Thursday 16th of July 2026

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एम.आई.एम.टी. स्थापना दिवस समारोह में पद्म श्री विजय दत्त श्रीधर ने साहित्यकार सुशील शर्मा को टी.आर. नेमा साहित्य सम्मान

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं से विद्यार्थियों के सपनों को मिलेगी नई उड़ान- मंत्री उदय प्रताप सिंह

विभिन्न आयामों पर विद्यार्थियों से संवाद करते हुए दिया मार्गदर्शन

किसानो की विभिन्न मांगों को लेकर मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के प्रदेशव्यापी आव्हान पर प्रदेश भर में भूख हड़ताल चालू

ज्ञापन में गौ माताओ को कुचल कर हत्या करने वाले अज्ञात वाहन चालक एवं मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई

: "और फिर चुप्पी चीख़ उठी" (अतुकान्त कविता –सुशील शर्मा)

Aditi News Team

Thu, Apr 24, 2025
"और फिर चुप्पी चीख़ उठी" (अतुकान्त कविता –सुशील शर्मा) पहलगाम की वादियों में जहाँ बर्फ़ की चादरें धरती को शांति की परिभाषा देती थीं, वहाँ आज ख़ून की बूंदें गर्म होकर धरती से सवाल कर रही थीं — "मैं किसका हूँ?"   टूरिस्ट बस की खिड़की से झाँकती थीं उम्मीदें एक छुट्टी, एक राहत एक पल जीवन का... पर बंदूक़ों की नली से निकले शब्द नहीं, बारूद थे — जो धर्म पूछते थे और उत्तर न मिलने पर प्राण हर लेते थे।   कोई भगवा चुनता, कोई बिंदी पहचानता, कोई ‘राम’ कहने से पहले मर जाता।   वे हँसते रहे उनकी गोलियों में धर्म था, लेकिन मनुष्यता नहीं।   एक पत्नी बैठी थी पति की लाश के पास बेजान पत्थर सी क्योंकि उसके पति के हिंदू सीने में लगी थीं मुस्लिम गोलियां   और फिर चुप्पी चीख़ उठी — "ये युद्ध नहीं, नरसंहार है!"   देश जागा, पर नींद से नहीं, शोक से।   अब केवल आँसू नहीं बहेंगे — अब बहेंगे शपथ, अब उगेगा प्रतिशोध, अब राष्ट्र कहेगा — "हम नहीं झुकेंगे, हम नहीं भूलेंगे।"   ✒️सुशील शर्मा✒️

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