: अच्छे कर्मों से भगवान प्रसन्न होते हैं - रविकांत मिश्रा संगीतमय श्रीमद भागवत कथा में ग्रामवासी ले रहे पुण्यलाभ
अच्छे कर्मों से भगवान प्रसन्न होते हैं --- रविकांत मिश्रा
संगीतमय श्रीमद भागवत कथा में ग्रामवासी ले रहे पुण्यलाभ
गाडरवारा। समीपी ग्राम सांगई में वृंदावन धाम से आये पंडित रविकांत मिश्रा रसिक के मुखारबिंद से 7 दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन भी अनेक धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने पुण्यलाभ लिया । कथा में सर्वप्रथम सभी श्रद्धालुओ द्वारा भागवत भगवान की आरती का गायन किया गया । तदोपरांत कथावाचक श्री मिश्रा ने श्रीमद भागवत कथा सुनाते हुए कहा कि भक्त की भक्ति में कुछ दिन परेशानी होती है लेकिन जो भक्त सच्चे भाव से भगवान की भक्ति करता है उसकी परेशानी भगवान जरूर दूर करते है। उन्होंने सुदामा का उदाहरण देते हुए कहा कि सुदामा भगवान कृष्ण के बालसखा थे जब भगवान कृष्ण से उनकी बहुत दिनों बाद मुलाकात हुई तो सुदामा जी की वजह से उनकी बस्ती का भी उद्धार हो गया था। उन्होने कहा कि भागवत कर्म परमकल्याण करने वाला होता है। इस कर्म को करने से सभी का कल्याण होता है। उन्होंने शुभकर्म एवं सदकर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि दोनों कर्मो में बहुत अंतर है । सदकर्म में एक कर्म करने से सारे जगत का उद्धार होता है एवं सदकर्म का फल कभी खत्म नही होता है । सदकर्म करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। इसीलिए सभी को जीवन मे सदकर्म करते हुए भागवतीय कर्मो से जुड़े रहना चाहिए। भागवत कथा में उन्होंने आगे कहा कि रामायण में शबरी के जीवन में 9 प्रकार की भक्ति बताई गई है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने भगवान का मार्ग बताया है वही गुरु प्रथम पूज्यनीय है। हमारे देश मे गुरु की महिमा अपरंपार है। भगवान श्री राम एवं कृष्ण जी के भी गुरु थे। उस समय आश्रमों में रहकर शिक्षा ग्रहण की जाती थी। उन्होंने कथा में बताया कि कलयुग में सिर्फ भागवत कथा ही सहारा है क्योंकि कलयुग में इंसान ही इंसान को नीचा दिखाता है एवं इस युग मे रुपयों के महत्त्व सहित आपसी बैर एवं भेदभाव से मानव संबंध बिगड़े है। दूसरे दिन महाआरती एवं प्रसादी वितरण के साथ कथा का समापन हुआ। भागवत कथा के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं की उपस्तिथि उल्लेखनीय रही। आयोजक मंडल ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में प्रतिदिन श्रीमद भागवत कथा में उपस्थिति की अपील की है।
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