: शाहनगर,पति पत्नी ए एन एम पद से हुये सेवा निवृत्त स्टाप ने दी भाव भीनी विदाई
Sun, Mar 31, 2024
जितेन्द्र दुबे शाहनगर ,पन्ना मध्यप्रदेश
पति पत्नी ए एन एम पद से हुये सेवा निवृत्त ,
स्टाप ने दी भाव भीनी विदाई
शाहनगर । सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र शाहनगर क्षेत्रांतर्गत आने वाले अतरहाई (खम्हरिया )मे पदस्त एम पी ङब्ल्यु श्री संतोष सिंह ठाकुर एवं श्री मति तारा सिंह एवं शाहनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मे पदस्त ए एन एम श्री मति लक्ष्मी वर्मा की स्वास्थ्य विभाग मे रहते हुये पूरी सेवा समाप्त होने पर शाहनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मे30मार्च को भाव भीनी बिदाई दी गयी इस अवसर पर बी एम ओ ङाक्टर सर्वेश लोधी ने तीनो स्टाप के साथियों को श्री फल शाॅल से सम्मानित करते हुये श्री राम चरित मानस भैट स्वरूप दी साथ ही*होली मिलन मे दी बधाई -*रंग पंचमी पर्व को लेकर भी समस्त स्टाप ने एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर रंग पंचमी की बधाई दी इस अवसर पर ङाॅक्टर सर्वेश लोधी ने कहा की आप लोग समस्त स्टाप हमारी ताकत है सेवा निवृत्त हो हम सभी को होना ही है ये रूटीन प्रकिया है आप जहां भी रहे स्वास्थ्य रहे हम सभी तीनों लोगों के स्वस्थ्य रहने की भगवान से मंगल कामना करते हैं । इस अवसर पर बी एम ओ ङाक्टर सर्वेश लोधी रेग्युलर लेखा पाल सुशील गोस्वामी बी पी एम दिनेश मिश्रा बी सी एम अवनीश श्रीवास्तव बी ई ई अभिषेक त्रिपाठी नर्सिंग आफिसर सुमन दुबेदी एफ ङी सन्ध्या सुनामी समस्त सैक्टर सुपरवाइजर ए एन एम एवं एवं सी एच सी मे पदस्त समस्त कर्मचारी उपस्थित रहै कार्यक्रम का सफल मंच संचालन एम टी एस नरेन्द्र तिवारी द्वारा किया गया ।
: गोपी गीत हुए अवतरित तुम जब माधव बैकुंठी ब्रजधाम प्रभो
Sun, Mar 31, 2024
गोपी गीत
(कुकुभ /लावणी /ताटंक छंद,
प्रति चरण 16 ,14 मात्राएँ)
(गोपी गीत पाठ श्रीमदभागवत महापुराण के दसवें स्कंध के रासपंचाध्यायी का 31 वां अध्याय है। इसमें 19 श्लोक हैं। रास लीला के समय गोपियों को मान हो जाता है । भगवान् उनका मान भंग करने के लिए अंतर्धान हो जाते हैं । उन्हें न पाकर गोपियाँ व्याकुल हो जाती हैं |वे आर्त्त स्वर में श्रीकृष्ण को पुकारती हैं, यही विरहगान गोपी गीत है । इसमें प्रेम के अश्रु, मिलन की प्यास, दर्शन की उत्कंठा और स्मृतियों का रूदन है । भगवद प्रेम सम्बन्ध में गोपियों का प्रेम सबसे निर्मल, सर्वोच्च और अतुलनीय माना गया है।) हुए अवतरित तुम जब माधवबैकुंठी ब्रजधाम प्रभो ।शील सुंदरी श्री लक्ष्मी कानिज प्रवास अविराम प्रभो।किये समर्पित प्राण आपकोभटकें दसों दिशाओं में।कृपा करो हे माधव हम परतुम मन की आशाओं में । 1 हृदय नाथ प्रभु आप हमारेहम सेवक तुम स्वामी हो।राजीव लोचन नयन तुम्हारेप्रभु तुम अन्तर्यामी हो।नयन कटारी से हर लीनेतुमने प्राण हमारे हैं।नहीं अस्त्र ही प्राण निकालेंघातक नयन तुम्हारे हैं। 2 पुरष शिरोमणि मुरलीवालेसब के तारण हार प्रभो।हने अघा,वृषभा ,व्योमासुरसबके प्राणाधार प्रभो।गर्व विखंडित किया इन्द्र कानथा कालिया विष लहरी।रक्षित किये प्राण हम सबकेआप प्राण के हैं प्रहरी। 3 मात्र यशोदा पुत्र नहीं तुमअंतरतम जगदीश्वर हो।सचराचर अन्तर्यामी प्रभुसबके तुम परमेश्वर हो।सृष्टि का कल्याण विहित करब्रह्मा जी से प्रार्थित हो।हेतु जगत कल्याण समर्पितयदुवंशी कुल के सुत हो। 4 श्री चरणों में शीश झुका करजो माँगा वह पाता है।शरण तुम्हारी जो भी गहतावह निर्भय हो जाता है।जन्म -मृत्यु के बंधन कटतेप्रभु तुम जिसे सनाथ करो।नेहपूर्वक जिसे गहें श्रीवो कर मेरे माथ धरो । 5 हे ब्रज नंदन ,दुःख निकंदनमधु मुस्कानें मंडित हैं।मंदहास स्मित श्री अधरों सेघन घमंड सब खंडित हैं।अहो सखे !मत रूठो हमसेक्यों हमसे यह दूरी है।हम अबला असहाय नरी प्रभुश्यामल दर्श जरुरी है। 6 मधुरिम सुंदरतम प्रभु पग हैंपाप नष्ट कर देते हैं।श्री वन्दित प्रभु चरण आपकेसारे दुख हर लेते हैं।गौ बछड़ों के पीछे चलतेविषधर के फण पर नचते।शांत विरह की व्यथा करो प्रभुक्यों न हृदय पर पग रखते। 7 मधुर अधर वाणी सुमधुर हैशब्द ध्वनि आकर्षक सब।ज्ञान बुद्धि सब हुए समाहितमोहक छवि के दर्शक सब।सुन -सुन प्रभु वाणी का अमृतमोहित सब प्रभु प्यारी हैं।वाणी रस उपहार करो प्रभुजिसकी हम अधिकारी हैं। 8 दिव्य कर्म लीला अमरित समविरह पीर में जीवन है।ऋषि मुनि ज्ञानी सब गुण गातेपाप -ताप का मर्दन है।श्रवण मात्र कल्याण सुमंगललीला मधुरिम जो गाता।नहीं धरा पर उसके जैसा ,हृदय उदार परम दाता । 9 हँसत -लसत वो तिरछी चितवनवो लीला प्यारी -प्यारी।मग्न हृदय आनंदित मन थावो अँखिया कारी -कारी।वो अभिसारी मिलन ठिठोलीप्रेम भरी मीठी बातें।क्षुब्द हृदय अब तुम बिन छलियासूनी -सूनी अब रातें। 10 चरण कमल कोमल सुंदर हैंहे प्रियतम प्यारे स्वामी।ब्रज चौरासी कोस भ्रमण करगऊओं के तुम अनुगामी।युगल चरण में कंकड़ काँटेतिनके कुश चुभ जाते हैंतन -मन सब बैचेन व्यथित होदुःख बहुत हम पाते हैं। 11 सांध्यकाल जब तुम घर लौटोहम सब दर्शन को भटकें।धूल-धूसरित मुखड़े पर प्रियघुँघराली अलकें लटकें ।रूप सलोना मधुर मनोहरदेख हृदय ललचाता है।मिलने की उत्कट इच्छा मेंहुआ बावरा जाता है। 12 एकमेव हो नाथ आप हीपीड़ा को हरने वाले।शरणागत की हर इच्छा कोसदा पूर्ण करने वाले।श्री सेवित पृथ्वी के भूषणभव बाधा प्रभु आप हरो।कुंजबिहारी चरण आपकेवक्ष हमारे आप धरो। 13 अधरामृत सुख कर प्रिय माधवविरह जन्य सब शोक हरे।आत्म हृदय मन आनंदित होसुन वंशी सुर भाव भरे।पी कर यह अधरामृत केशवमिटें वासनाएँ गहरी।मंत्रमुग्ध मादल मन सुनकरदिव्य मधुर वह स्वर लहरी। 14 युग सम बीते पल छिन दिन सबवन विहार जब आप गए।सांध्य समय केशव जब लौटेमुख निहार आनंद भए।मधुर मनोहर सुंदर मुख परशोभित घुँघराली अलकें।क्रूर विधाता ने क्यों रच दींनयन बंद करती पलकें। 15 हे केशव तुमसे मिलने कोपति पुत्र बंधु कुल छोड़े।करी अवज्ञा उनकी हमनेतुमसे मन नाता जोड़े।मधुर गान सुनकर हम भागेरात अँधेरे तुम न मिले।हम असहाय नारियाँ छलियाक्यों तुम हमको छोड़ चले। 16 करते थे तुम नित्य ठिठोलीऔर प्रेम की मृदु बातें।प्रेम भरी चितवन कान्हा कीथीं अमूल्य वो सौगातें।है विशाल वक्षस्थल प्रभु काश्री जी जहाँ निवास करें।हृदय हुआ आसक्त आप परमिलन लालसा आत्म भरें। 17 सब ब्रज जन की पीड़ा हरता ,नष्ट सभी दुख-ताप प्रभो।यह अति शुभ प्राकट्य आपकाकल्याणक जग आप प्रभो।हे प्रभु इस आसक्त हृदय मेंप्यारी छवि है मोहन की।कोई औषधि दे दो कान्हा ,मिटे पीर इस जीवन की। 18 अंबुज कोमल जैसे प्रिय पगकुच कठोर दृढ़ छातीं है।कैसे रखें वक्ष पर श्री पगहम गोपी सकुचातीं हैं।जब ये पग भटकें जंगल मेंपीर हृदय में जगती है।जीवन माधव तुम्हें समर्पितश्री पग प्रीत उमगती है। 19छंद काव्यानुवाद -सुशील शर्मा
: गाडरवारा,952 वे सप्ताह मे कदम ने किया पोधारोपण
Sun, Mar 31, 2024
952 वे सप्ताह मे कदम ने किया पोधारोपण
गाडरवारा। जन्मोत्सव पर पौधारोपण करती आ रही कदम संस्था का साप्ताहिक पौधारोपण अभियान का 952 वें सप्ताह का पौधारोपण नर्मदा कालोनी स्थित सरस्वती शिशु उच्च माध्य.विद्यालय गाडरवारा प्रांगण में संपन्न हुआ जिसमें - यशवंत जी साहू आनंद राजपूत ,बृजेंद्र पटैल, श्रीमती रत्ना जी अग्रवाल श्रीमती वैशाली राय ,बृजेन्द्र चौरसिया,( देव नर्सरी )कुमारी नमामि काबरा, कुमारी राशि अग्रवाल ,चिरंजीव आराध्य सोनी, औरकुमारी काव्या साहू के जन्म दिवस के अवसर पर पौधा रोपित हुआ ।जन्मदिवस पर पौधारोपण करने वाले सभी को कदम साथियों ने गायत्री मंत्र व महामृत्युंजय मंत्र के माध्यम से अपनी शुभकामनाएं दीं ।लगातार तीन माह से सरस्वती शिशु मंदिर मे पौधारोपण चल रहा है ।इस अवसर पर कदम साथियों के अलावा नगर के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की ।