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: गाडरवारा, सतकर्म से देवता प्रसन्न होते हैं - स्वामी इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज  7 दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा में श्रद्धालु ले रहे पुण्यलाभ 

Aditi News Team

Thu, May 2, 2024
सतकर्म से देवता प्रसन्न होते हैं --- स्वामी इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज  7 दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा में श्रद्धालु ले रहे पुण्यलाभ  गाडरवारा। नगर के बोदरी मार्ग स्थित शनि मंदिर के पास एनटीपीसी आडिटोरियम के सामने श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी श्री इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज के मुखारबिंद से 7 दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन भी अनेक धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने पुण्यलाभ लिया । कथा में सर्वप्रथम सभी श्रद्धालुओ द्वारा भागवत भगवान की आरती का गायन किया गया । तदोपरांत कथावाचक महामंडलेश्वर स्वामी इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज ने श्रीमद भागवत कथा सुनाते हुए कहा कि भक्त की भक्ति में कुछ दिन परेशानी होती है लेकिन जो भक्त सच्चे भाव से भगवान की भक्ति करता है उसकी परेशानी भगवान जरूर दूर करते है। उन्होंने सुदामा का उदाहरण देते हुए कहा कि सुदामा भगवान कृष्ण के बालसखा थे जब भगवान कृष्ण से उनकी बहुत दिनों बाद मुलाकात हुई तो सुदामा जी की वजह से उनकी बस्ती का भी उद्धार हो गया था। श्री इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज ने कहा कि भागवत कर्म परमकल्याण करने वाला होता है। इस कर्म को करने से सभी का कल्याण होता है। उन्होंने शुभकर्म एवं सदकर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि दोनों कर्मो में बहुत अंतर है । सदकर्म में एक कर्म करने से सारे जगत का उद्धार होता है एवं सदकर्म का फल कभी खत्म नही होता है । सदकर्म करने से देवता प्रसन्न होते हैं। इसीलिए सभी को जीवन मे सदकर्म करते हुए भागवतीय कर्मो से जुड़े रहना चाहिए। भागवत कथा में श्री इंद्रदेव जी सरस्वती ने आगे कहा कि रामायण में शबरी के जीवन में 9 प्रकार की भक्ति बताई गई है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने भगवान का मार्ग बताया है वही गुरु प्रथम पूज्यनीय है। हमारे देश मे गुरु की महिमा अपरंपार है। भगवान श्री राम एवं कृष्ण जी के भी गुरु थे। उस समय आश्रमों में रहकर शिक्षा ग्रहण की जाती थी। उन्होंने कथा में बताया कि कलयुग में सिर्फ भागवत कथा ही सहारा है क्योंकि कलयुग में इंसान ही इंसान को नीचा दिखाता है एवं इस युग मे रुपयों के महत्त्व सहित आपसी बैर एवं भेदभाव से मानव संबंध बिगड़े है। उल्लेखनीय है कि संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन भी भजनों पर श्रद्धालुगण ताली बजाकर झूमने पर मजबूर हुए। दूसरे दिन महाआरती एवं प्रसादी वितरण के साथ कथा का समापन हुआ। भागवत कथा के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं की उपस्तिथि उल्लेखनीय रही। आयोजक मंडल ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में प्रतिदिन श्रीमद भागवत कथा में उपस्थिति की अपील की है।

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