: श्रद्धा कौरव ने पीएससी में चयनित होकर बढ़ाया जिले का गौरव
Fri, Jun 7, 2024
श्रद्धा कौरव ने पीएससी में चयनित होकर बढ़ाया जिले का गौरव
गाडरवारा। गत दिवस मप्र लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा 2021 (मुख्य भाग) के घोषित नतीजों में स्थानीय निवासी श्रद्धा कौरव ने मप्र अधीनस्थ लेखा सेवा के पद पर चयनित होकर जिले को गौरवांवित किया है। ग्राम नरसरा के मूल निवासी एवं चीचली ब्लॉक में पदस्थ प्राथमिक शिक्षक संतराम कौरव की पुत्री श्रद्धा ने प्रथम प्रयास में ही उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। श्रद्धा कौरव की इस उल्लेखनीय सफलता पर उनके शुभचिंतकों ने उन्हें शुभकामनाएं दी है ।
: गाडरवारा,आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओ ने चढ़ाया शक्तिधाम में प्रसाद मां से की कृपा की कामना
Wed, May 15, 2024
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओ ने चढ़ाया शक्तिधाम में प्रसाद मां से की कृपा की कामना
गाडरवारा। बुधवार 15 मई की शाम क़ो परियोजना साईंखेड़ा गाडरवारा की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहायिकाओ ने शक्तिधाम देवी मंदिर पालोटान गंज में मातारानी क़ो प्रसाद चढ़ा कर जीवन में कृपा की कामना की। आंगनवाड़ी कर्मियों ने मातारानी क़ो चुनरी फल फूल मिठाई श्रृंगार सामग्री का चढ़ावा चढ़ाया। ज्ञात रहे कि गत वर्ष अपनी मांगो क़ो लेकर इन्होने गत वर्ष मार्च अप्रैल में इसी स्थान पर लगभग एक माह तक हड़ताल की थी। जिसके बाद सरकार द्वारा मानदेय में वृद्धि करने से इन्होने हड़ताल समाप्त की थी। जिसके बाद वर्ष भर विभिन्न व्यस्तताओ के उपरांत बुधवार क़ो प्रसाद चढ़ा कर मातारानी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। उल्लेखनीय है कि प्रसाद के अलावा इनके द्वारा मंदिर निर्माण हेतु सहयोग राशि भी दान में दी जाएगी। उक्तवासर पर नगरीय क्षेत्र गाडरवारा के अलावा साइंखेड़ा और अनेक गाँवो की कार्यकर्ता सहायिकाये उपस्थित रही।
: मजदूर दिवस पर विशेष (मजदूर कहाँ होते हैं)
Wed, May 1, 2024
मजदूर कहाँ होते हैं(अतुकान्तिका) मजदूर होते ही कहाँ हैंहोतीं हैं उनकी।काम पाने की आशा भरी सुबह।पसीने से तरबतर दोपहरफटे थैले में एक किलो आटे भरी शाम।बच्चों के साथ रोटी बांटती रात। मजदूर बीमार नहीं होतेबुखार में भी सीमेंट से भरे तसले कोले आते हैं तीसरी मंजिल पर। मजदूरों का बचपन नहीं होताउनका बचपनठेकेदार की गालियों औरदुकान की झूठन साफकरते हुए निकल जाता है। मजदूरों की शादियाँ नहीं होतींबस चुन लेते हैं एक साथीजो काम करके कुछ पैसे कमाए। मजदूरों के पास मकान नहीं होते हैंबस एक छोटा घर होता हैजिसमें वो सिर्फ रात को बैठकर सुकून की एक रोटी खाते हैं। मजदूरों का कोई देश नहीं होता हैन राज्य होता है न कोई शहर।बस एक वोट होता हैजिसे वो लोग चुरा कर डरा कर ले लेते हैंजो भाग्य विधाता हैं। मजदूरों के पास सिर्फ सरलता होती है,स्वाभिमान होता है।जो उनके पास कुछ भीन होने से ज्यादा कीमती होता है। सुशील शर्मा