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बड़े बाबा के चरणों में आने वाला हर व्यक्ति स्वयं में बड़ा बन जाता है" : कुण्डलपुर में पहुंचे श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज ने कहा कि

Aditi News Team

Sun, Aug 16, 2026

"बड़े बाबा के चरणों में आने वाला हर व्यक्ति स्वयं में बड़ा बन जाता है"मुनि श्री समता सागर जी

कुण्डलपुर(म.प्र.)। सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने कहा कि आप सभी सिद्धक्षेत्र की वंदना करने के लिए कुण्डलपुर पधारे हैं। यहां विराजमान बड़े बाबा भगवान श्री आदिनाथ जी का प्रभाव आप सभी अनुभव करते हैं। हमारे छोटे बाबा आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज आज भौतिक देह के रूप में हमारे बीच उपस्थित नहीं हैं, लेकिन वे पूरे भारतवर्ष और हम सभी के हृदय में आज भी विराजमान हैं।मुनि श्री ने कहा कि छोटे बाबा हमारे भीतर से निकलकर जाना भी चाहें तो नहीं जा सकते, क्योंकि वे हमारे अंदर आकर नहीं बैठे हैं, बल्कि हमने अपनी श्रद्धा, भावना और निवेदन से उन्हें अपने हृदय में स्थान दिया है। जब हमने अपनी भावनाओं से उन्हें अपने भीतर विराजमान किया है, तो हमारी इच्छा के बिना वे कहीं जा ही नहीं सकते। यही कारण है कि आज भी प्रत्येक श्रद्धालु बड़े बाबा के चरणों में यही भावना भाता है कि जब तक हमारे गुरुवर को मुक्ति प्राप्त न हो और जब तक हम सभी संसार के बंधनों से मुक्त न हों, तब तक भव-भव में वही गुरुवर हमारे गुरु बने रहें।उन्होंने कहा कि वर्षाकाल चल रहा है और इस समय सभी श्रद्धालु देव, शास्त्र और गुरु की भक्ति में तत्पर हैं। पूरे देश में मुनि संघों एवं आर्यिका संघों के चातुर्मास चल रहे हैं। सभी चातुर्मास आनंदपूर्वक, निर्विघ्न और जिनधर्म एवं जिनशासन की प्रभावना के साथ संपन्न हों, ऐसी भावना हम सभी को करनी चाहिए। अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ एवं प्रचारमंत्री जयकुमार जैन ‘जलज’ ने बताया कि प्रातःकालीन बेला में निर्यापक मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को बड़े बाबा के चरणाभिषेक के साथ शुद्ध भावना और अनुमोदना का महत्व समझाया। मुनि श्री ने कहा कि जो श्रद्धालु स्वयं अभिषेक नहीं कर पा रहे हैं, वे जहां हैं वहीं से पवित्र भावों के साथ अभिषेक की अनुमोदना करें। अनुमोदना करने वालों को भी पुण्य का अवसर प्राप्त होगा।मुनि श्री ने कहा कि आपने उदारतापूर्वक यहां द्रव्यदान की घोषणा की है। यह आपकी उदारता, त्याग और दान की भावना का परिणाम है, जो निश्चित रूप से प्रशंसनीय और सराहनीय है। जो बंधु यहां से लौटते समय अपनी सामर्थ्य के अनुसार थोड़ा भी सहयोग करके जाएंगे, वे भी प्रशंसा के पात्र हैं। और जो यह भावना लेकर जाएंगे कि इस बार हमने इतना किया है, अगली बार आएंगे तो और अधिक सेवा करेंगे, वे भी प्रशंसा के पात्र हैं। धर्म में दान की मात्रा से अधिक भावना का महत्व है।मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने कहा कि बड़े बाबा के चरणों में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने आप में बड़ा बन जाता है और बड़े कार्य करने की प्रेरणा प्राप्त करता है। आज समूचे देश से श्रद्धालु कुंडलपुर पहुंचे हैं। दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश सहित उत्तरप्रदेश, बिहार, बंगाल, ओडिशा आदि अनेक प्रदेशों से श्रद्धालु यहां आ रहे हैं। बड़े बाबा किसी एक क्षेत्र के नहीं, बल्कि संपूर्ण देश और समस्त देशवासियों के आराध्य हैं।उन्होंने अभिषेक के दौरान सभी श्रद्धालुओं से सावधानी, शुद्धता और अनुशासन बनाए रखने का आग्रह करते हुए कहा कि एक-दूसरे का ध्यान रखें, सहयोग करें और शांतिपूर्वक अभिषेक करें। सभी श्रद्धालु आराम से और आनंदपूर्वक बड़े बाबा का अभिषेक करें। यहां के पंडित, पुजारी और कार्यकर्ता बहुत अच्छे ढंग से व्यवस्था संभाल रहे हैं, इसलिए किसी को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। जब भी आपका नंबर आएगा, बड़े भावपूर्वक आपसे अभिषेक कराया जाएगा।मुनि श्री ने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे कुण्डलपुर की इस पावन यात्रा को केवल बाहरी वंदना तक सीमित न रखें, बल्कि बड़े बाबा के चरणों से श्रद्धा, समर्पण, सेवा और आत्मकल्याण की प्रेरणा लेकर अपने जीवन को भी धर्ममय बनाने का संकल्प मंच लेकर लौटें। पूज्य मुनि ससंघ सानिध्य में18 अगस्त को भगवान नेमिनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। 19 अगस्त 2026 को मुकुट सप्तमी पर्व पर भगवान श्री पार्श्वनाथ जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव भव्यता के साथ मनाया जाएगा इस अवसर पर भगवान पार्श्वनाथ का महा मस्तकाभिषेक एवं निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा।

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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज

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