठ कार्य कर पाएंगे साथ ही महाराज जी ने कहा कि आजकल किसी भी सत्संग एवं कथा की धन इकठ्ठा करने का माध्यम मानकर हम जाने अनजाने में भगवान का अपमान कर रहे है जबकि सत्संग एवं कथा तो केवल भाव जागृत करने का माध्यम होना चाहिए । बैठक में श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के राष्ट्रीय संयोजक ग्वाल संत गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने बताया कि हमें ईमानदारी पूर्वक अपने दायित्व का निर्वहन करना चाहिए ओर हम अपने परिवार को भी गोसेवा के कार्य से जोड़ेंगे तो हम हमारे कार्य को ओर अच्छे से कर पाएंगे ।अरबुदा गो नंदी तीर्थ के संरक्षक गोविन्द वत्सल दास जी ने बताया कि गोमाता का कार्य ईश्वरीय कार्य है और इसके लिए भगवान ने हमें निमित्त बनाया है यह हमारा शौभाग्य है साथ ही मनुष्य को कभी यह अंहकार नहीं करना चाहिए कि यह मैने किया है और जहां मैं की भावना आ जाती है वहीं से उस मनुष्य के पतन की शुरुआत हो जाती है और जिसके मन में दृढ़ संकल्प हो ओर मन में पक्का विश्वास हो तो कार्य में कोई बाधा नहीं आती ।गोपाल परिवार से वरिष्ठ साध्वी कपिला गोपाल सरस्वती ने बताया कि गौसेवा में मातृशक्ति की भी अहम भूमिका होनी चाहिए और जिस कार्य में मातृशक्ति का सहयोग पुरुष को मिलता है वह कार्य और श्रेष्ठता से होता है और पूज्य गुरुदेव स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती महाराज के मार्गदर्शन में धेनु शक्ति संघ नामक संगठन मातृशक्ति के लिए गठित किया है,जिसमें पांच हजार गोव्रती माता बहिनों के माध्यम से एक करोड़ माता बहिनों को गो सेवा कार्य में जोड़ा जाएगा ।बैठक में श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा लोक पुण्यार्थ न्यास के अध्यक्ष प्रदीप बंसल,कार्यकारी अध्यक्ष रघुनाथ सिंह,महामंत्री अर्जुन सिंह एवं कोषाध्यक्ष ओम प्रकाश जी ने आगामी वर्ष की कार्य योजना पर अपने विचार रखे ,बैठक में देश भर के सभी न्यासियों ने मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित विश्व के प्रथम गो अभयारण्य जो 01 जनवरी 2023 से विश्व के लोक प्रसिद्द गो सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित है,उसे विश्व का प्रसिद्द गो पर्यटक स्थल बनाने एवं मध्यप्रदेश के यशस्वी गोसेवक मुख्यमंत्री जी की इच्छानुसार इस गो अभयारण्य का नाम परिवर्तन कर *श्री कामधेनु गोकुल गोधाम* करने का प्रस्ताव लेकर राज्य सरकार को भिजवाने का निर्णय लिया बैठक का संचालन कार्यपालन अधिकारी आलोक सिंहल ने किया बैठक में देशभर के सभी राज्यों के 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया ।
: ईद का चांद नजर आया कल सुबह 8:00 बजे अदा की जाएगी नमाज
Sun, Mar 30, 2025
भारत में नजर आया चांद कल 31 मार्च 20 25 को मनाई जाएगी ईद
Kamarrana
देवरी रायसेन__ ईद का चांद दिखाई दे चुका है और अब कल 31 मार्च सोमवार को पूरे देश में ईद का उत्सव बड़े ही आन बान और शान के साथ मनाया जाएगा।
मुस्लिम समुदाय के लिए ईद एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। इस दिन बेसब्री से इंतजार बच्चों से लेकर वयस्कों तक सभी करते हैं।
जैसे ही ईद का चांद नजर आया मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक दूसरे को ईद की शुभकामनाएं दी।
नगर देवरी में सुबह 8:00 बजे ईदगाह पर ईद की नमाज अदा की जाएगी ।
--ईद उल फितर का महत्व___
ईद उल फितर का मतलब है रोजा खोलने का त्यौहार,
यह रमजान के समापन का उत्सव है, जो इबादत, दान आत्मज्ञान का महीना होता है।
इसे इस्लाम की पांच प्रमुख शिक्षाओं में से एक माना जाता है ।
और इसे लोगों से गले मिलकर गरीबों को दान देकर खुशियों के साथ सभी मानते हैं।