: कर्म के प्रति अपार श्रद्धा होना जरूरी--- स्वामी इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज
कर्म के प्रति अपार श्रद्धा होना जरूरी--- स्वामी इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज
7 दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा का आयोजन प्रारंभ
गाडरवारा। नगर के बोदरी मार्ग स्थित शनि मंदिर के पास एनटीपीसी आडिटोरियम के सामने श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी श्री इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज के मुखारबिंद से 7 दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ बीते बुधवार से हो गया । भागवत कथा के पहले दिन सभी श्रद्धालुओ द्वारा भागवत भगवान की आरती का गायन किया गया । तदोपरांत कथावाचक स्वामी इंद्रदेव जी सरस्वती का जीवन परिचय एवं उनके द्वारा किए जा रहे धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों की जानकारी से श्रद्धालुओं को अवगत कराया गया। कथा के पहले दिन महामंडलेश्वर स्वामी इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज ने कहा कि कलश यात्रा में माताओं ने कलश रखकर भागीरथ का कार्य किया है। समुद्र मंथन के समय भी माता लक्ष्मी एवं धन्वंतरि भी कलश लेकर आये थे। अमृत वाले कलश पात्र को लेकर गरुड़ देव आकाश में उड़ गए थे जहां कलश की बूंद गिरी वहाँ आजकल कुंभ के मेले भरते हैं। स्वामी इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज ने कथा में श्रद्धा का महत्त्व बताते हुए कहा कि हम सभी की कर्म के प्रति अपार श्रद्धा होना चाहिए। यदि कर्म के प्रति श्रद्धा भरपूर होगी तो कर्म का फल जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा कि जीवन मे काम के प्रति श्रद्धा वाले जरूर सफल होते है। हमारी श्रद्धा से ज्ञान पैदा होता है एवं श्रद्धा सत्य और असत्य दोनों को धारण करती है। उन्होंने माता शबरी का उदाहरण देते हुए कहा कि शबरी की श्रद्धा गुरुजी व उनके वचनों पर थी । उनके गुरुजी कहते थे कि राम जरूर आएंगे और भगवान श्री राम शबरी की कुटिया में आये। स्वामी इंद्रदेव जी सरस्वती महाराज ने कथा में आगे कहा कि हमारे अंदर श्रद्धा का अभाव एवं टोटकों का प्रभाव अधिक है। यदि भगवान के प्रति आपकीं श्रद्धा है तो आपको टोटकों की ओर नही जाना पड़ेगा। बुधवार को श्रीमद भागवत कथा के पहले दिन बड़ी संख्या मे धर्मप्रेमी श्रद्धालुओ की उपस्थिति रही। कथा में संगीतमय भजनों पर श्रद्धालु भगवान की भक्ति में जमकर नाच रहे है। आयोजक मंडल ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में प्रतिदिन श्रीमद भागवत कथा में उपस्थिति की अपील की है।
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