शहर से लेकर गांव-तक किसकी शह से चल रहे से बंगाली डॉक्टरों का डेरा, : नरसिंहपुर जिले के ज़िम्मेदार संज्ञान खबरों पर नहीं ले रहे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एवं निगरानी पर उठे सवाल
Aditi News Team
Mon, Aug 17, 2026शहर से लेकर गांव-तक किसकी शह से चल रहे से बंगाली डॉक्टरों का डेरा,
नरसिंहपुर जिले के ज़िम्मेदार संज्ञान खबरों पर नहीं ले रहे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एवं निगरानी पर उठे सवाल
गाडरवारा। गाडरवारा, सालीचौका, चीचली और साईखेड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण इलाकों में कथित रूप से बिना स्पष्ट चिकित्सकीय योग्यता और पंजीयन के इलाज करने वाले तथाकथित “बंगाली डॉक्टरों” की मौजूदगी लंबे समय से चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह ऐसे दवाखाने संचालित होने के आरोप हैं, जहां विभिन्न प्रकार की बीमारियों का इलाज एक ही व्यक्ति द्वारा किए जाने का दावा किया जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग इन कथित चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल पंजीयन और इलाज करने की वैध अनुमति की जांच आखिर कब करेगा?
एक ही व्यक्ति, हर बीमारी का इलाज?
शहर के लोगो एवं ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि कुछ तथाकथित बंगाली डॉक्टर हर प्रकार की बीमारी के इलाज का दावा करते हैं। सामान्य बीमारी से लेकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं तक के उपचार और यहां तक कि विभिन्न प्रकार की प्रक्रियाएं या सर्जरी करने के दावे भी सामने आते हैं। यदि ऐसे दावे सही हैं, तो यह स्वास्थ्य विभाग के लिए गंभीर जांच का विषय होना चाहिए।
सवाल यह भी है कि क्या इन लोगों के पास मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री और संबंधित मेडिकल काउंसिल का वैध पंजीयन है?
यदि है तो उनकी डिग्री और पंजीयन नंबर सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं दिखाई देते?
न बोर्ड, न स्पष्ट पहचान—फिर कौन कर रहा इलाज?
कई ग्रामीण क्षेत्रों में कथित रूप से ऐसे दवाखाने दिखाई देते हैं जहां डॉक्टर का पूरा नाम, चिकित्सकीय योग्यता, पंजीयन क्रमांक अथवा संस्थान की स्पष्ट जानकारी प्रदर्शित नहीं होती। कई जगह केवल स्थानीय स्तर पर “बंगाली डॉक्टर” के नाम से पहचान बनी हुई है।
ऐसे में ग्रामीण मरीजों के सामने यह स्पष्ट होना जरूरी है कि उनका इलाज कौन कर रहा है और वह व्यक्ति किस योग्यता के आधार पर चिकित्सा सेवा दे रहा है।
उधार इलाज और दवाइयों से ग्रामीणों को आकर्षित करने का आरोप
ग्रामीण क्षेत्रों में यह भी चर्चा है कि कुछ कथित चिकित्सक आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उधार दवाइयां देने अथवा उधार इलाज करने की सुविधा देते हैं। इससे ग्रामीणों का भरोसा आसानी से बन जाता है और वे गंभीर बीमारी की स्थिति में भी इन्हीं के पास उपचार कराने पहुंच सकते हैं।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र प्रशासनिक जांच आवश्यक है।
चार बीएमओ क्षेत्रों में निगरानी का सवाल
गाडरवारा, सालीचौका, चीचली और साईखेड़ा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में यदि वास्तव में बड़ी संख्या में ऐसे कथित चिकित्सक बिना स्पष्ट पंजीयन और योग्यता के चिकित्सा कार्य कर रहे हैं, तो यह केवल स्वास्थ्य विभाग ही नहीं बल्कि स्थानीय प्रशासन के लिए भी गंभीर प्रश्न है।
क्या संबंधित स्वास्थ्य विभाग ने गांव-गांव जाकर इन दवाखानों का सत्यापन किया है?
क्या संचालकों की मेडिकल डिग्री और पंजीयन की जांच की गई है?
क्या बिना वैध योग्यता के इलाज करने वालों पर कोई कार्रवाई हुई है?
इन सवालों के जवाब ग्रामीण जनता को मिलना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग करे विशेष अभियान चलाकर जांच
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित बीएमओ और स्वास्थ्य विभाग को क्षेत्र में विशेष जांच अभियान चलाकर ऐसे सभी दवाखानों का सत्यापन करना चाहिए। संचालक की शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल पंजीयन, दवाओं की वैधता और गंभीर चिकित्सा प्रक्रियाएं करने की अनुमति सहित सभी दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति के पास वैध चिकित्सकीय योग्यता और पंजीयन है तो उसे अपना पंजीयन और योग्यता स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। वहीं यदि कोई व्यक्ति बिना वैध अधिकार के चिकित्सा कार्य करता पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों की सेहत के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। अब सवाल केवल “बंगाली डॉक्टर कौन है?” का नहीं, बल्कि यह है कि वह किस योग्यता और किस वैध अधिकार के तहत गांव के लोगों का इलाज कर रहा है। इन
Tags :