: पृथ्वी का स्वरूप ही गोमाता है और गैया है तभी हमारी कृषि है*- गोभक्त विष्णु प्रिया ,बाल कथा प्रवक्ता
पृथ्वी का स्वरूप ही गोमाता है और गैया है तभी हमारी कृषि है*- गोभक्त विष्णु प्रिया ,बाल कथा प्रवक्ता
सुसनेर। मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के उपसंहार उत्सव त्रयोदश दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने बताया जिन गाय माता की हमें संतो ने जो महिमा बताई है वह किसी से छिपी नहीं है।
दिल्ली से पधारे संत भक्त माली जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि जहां पर सभी तीर्थों का वास है ऐसे स्थान से पूरे देश के लिए गौ भक्ति का संदेश देने का मुझे भी सौभाग्य मिला है। हमारी आवश्यकता यह है कि गोपालन और गो संरक्षण के लिए हम सबको जुटना चाहिए और मोदी जी भी चाहते हैं गौ माता राष्ट्र माता घोषित हो लेकिन पूरे देश से आवाज तो उठे इसके लिए अब सत्याग्रह जैसा कानून हमें लाना होगा और हमें आंदोलन करना पड़ेगा जो जहां है वहीं से गाय माता को राष्ट्र माता घोषित करवाने के लिए अब आगे आना होगा और हमारे देश में गौ रक्षा कानून बनना चाहिए व देश में गौ हत्या बंद होना चाहिए।
गोभक्त विष्णु प्रिया दीदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पृथ्वी का स्वरूप ही गोमाता है और भगवती गोमाता है तभी हमारी कृषि है और हम भारतवासी ही नहीं बल्कि विदेशी भी स्वीकार करते है कि गोमाता एक डॉक्टर है जिसके माध्यम से सभी बीमारियों का उपचार होता है अर्थात जिस गोमाता के लिए साक्षात भगवान ने गो सेवा के लिए स्वयं ने मनुष्य जीवन धारण कर अवतार लिया है और त्रेता में भगवान राम स्वयं सेवा नहीं कर पाएं तो द्वापर में उन्होंने कृष्ण के रूप में अवतार लेकर स्वयं ने गो सेवा की है और गोपाल ने गोवर्धन पूजा एवं गोचारण दो लीला स्वयं ठाकुर जी ने की है तो हमें भी गाय माता की सेवा और गोपालन करना चाहिए ।
दयानंद शास्त्री जी महाराज ने कहां कि यदि सरकार प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर 5 बीघा जमीन गोमाता के लिए उपलब्ध करवा दे तो भारत में एक भी गोमाता निराश्रित नहीं रहेगी ।
ब्रजभूमि से पधारे दिव्य संत एवं भागवतवेत्ता पूज्य आचार्य प्रवर पुराणाचार्य महाभाग श्री मृदुल कांत शास्त्री जी महाराज, पूज्य श्री आनंद वल्लभ गोस्वामी जी महाराज,.मुख्य सेवायत - श्री बांके बिहारी मंदिर एवं अध्यक्ष - अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा, वृंदावन, पूज्य महंत श्री विमल चैतन्य जी महाराज पीठाधीश्वर - नारद भक्ति आश्रम, वृंदावन, पूज्य श्री हरिहर मुदगल शास्त्री जी महाराज*“ भागवताचार्य “ वृंदावन, पूज्य श्री सुमन्त कृष्ण शास्त्री जी महाराज “ भागवताचार्य “*अध्यक्ष : श्री कन्हैया सेवा संस्थान एवं गौ सेवा धाम गौशाला, श्री मथुरा वृंदावन धाम एवं पूज्य गोपेशकृष्ण दास जी महाराज सभी ने अपने आशीर्वचन में बताया कि इस गो अभयारण्य में आकर हमें वास्तविक गोकुल की अनुभूति हो रही है और हम सभी पूज्य स्वामी गोपालानंद जी महाराज से आग्रह करते है कि इस गो अभयारण्य का नाम श्री कामधेनु गोकुल धाम रखना चाहिए इस पर महाराज जी ने सभी संतो को बताया कि मध्यप्रदेश के गो सेवक मुख्यमंत्री जी ने अपने जन्मदिवस पर इस गो अभयारण्य का नाम श्री कामधेनु गोकुल गोधाम रखने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए है ।
पूज्य रघुवीर दास जी महाराज सहित भीलवाड़ा एवं अन्य क्षेत्र के पधारे संतो ने अपना आशीर्वाद प्रदान किया ।
उपसंहार उत्सव के त्रयोदश दिवस पर धेनु शक्ति संघ के तत्वाधान में आयोजित आत्म रक्षा एवं गो रक्षा शिविर में भाग लेने वाली बहिनों ने मलखंभ,जुड़े कराटे, दंडयुद्ध एवं तलवार बाजी आदि का प्रदर्शन कर अपनी वीरता का परिचय दिया ।
उपसंहार उत्सव के त्रयोदश दिवस पर मध्यप्रदेश गो संवर्धन बोर्ड के अतिरिक्त संचालक प्रवीण शिंदे,भारतीय किसान संघ के बीज प्रमुख कृष्ण मुरारी जी व गोयल ग्रामीण संस्थान कोटा से डॉक्टर पवन टांक सहित महाराष्ट्र ,गुजरात,पंजाब ,छत्तीसगढ़,मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के गो सेवकों अतिथि उपस्थित रहें।
ऋषि कृषि गो आधारित जैविक कृषि के तृतीय दिवस पर बंशी गिर गोशाला कर्णावती अहमदाबाद से गोपाल भाई सूतारिया का मार्गदर्शन मिलेगा।
उपसंहार उत्सव के त्रयोदश दिवस पर अतिथि उपस्थित रहें।
गो अभयारण्य में स्थित रामचौकी में गो ऋषि पूज्य स्वामी दत्तशरणानन्द जी महाराज का सभी गो सेवकों को आशीर्वचन मिला।
एक वर्षीय गोकृपा कथा के उपसंहार उत्सव के त्रयोदश दिवस पर राजस्थान एवं मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़,महाराष्ट्र,गुजरात के गो प्रेमियों ने अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।
सुसनेर। मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के उपसंहार उत्सव त्रयोदश दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने बताया जिन गाय माता की हमें संतो ने जो महिमा बताई है वह किसी से छिपी नहीं है।
दिल्ली से पधारे संत भक्त माली जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि जहां पर सभी तीर्थों का वास है ऐसे स्थान से पूरे देश के लिए गौ भक्ति का संदेश देने का मुझे भी सौभाग्य मिला है। हमारी आवश्यकता यह है कि गोपालन और गो संरक्षण के लिए हम सबको जुटना चाहिए और मोदी जी भी चाहते हैं गौ माता राष्ट्र माता घोषित हो लेकिन पूरे देश से आवाज तो उठे इसके लिए अब सत्याग्रह जैसा कानून हमें लाना होगा और हमें आंदोलन करना पड़ेगा जो जहां है वहीं से गाय माता को राष्ट्र माता घोषित करवाने के लिए अब आगे आना होगा और हमारे देश में गौ रक्षा कानून बनना चाहिए व देश में गौ हत्या बंद होना चाहिए।
गोभक्त विष्णु प्रिया दीदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पृथ्वी का स्वरूप ही गोमाता है और भगवती गोमाता है तभी हमारी कृषि है और हम भारतवासी ही नहीं बल्कि विदेशी भी स्वीकार करते है कि गोमाता एक डॉक्टर है जिसके माध्यम से सभी बीमारियों का उपचार होता है अर्थात जिस गोमाता के लिए साक्षात भगवान ने गो सेवा के लिए स्वयं ने मनुष्य जीवन धारण कर अवतार लिया है और त्रेता में भगवान राम स्वयं सेवा नहीं कर पाएं तो द्वापर में उन्होंने कृष्ण के रूप में अवतार लेकर स्वयं ने गो सेवा की है और गोपाल ने गोवर्धन पूजा एवं गोचारण दो लीला स्वयं ठाकुर जी ने की है तो हमें भी गाय माता की सेवा और गोपालन करना चाहिए ।
दयानंद शास्त्री जी महाराज ने कहां कि यदि सरकार प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर 5 बीघा जमीन गोमाता के लिए उपलब्ध करवा दे तो भारत में एक भी गोमाता निराश्रित नहीं रहेगी ।
ब्रजभूमि से पधारे दिव्य संत एवं भागवतवेत्ता पूज्य आचार्य प्रवर पुराणाचार्य महाभाग श्री मृदुल कांत शास्त्री जी महाराज, पूज्य श्री आनंद वल्लभ गोस्वामी जी महाराज,.मुख्य सेवायत - श्री बांके बिहारी मंदिर एवं अध्यक्ष - अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा, वृंदावन, पूज्य महंत श्री विमल चैतन्य जी महाराज पीठाधीश्वर - नारद भक्ति आश्रम, वृंदावन, पूज्य श्री हरिहर मुदगल शास्त्री जी महाराज*“ भागवताचार्य “ वृंदावन, पूज्य श्री सुमन्त कृष्ण शास्त्री जी महाराज “ भागवताचार्य “*अध्यक्ष : श्री कन्हैया सेवा संस्थान एवं गौ सेवा धाम गौशाला, श्री मथुरा वृंदावन धाम एवं पूज्य गोपेशकृष्ण दास जी महाराज सभी ने अपने आशीर्वचन में बताया कि इस गो अभयारण्य में आकर हमें वास्तविक गोकुल की अनुभूति हो रही है और हम सभी पूज्य स्वामी गोपालानंद जी महाराज से आग्रह करते है कि इस गो अभयारण्य का नाम श्री कामधेनु गोकुल धाम रखना चाहिए इस पर महाराज जी ने सभी संतो को बताया कि मध्यप्रदेश के गो सेवक मुख्यमंत्री जी ने अपने जन्मदिवस पर इस गो अभयारण्य का नाम श्री कामधेनु गोकुल गोधाम रखने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए है ।
पूज्य रघुवीर दास जी महाराज सहित भीलवाड़ा एवं अन्य क्षेत्र के पधारे संतो ने अपना आशीर्वाद प्रदान किया ।
उपसंहार उत्सव के त्रयोदश दिवस पर धेनु शक्ति संघ के तत्वाधान में आयोजित आत्म रक्षा एवं गो रक्षा शिविर में भाग लेने वाली बहिनों ने मलखंभ,जुड़े कराटे, दंडयुद्ध एवं तलवार बाजी आदि का प्रदर्शन कर अपनी वीरता का परिचय दिया ।
उपसंहार उत्सव के त्रयोदश दिवस पर मध्यप्रदेश गो संवर्धन बोर्ड के अतिरिक्त संचालक प्रवीण शिंदे,भारतीय किसान संघ के बीज प्रमुख कृष्ण मुरारी जी व गोयल ग्रामीण संस्थान कोटा से डॉक्टर पवन टांक सहित महाराष्ट्र ,गुजरात,पंजाब ,छत्तीसगढ़,मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के गो सेवकों अतिथि उपस्थित रहें।
ऋषि कृषि गो आधारित जैविक कृषि के तृतीय दिवस पर बंशी गिर गोशाला कर्णावती अहमदाबाद से गोपाल भाई सूतारिया का मार्गदर्शन मिलेगा।
उपसंहार उत्सव के त्रयोदश दिवस पर अतिथि उपस्थित रहें।
गो अभयारण्य में स्थित रामचौकी में गो ऋषि पूज्य स्वामी दत्तशरणानन्द जी महाराज का सभी गो सेवकों को आशीर्वचन मिला।
एक वर्षीय गोकृपा कथा के उपसंहार उत्सव के त्रयोदश दिवस पर राजस्थान एवं मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़,महाराष्ट्र,गुजरात के गो प्रेमियों ने अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।
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