: नरसिंहपुर। प्रधानमंत्री द्वारा उज्जैन में "महाकाल लोक" के प्रथम चरण का लोकार्पण 11 अक्टूबर को जिले के मंदिरों एवं नर्मदा घाटों पर भी होंगे पूजा- अर्चना के विशेष कार्यक्रम
नरसिंहपुर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार 11 अक्टूबर को उज्जैन में ज्योर्तिलिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शनार्थियों की सुविधा, विस्तार और सौंदर्यीकरण के निमित्त नवनिर्मित "महाकाल लोक" के प्रथम चरण का लोकार्पण करेंगे। श्री महाकाल लोक का कार्यक्रम उज्जैन सहित सम्पूर्ण प्रदेश के लिए गौरव का दिन होगा। उक्त कार्यक्रम का जिले के बड़े मंदिरों में सायं 5 बजे से सीधा प्रसारण किया जाएगा। जिससे जिलेवासी इस गौरवपूर्ण कार्यक्रम के सहभागी व साक्षी बन सकें। जिले के प्रमुख स्थलों पर भी महाकाल लोक के लोकार्पण कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जायेगा। इसके लिए जिले में 16 मंदिरों और 15 नर्मदा घाटों का चिन्हांकन आरती व नर्मदाष्टक के कार्यक्रम के लिए किया गया है।
दीपेश्वर मंदिर बरमान खुर्द
इसी क्रम में जिन मंदिरों में कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं, उनमें से दीपेश्वर मंदिर- जिले की गाडरवारा तहसील के बरमानखुर्द में नर्मदा और बरहीं नदियों का पवित्र संगम है। यह स्थान नर्मदा नदी के दोनों तटों पर विभिन्न कालों में निर्मित विभिन्न देवताओं के अनेक पुराने मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। मंदिरों और सुंदर सीढ़ियों की पंक्तियों से युक्त स्नानघाटों की श्रृंखला दर्शकों का मन मोह लेती है। नदी के दक्षिणी तट पर स्थित भगवान शिव का विशाल दीपेश्वर मंदिर है। इसे रानी दुर्गावती का मंदिर कहा जाता है और इसके निर्माण की कथा गढ़ा- मंडला की प्रसिद्ध रानी दुर्गावती से संबद्ध है, किंतु मंदिर के एक शिलालेख पर संवद् 1867 अंकित है। इस तट पर एक लक्ष्मी नारायण का मंदिर है और एक अन्य मंदिर भी है, जो पिसनहारी मंदिर कहलाता है। पिसनहारी के मंदिर के संबंध में यह कहा जाता है कि इसका निर्माण एक गरीब पिसनहारी द्वारा अपनी अल्प आय में से करवाया गया था। उत्तरी तट के घाट और सीढ़ियों की पंक्तियां एक द्वार तक जाती है, जो हाथी दरवाजा जिससे में हाथी निकल सकता है कहलाता है। इस घाट पर भी अनेक मंदिर बने हुए हैं। इनमें एक मंदिर बैरागी का मन्दिर कहलाता है, जिसका निर्माण इन्दौर के एक बैरागी द्वारा किया गया था। यहां राम और लक्ष्मण का एक मंदिर भी है जिसके सामने एक प्रस्तर स्तम्भ है 
नरसिंहपुर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार 11 अक्टूबर को उज्जैन में ज्योर्तिलिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शनार्थियों की सुविधा, विस्तार और सौंदर्यीकरण के निमित्त नवनिर्मित "महाकाल लोक" के प्रथम चरण का लोकार्पण करेंगे। श्री महाकाल लोक का कार्यक्रम उज्जैन सहित सम्पूर्ण प्रदेश के लिए गौरव का दिन होगा। उक्त कार्यक्रम का जिले के बड़े मंदिरों में सायं 5 बजे से सीधा प्रसारण किया जाएगा। जिससे जिलेवासी इस गौरवपूर्ण कार्यक्रम के सहभागी व साक्षी बन सकें। जिले के प्रमुख स्थलों पर भी महाकाल लोक के लोकार्पण कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जायेगा। इसके लिए जिले में 16 मंदिरों और 15 नर्मदा घाटों का चिन्हांकन आरती व नर्मदाष्टक के कार्यक्रम के लिए किया गया है।
नरसिंह मंदिर नरसिंहपुर
इसी क्रम में जिन मंदिरों में कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं, उनमें से नरसिंह मंदिर- जिला मुख्यालय नरसिंहपुर का नाम यहां विष्णु के अवतार भगवान नरसिंह के मंदिर के निर्माण के कारण पड़ा।
जिले और मुख्यालय नगर दोनों का एक ही नाम नरसिंहपुर नरसिंहजी के मंदिर के कारण पड़ा है, जो हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान के सिंह के सिर वाले मानव अवतार हैं। सन् 1782 के पश्चात् एक जाट लुटेरा मुख्यालय ग्राम चांवरपाठा परगने को छोड़कर, जो मराठों के अधिकार में था, जिले के वर्तमान मुख्यालय में आ बसा, जो उस समय एक छोटासा गांव था और गडरियाखेड़ा कहलाता था और बाद में छोटा गाडरवाड़ा कहलाने लगा। उसने दिल्हेरी और पिथेरा के जागीरदारों को लूटा और इस स्थान पर लूट की कुछ सामग्री से एक महल नरसिंह जी का मंदिर बनवाया। उसने ही इस मंदिर के नाम पर इस गांव का यह नाम रखा। तथापि, उस समय तक यह जिला नरसिंहपुर नहीं कहलाता था और उसे शाहपुर ही कहा जाता था, जो कि पुराने परगने का मुख्यालय था।
नरसिंहपुर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार 11 अक्टूबर को उज्जैन में ज्योर्तिलिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शनार्थियों की सुविधा, विस्तार और सौंदर्यीकरण के निमित्त नवनिर्मित "महाकाल लोक" के प्रथम चरण का लोकार्पण करेंगे। श्री महाकाल लोक का कार्यक्रम उज्जैन सहित सम्पूर्ण प्रदेश के लिए गौरव का दिन होगा। उक्त कार्यक्रम का जिले के बड़े मंदिरों में सायं 5 बजे से सीधा प्रसारण किया जाएगा। जिससे जिलेवासी इस गौरवपूर्ण कार्यक्रम के सहभागी व साक्षी बन सकें। जिले के प्रमुख स्थलों पर भी महाकाल लोक के लोकार्पण कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जायेगा। इसके लिए जिले में 16 मंदिरों और 15 नर्मदा घाटों का चिन्हांकन आरती व नर्मदाष्टक के कार्यक्रम के लिए किया गया है।
गरूड़ मंदिर गरारू
इसी क्रम में जिन मंदिरों में कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं, उनमें से गरूड़ मंदिर गरारू- गरारू में नर्मदा तट के समीप स्थित ऐतिहासिक महत्व के राज्य संरक्षित स्मारक गरूड़ मंदिर एक पूर्वाभिमुखाप्रतिमा विहीन है। इस मंदिर का स्थापत्य इंडो इस्लामिक शैली का है। इस मंदिर का निर्माण 17 वीं शती ई. में स्थानीय गौड़ शासक बलवंत सिंह द्वारा कराया गया। यह मंदिर पंचायतन शैली में निर्मित किया गया है। संभवत: इस मंदिर में गरूड़ प्रतिमा स्थापित रही होगी, जिसके कारण ग्राम का नाम गरूड़पुरी जो अपभ्रंश होकर गरारू हो गया।
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